
इंदौर के साथ भोपाल भी जल्द भिखारियों से मुक्त होगा। इस संबंध में शुक्रवार को कलेक्टर ने सामाजिक न्याय विभाग को निर्देश दिए हैं। कलेक्टर ने कहा कि भोपाल में चौराहों पर काफी भिखारी दिखाई देते हैं, इसमें काफी बच्चे भी हैं। अगले सात दिन में विभाग कार्ययोजना तैयार कर इसे प्रस्तुत करें। गौरतलब है कि राजधानी में ढाई से तीन हजार भिखारी हैं, तो डेढ़ से दो हजार पांच से सोलह साल के बच्चे हैं जो अलग-अलग चौराहों पर भीख मांगते देखे जाते हैं। कलेक्टर ने इस मामले में जमीन पर उतरकर काम करने के निर्देश दिए हैं।
कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने शुक्रवार को तीन विभागों की समीक्षा की। विभागों द्वारा किए जा रहे कार्यों व सरकारी योजनाओं को ज्यादा लोगों तक पहुुंचाने के लिए उन्होंने कार्य योजना बनाने के निर्देश दिए हैं। महिला बाल विकास विभाग की समीक्षा बैठक में कलेक्टर ने कहा कि प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में प्राप्त उपलब्धि की स्थिति में सुधार कर समय सीमा बताएं। इसके साथ ही पोषण पुनर्वास केंद्रों में बेड ऑक्युपेंसी को शत प्रतिशत किया जाए। वितरित किए जा रहे नाश्ते व भोजन के लिए जिला स्तर से गुणवत्ता परीक्षण के लिए दल बनाएं। किसी तरह की कमी मिलने पर कार्रवाई भी की जाए। कलेक्टर ने इन संस्थानों में भ्रमण कर निरीक्षण करने की इच्छा भी व्यक्त की है।
छात्राओं के हॉस्टल में महिला अधिकारी ही करें निरीक्षण
अनुसूचित जाति एवं जनजाति विभाग की समीक्षा में कलेक्टर ने कहा कि विभाग के अंतर्गत आने वाले स्कूल में शिक्षा की गुणवत्ता उच्च स्तर की हो। छात्रावास में बच्चों को मिलने वाली सुविधाएं समय पर उपलब्ध हों और गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखें। सामाजिक न्याय एवं नि:शक्तजन कल्याण विभाग की समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने कहा कि सभी वार्ड व ग्राम पंचायतों में अगले 2 माह में विभाग टीम बनाकर सर्वे कराएं। दिव्यांगजनों को योजनाओं का लाभ मिले, ऐसी योजना तैयार की जाए।
Updated on:
09 Feb 2024 11:35 pm
Published on:
09 Feb 2024 11:31 pm
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