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22 दिसंबर को शनि और सूर्य कर रहे हैं युति, जानिये इसका क्या होगा आप पर प्रभाव

शत्रु भाव वाले शनि और सूर्य के एक घर में आने से राशियों पर पड़ेगा असर, साल के अंत में बनेंगे योग, विशेष आराधना से होंगे कष्ट दूर।

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भोपाल। साल 2017 के आखिर में सूर्य और शनि का मिलन (युति) Sun and Saturn Combination होने जा रहा है। मतलब यह दोनों ग्रह एक राशि में आएंगे। जानकारों की मानें तो जब-जब दो ग्रहों का मिलन होता है, सभी राशियों पर इसका असर effects on your zodiac sign होता है।

ब्रह्मशक्ति ज्योतिष संस्थान के ज्योतिषाचार्य पं जगदीश शर्मा के मुताबिक 22 दिसंबर को धनुराशि में सूर्य और शनि की युति हो रही है। सूर्य और शनि पिता-पुत्र होने पर भी परस्पर शत्रुता रखते हैं। एेसे में लोगों की राशियों पर भी इसका अच्छा बुरा असर पड़ता है। सूर्य-शनि युति indian astrology जीवन को पूर्णत: संघर्षमय बनाती हैं। पं. शर्मा ने बताया कि दोनों ग्रहों की युति का असर आम लोगों से लेकर देश और सरकारों पर भी होता है। यह युति जहां जीवन में सफलता, मान सम्मान और सम्मान का कारक बनती है तो बीमारी, नुकसान अशांति जैसे कारण भी सामनने आते हैं।

यह युति लग्न, पंचम, नवम या दशम में हो और दोनों (सूर्य-शनि) में से कोई ग्रह इन भावों का कारक भी हो तो यह योग जीवन में विलंब लाता है। बेहद मेहनत के बाद समय बीत जाने पर सफलता Sun and Saturn Combination effect on you आती है। पिता-पुत्र में मतभेद हमेशा बना रहता है और दूर रहने के भी योग बनते हैं।

इस माह जगत कुंडली में 8 दिसंबर से 23 दिसंबर तक सर्पयोग बन रहा है। साल के अंतिम माह में शनि,शुक्र और बुध ग्रह अस्त हो रहे हैं। इससे मौसम परिवर्तन होगा। साथ ही प्राकृतिक आपदा की संभावना बनी रहेगी। वहीं जिन लोगों पर शनि भारी है, फिलहाल उन्हें राहत मिलेगी।

12 राशियों पर प्रभाव Sun and Saturn Combination effect on your kundali:
मेष- अशांति रहेगी।
वृष-स्वस्थ्य का ध्यान रखें।
मिथुन-सफलता मिलेगी।
कर्क-शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी।
सिंह-शिक्षा के क्षेत्र में सफलता की संभावना।
कन्या-वाहन सावधानी से चलाएं।
तुला-उत्साह वृद्धि, यात्रा लाभ।
वृश्चिक-यात्राओं से बचें।
धनु-बेहद सावधानी रखें।
मकर-स्वास्थ्य का ध्यान रखें।
कुंभ-लाभ,यश मिलेगा।
मीन- पद उन्नति होगी।

ज्योतिषशास्त्र के अनुसार सूर्य व शनि कभी भी मित्र Effects of Sun and Saturn Combination on your Life news की अवस्था मे्ं नहीं माने जाते। एक ओर जहां सूर्य आत्मा का कारक ग्रह माना जाता है। वहीं शनि दुख का स्वामी माना गया है। वहीं इनमें पिता पुत्र का रिश्ता होने के बावजूद ये आपस में शत्रु भाव Effects of Sun and Saturn Combination रखते हैं। पंडित सुनील शर्मा के अनुसार सूर्य शनि के एक ही भाव में आने से आपसी कटूता तो बढ़ती है मन मुटाव में भी वृद्धि होती देखी गई है। सूर्य शानि की आपसी युति कभी अच्छी नहीं मानी जाती है।

शनि और सूर्य क्यों हैं शत्रुता:
पौराणिक कथाओं के अनुसार सूर्य और शनि Sun and Saturn Combination की इस शत्रुता के पीछे की कहानी कुछ इस प्रकार है। हुआ यूं कि सूर्यदेव का विवाह त्वष्टा की पुत्री संज्ञा के साथ हो गया। अब सूर्यदेव का तेज था बहुत अधिक जो संज्ञा से सहन नहीं होता था फिर भी जैसे-तैसे उन्होंनें सूर्यदेव के साथ जीवन बिताना शुरु किया वैवस्त मनु, यम और यमी के जन्म के बाद उनके लिये सूर्यदेव का तेज सहन करना बहुत ही मुश्किल होने लगा तब उन्हें एक उपाय सूझा और अपनी परछाई छाया को सूर्यदेव के पास छोड़ कर वे चली गई।

सूर्यदेव को छाया पर जरा भी संदेह नहीं हुआ कि यह संज्ञा नहीं है अब सूर्यदेव और छाया खुशी-खुशी अपना जीवन व्यतीत कर रहे थे उनके मिलन से सावर्ण्य मनु, तपती, भद्रा एवं शनि का जन्म हुआ। जब शनि छाया के गर्भ में थे छाया तपस्यारत रहते हुए व्रत उपवास करती थीं। कहते हैं कि अत्यधिक उपवास करने के कारण गर्भ में ही शनिदेव का रंग काला हो गया।

जन्म के बाद जब सूर्यदेव ने शनि को देखा तो उनके काले रंग को देखकर उसे अपनाने से इंकार करते हुए छाया पर आरोप लगाया कि यह उनका पुत्र नहीं हो सकता, लाख समझाने पर भी सूर्यदेव नहीं माने। इसी कारण खुद के और अपनी माता के अपमान के कारण शनिदेव सूर्यदेव से वैरभाव रखने लगे। शनिदेव ने भगवान शिव की कठोर तपस्या कर अनेक शक्तियां प्राप्त की और एक न्यायप्रिय देवता के रुप में अपना स्थान प्राप्त किया।

वहीं कुछ पौराणिक कथाओं में ऐसा भी मिलता है कि जन्म के पश्चात जब शनिदेव ने सूर्यदेव को देखा तो वे कोढग्रस्त हो गये इसके बाद संज्ञा और छाया के राज का पटाक्षेप भी हुआ फिर वे अपनी पत्नी संज्ञा के पास वापस चले गये।

शनि-सूर्य की शत्रुता का ज्योतिष पर प्रभाव :
शनि और सूर्य के बीच शत्रुता के इस संबंध का ज्योतिष शास्त्र में भी फलादेश करते समय ध्यान रखा जाता है। सूर्य जब मेश राशि में उच्च के होते हैं तो शनि का स्थान उसमें नीच का होता है वहीं तुला में अगर सूर्य नीच का है तो शनि तुला में उच्च Effects of Sun and Saturn Combination on your Life news in hindi होते हैं। एक राशि में एक समय दोनों का टिकना बहुत मुश्किल होता है यदि किसी राशि में दोनों साथ बैठ भी जायें तो परस्पर विरोध होता रहता है। इसी तरह सूर्य के साथ-साथ शनि उनके मित्र चंद्रमा से भी वैरभाव रखते हैं। सूर्य और शनि की स्थिति कष्टदायी अवश्य होती है लेकिन कई बार यह बड़ी सफलता भी लेकर आती है।

नोट: माना जाता है कि अपनी मां की सेवा भी हमें शनि के क्रोध की अग्नि से काफी हद तक बचााती है।

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