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पूछने पर बोले थे पटवा, आजकल विधानसभा में शोर ज्यादा होता है!

वरिष्ठ नेता सुंदर लाल पटवा का बुधवार अलसुबह एक निजी अस्पताल में हार्ट अटैक से निधन हो गया। यहाँ हम आपको सुंदर लाल पटवा का आखिरी इंटरव्यू सुना/पढ़ा रहे हैं...

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gaurav nauriyal

Dec 29, 2016

sunderlal patwa

sunderlal patwa

भोपाल. मध्यप्रदेश में भाजपा को सींचने वाले और दो बार मुख्यमंत्री रहे वरिष्ठ नेता सुंदर लाल पटवा का बुधवार अलसुबह एक निजी अस्पताल में हार्ट अटैक से निधन हो गया। 92 वर्ष के पटवा के निधन के साथ एक युग समाप्त हो गया। पटवा को भोपाल और मध्यप्रदेश मिसाल के तौर पर याद करता है।

भोपाल की सबसे खूबसूरत जगह में से एक वीआईपी रोड पटवा की ही देन है, जबकि मध्यप्रदेश में भाजपा की जीत में अनेक नींव के पत्थर पटवा के लगाए हुए है। इनमें सबसे अहम छिंदवाड़ा में कांग्रेस के दिग्गज नेता कमलनाथ को शिकस्त देना शामिल है। पटवा एेसे एकमात्र राजनेता हैं, जिन्होंने छिंदवाड़ा में कमलनाथ को हराकर कमल खिलाया था। पटवा महज 12वीं कक्षा पास थे। राजनीति में आने से पहले खेती- किसानी करते थे। तैराक और खिलाड़ी भी अच्छे रहे। यहाँ हम आपको सुंदर लाल पटवा का आखिरी इंटरव्यू सुना/पढ़ा रहे हैं...



अंतिम साक्षात्कार
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रहे सुंदरलाल पटवा का कहना है कि मध्यप्रदेश में भाजपा ने धीरे-धीरे अपनी जगह बनाई, लोगों से पार्टी के काम-काज को पसंद किया। जनता का समर्थन मिला और हम आगे बढ़ते गए। रेडियो आजाद हिंद को दिए इंटरव्यू में उन्होंने यह बात कही। पेश है इंटरव्यू के मुख्य अंश

Q: सरदार सरोवर बांध आपके कार्यकाल की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। तीन राज्यों से तालमेल कैस बन सका?
A: मैंने काम शुरू किया, शुरुआत में कुछ लोगों ने विरोध भी किया, लेकिन मैं काम करता गया और विरोधी पीछे हटते चले गए।

Q: क्या आप मानते हैं कि राजनीति में आने के बाद व्यक्तिगत शौक और इच्छाएं पूरी नहीं हो पातीं?
A: राजनीति में आने के बाद व्यक्तिगत शौक और इच्छाओं को मारना पड़ता है, यही सत्य है।

Q: आपके कार्यकाल में बहुत से विधायक एेसे हैं जो पहली बार चुनकर आए, उनमें से कुछ शीर्ष पर हैं, क्या उनके व्यवहार में कोई परिवर्तन दिखता है?
A: यह सही है कि उस दौर के कई विधायक आज भी बेहतर काम कर रहे हैं। विधायकों के व्यवहार में मुझे कोई परिवर्तन नहीं दिखता।

Q: मध्यप्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ राज्य का गठन हो गया। क्या छोटे राज्य प्रदेश के हित में हैं?
A: छोटे और बड़े राज्यों का अपना-अपना महत्व है। एकदम से यह नहीं कहा जा सकता कि छोर्ट या बड़े राज्य प्रदेश हित में हैं या नहीं।

Q: आपने पूरे प्रदेश की पदयात्रा की, अनुभव कैसा रहा?
A: मैंने पदयात्रा की शुरुआत बस्तर से की थी। उस दौरान यात्रा की शुरुआत में आडवाणीजी आए थे। यात्रा में लोगों का सहयोग रहा। आनंद भी आया।

Q: आमतौर पर विधायक एक ही सीट से चुनाव लड़ता है, लेकिन आपने अलग-अलग विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा। इसका कोई खास कारण?
A: कोई खास कारण नहीं, पार्टी के आदेश का पालन किया। पार्टी ने जब जिस सीट से कहा वहां से चुनाव लड़ा। विभिन्न सीटों से चुनाव लडऩा पार्टी का ही फैसला था।

Q: आपने कुशाभाऊ ठाकरे जी के साथ काम किया है, कोई अनुभव?
A: मैनें हमेशा ही कार्यकर्ता के तौर पर काम किया। ठाकरे जी का हमेशा ही स्नेह मुझे मिला। मैंने उनके आदेश का हमेशा पालन किया।

Q: आपका मुख्यमंत्रित्व काल स्वर्णिम रहा, जबकि इसके बाद किसी का कार्यकाल एेसा नहीं कहा जाता?
A: मैंने कभी किसी के कार्यकाल का परीक्षण नहीं किया।

Q: क्या आप मानते हैं कि राजनीति में गिरावट आई है?
A: राजनीति में भाजपा को मैं सर्वश्रेष्ठ कहूंगा। पार्टी में कोई बुराई न आए इसके लिए निरंतर प्रयास होते रहते हैं। जब सत्ता मिलती है तो कार्यकर्ता सोचता है कि मुझे क्या मिलेगा, लेकिन जब सत्ता नहीं होती तो संघर्ष ही होता है।

Q: आपने आडवानी जी के साथ काम करने का मौका मिला, अनुभव कैसा रहा?
A: अहमदाबाद में संघ का एक माह का प्रशिक्षण वर्ग था। इस प्रशिक्षण में आडवाणी जी थे। वह अनुभव यादगार रहा। आडवाणी जी का हमेशा ही सहयोग मिला।

Q: कहा जाता है कि सरकारों में ब्यूरोक्रेसी हावी रहती है?
A: यह व्यक्ति पर निर्भर करता है। जैसा माहौल बनाया जाता है वैसा नहीं है। सभी को मिलकर काम करना होता है, सभी के सहयोग से काम होतेे हैं।

Q: आपके बारे में कहा जाता है कि आप जो तय कर लेते हैं वह पूरा करके ही मानते हैं?
A: योजना ब्यूरोक्रेसी थोड़े ही बनाती है, योजना तो मुख्यमंत्री ही बनाते हैं उसका क्रियान्वयन ठीक ढंग से हो, यह सही है कि कई बार चाहते हुए भी काम नहीं हो पाते।

Q: देखने में आता है कि सदन में कुछ ही विधायक मुखर रहते हैं, बाकी मूक दर्शक ही होते हैं?
A: यह व्यक्ति के स्वभाव पर निर्भर करता है। मुखर व्यक्ति हमेशा ही मुखर होता है। अन्य विधायकों को भी मुखर होना चाहिए। अपनी बात कहने का सलीका भी उन्हें आना चाहिए। यह भी सही है कि आजकल विधानसभा में काम कम शोर शराबा ज्यादा होता है।

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