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बिरसा मुंडा ने स्वतंत्रता आंदोलन के जननायक बनकर की मानव सेवा

शहीद भवन में नाटक बिरसा मुंडा का मंचन

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भोपाल। रामकृष्ण रिपरटायर कल्चरल एंड सोशल सोसायटी की ओर से मंगलवार को शहीद भवन में नाटक बिरसा मुंडा का मंचन किया गया। इसके लेखक सतीश और निर्देशन राजकुमार रायकवार ने किया है। नाटक में दिखाया कि जल, जंगल और जमीन के लिए किस तरह से बिरसा मुंडा ने स्वतंत्रता आंदोलन के जननायक बनकर मानव सेवा की। नाटक में दिखाया गया कि बिरसा मुंडा का जीवन स्वाभिमान के लिए संघर्ष का प्रतीक है। वह अपने समुदाय के प्रति हो रहे अपमान के चलते स्कूल छोड़ देते हैं। वह जनजातीय समाज के नायक के रूप में उभरते हैं और गुलामी के कठिन जीवन से मुक्ति के लिए आंदोलन शुरू करते हैं। वह धर्म के महत्व और स्वरुप की अपनी निजी व्याख्या करते हैं और एक ऐसे धर्म की स्थापना करते हैं, जहां भय नहीं विश्वास है और साथ ही स्वतंत्र जीवन की चाहत है। वे मुंडाओं को संगठित करते हैं और नई सामाजिक व्यवस्था तथा आजादी के लिए लड़ते हैं।

बदले की भावना व्यक्ति को पतन में ले जाकर नष्ट कर देती है
टैगोर राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में विजयदान देथा की कहानियों का मंचनभोपाल. रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के टैगोर राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के पूर्व निदेशक देवेन्द्र राज अंकुर के निर्देशन में कहानीकार विजयदान देथा की तीन कहानियों का मंचन किया गया। 12 दिन की कार्यशाला में विद्यार्थियों को देथा की तीन कहानियां अनेकों हिटलर, दूजौ कबीर और आदमखोर तैयार करवाई गई। अंतिम दिन विद्यार्थियों ने इसकी कक्षाभ्यास प्रस्तुति दी। नाटक की कहानी अनेकों हिटलर यह संदेश देती है कि बेवहज हुई होड़ या प्रतिद्वंद्विता बदले की भावना में बदल जाती है और वह एक हिंसा के रूप में सामने आती है। वहीं, कहानी दूजौ कबीर में बताया गया कि कलाकार कभी किसी के बंधन में नहीं रह सकता। उसे कोई भी लोभ या मोह बांधकर नहीं रख सकता। तीसरी कहानी आदमखोर में बताया कि बदले की भावना किस तरह व्यक्ति को पतन में ले जाकर नष्ट कर देती है।