
एमपी में मौसम ने किसानों पर जबर्दस्त कहर बरपाया
भोपाल. एमपी में मौसम ने किसानों पर जबर्दस्त कहर बरपाया है। करीब 5 दिनों तक बरसात, ओला और आंधी के कारण प्रदेश के करीब दो दर्जन जिलों में खासी बर्बादी हुई है। गेहूं चना के साथ सरसों भी खराब हो गया है।बुरी बात तो यह है कि अभी भी प्रदेश में अधिकांश फसल कटी नहीं है। कई लाख हेक्टेयर के खेतों में खड़ी इस फसल पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
प्रदेश में मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है। विंध्य और मालवा में कई जगहों पर ओले गिरे जिससे फसलें बर्बाद हो गई हैं। अन्य इलाकों में भी आंधी, ओला पानी से खेती खराब हुई है। ओलों और बारिश से फसलों को जबर्दस्त नुकसान पहुंचा है। दलहनी फसलें चौपट हो गई हैं। खेतों में खड़ी फसलें आड़ी हो गई है।
मौसम विज्ञानी पीके रायकवार के अनुसार हिमालय क्षेत्र में 12 मार्च से एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो सकता है. इसके प्रभाव से 14 मार्च से बरसात शुरु हो सकती है। 14 से 16 मार्च तक यानि करीब 3 दिनों तक कहीं-कहीं गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। ऐसे में खेतों में खड़ी फसल आड़ी हो सकती है।
शुक्रवार को मौसम कुछ शुष्क जरूर हुआ लेकिन खतरा बरकरार है। मौसम विज्ञानियों के अनुसार अभी तीन चार दिन तापमान में उछाल आ सकता है लेकिन मौसम फिर बदल सकता है। प्रदेश में एक बार फिर बारिश की चेतावनी दी गई है। 14 मार्च से बारिश का नया दौर शुरु होगा जोकि 3 या 4 दिन चलेगा।
इस सीजन में करीब 130 लाख हेक्टेयर जमीन पर बोवनी की गई थी. मुख्यत: गेहूं और चना के साथ कुछ जगहों पर सरसों की फसल भी है जिनमें से ज्यादातर खेतों में खड़ी है या खलिहानों में है। अनुमान के अनुसार करीब 120 लाख हेक्टेयर खेतों में फसल खड़ी है। मौसम वैज्ञानिकों की बारिश की चेतावनी के कारण किसानों को तुरंत पकी फसल काट लेने की सलाह दी जा रही है।
Published on:
11 Mar 2023 12:44 pm

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