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रिन्यूएबल एनर्जी का भोपाल बनेगा हब, आएंगे 50 हजार करोड़ रुपए

भोपाल में राउंड द क्लॉक बनेगी स्वच्छ एनर्जी, रिन्यूएबल एनर्जी में यहां लगेंगे 50 हजार करोड़ रुपए से अधिक लागत के प्रोजेक्ट ऐसे समझे नवीनकरणीय एनर्जी में निवेश ेराजधानी में ऐसे राउंड दि क्लॉक बनेगी बिजलीहाइब्रिड नवीकरणीय ऊर्जा….सोलर के साथ विंड एनर्जी के प्लांट जुड़े होंगे। सोलर से ऊर्जा दिन में उपलब्ध होगी, जबकि पवन […]

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Green energy city bhopal


भोपाल में राउंड द क्लॉक बनेगी स्वच्छ एनर्जी, रिन्यूएबल एनर्जी में यहां लगेंगे 50 हजार करोड़ रुपए से अधिक लागत के प्रोजेक्ट

  • जिंदल, केपीआई ग्रीन, केपी ग्रुप यहां स्वच्छ ऊर्जा के लिए हाइब्रिड प्लांट स्थापित करेंगे, दिन और रात दोनों समय बिजली बनेगीभोपाल.राजधानी अब देश और प्रदेश के लिए स्वच्छ ऊर्जा का एक नया पॉवर सेंटर बनने जा रहा है। यहां तीन बड़ी कंपनियां अपने प्लांट स्थापित करेगी। ये हाइब्रिड प्लांट होंगे तो राउंड दि क्लॉक यानि दिन और रात दोनों समय बिजली उत्पादन करते रहेंगे। प्रदेश में नवीनकरणीय ऊर्जा में करीब पौने छह लाख करोड़ रुपए का निवेश आया है। इसका दस फीसदी भी भोपाल में आया तो ये राशि 50 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा बनेगी। जिंदल, केपीआई ग्रीन और केपी गु्रप ने यहां निवेश प्रस्तावित किए हैं। निवेश भोपाल की जरूरत की 2200 मेगावाट एनर्जी तो उत्पन्न करेगा ही, इसे आसपास के क्षेत्रों में भी बिजली की आपूर्ति की जा सकेगी।

ऐसे समझे नवीनकरणीय एनर्जी में निवेश

  • 5.72 लाख करोड़ रुपए का निवेश आया रिन्यूएबल एनर्जी क्षेत्र में
  • 1.4 लाख नए रोजगार के अवसर बनेंगे
  • 08 बड़े समूह का निवेश है
  • 03 समूह का भोपाल में निवेश

ेराजधानी में ऐसे राउंड दि क्लॉक बनेगी बिजली
हाइब्रिड नवीकरणीय ऊर्जा….सोलर के साथ विंड एनर्जी के प्लांट जुड़े होंगे। सोलर से ऊर्जा दिन में उपलब्ध होगी, जबकि पवन ऊर्जा रात में भी उत्पन्न होती रहेगी। इसी तरह इससे हाइड्रो पॉवर को भी जोड़ा जाएगा जिससे राउंड दि क्लॉक बिजली बनने की स्थिति बनेगी। भोपाल इसके लिए सबसे बेहतर है। 2012 से अब तक एक दशक में प्रदेश में नवीनकरणीय ऊर्जा 11 गुना बढ़ी है, लेकिन भोपाल में ये एक फीसदी भी नहीं है। अब नए प्रोजेक्ट से इसमें तेजी आएगी।

अतिरिक्त ऊर्जा को पंप स्टोरेज से सहेजेंगे

  • दिन में उत्पादित अतिरिक्त सौर या पवन ऊर्जा को बैटरियों में तो स्टोर किया ही जाएगा, साथ ही पंप स्टोरेज हाइड्रोपावर यानि पानी को ऊँचाई पर पंप करने टरबाइन प्रणाली से भी एनर्जी स्टोर की जाएगी। नई तकनीकी में स्वच्छ ऊर्जा से हाइड्रोजन बनाना भी शामिल है, जिससे बाद में बिजली उत्पादन किया जा सकेगा। नवाचार के तहत यहां स्थापित प्रोजेक्ट्स नवीकरणीय ऊर्जा से पानी का इलेक्ट्रोलिसिस करके हाइड्रोजन उत्पन्न किया जाएगा, जिसे ईंधन के रूप में इस्तेमाल कर निरंतर बिजली उत्पादन किया जा सकता है।

ेऐसे समझे प्रदेश में रिन्यूएबल का गति

  • मप्र में 62 जिगावॉट सोलर व 15 जिगावॉट विंड से उत्पादन का लक्ष्य
  • 800 मेगावाट थी 2012 में
  • 2500 हुई 2015 में
  • 4000 मेगावाट पर आई 2018 में
  • 5000 मेगावाट से हजार हुई 2022 में
  • 7000 मेगावाट से अधिक है अभी

प्रदेश में यहां ग्रीन एनर्जी के प्लांट

  • रीवा में 750 मेगावाट
  • मंदसौर में 250 मेगावाट
  • ओंकारेश्वर में 278 मेगावाट
  • आगर में 550 मेगावाट
  • शाजापुर में 450 मेगावाट
  • नीमच में 500 मेगावाट
  • छतरपुर में 950 मेगावाट
  • मुरैना में 1400 मेगावाटनोट- भोपाल में पांच मेगावाट का भेल का एकमात्र बड़ा प्लांट है।

रिन्यूएबल एनर्जी राष्ट्रीय लक्ष्य

  • 500 मेगावाट का लक्ष्य है 2030 में
  • 50 फीसदी ऊर्जा खपत रिन्यूएबल एनर्जी से करना है 2030 तक
  • 45 फीसदी तक कार्बन उत्सर्जन लाना है 2030 तक
  • 00 कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य प्राप्त करना है 2070 तक

रिन्यूएबल एनर्जी में संभावनाओं से भरा भोपाल, काम शुरू तो करें

  • रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स एक्सपर्ट संयम इंदूरख्या का कहना है कि भोपाल में इसकी असीम संभावनाएं है। 19 ताल-तलैयाओं में ओंकारेश्वर की तरह फ्लोटिंग प्लांट स्थापित किया जा सकता है। सात पहाडिय़ां है, जिनपर अतिक्रमण हो रहे हैं, यहां विंड एनर्जी के नए प्रोजेक्ट्स लगा सकते हैं। कलियासोत नदी शहर में 17 किमी तक बहती है और इसके 33 मीटर में अतिक्रमण हो रहा है, यहां बड़े हिस्से में ग्रीन एनर्जी प्लांट स्थापित हो सकते हैं। स्टॉप डेम बनाकर यहां भी फ्लोटिंग प्लांट लगा सकते हैं।

कोट्स
रिन्यूएबल एनर्जी को लेकर काफी बेहतर रिस्पांस आया है। हमारी टीम अब निवेशकों के संपर्क में है और पूरी मदद देकर प्रोजेक्ट्स तय समय में पूरे कराएंगे।

  • मनू श्रीवास्तव, एसीएस, ऊर्जा- नवीनकरणीय
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