स्कूलों में जिस एनसीईआरटी की किताबें पढ़ाए जाने की लड़ाई वर्षों से लड़ी जा रही है, उसकी किताबें बच्चों को घटिया और फूहड़ भाषा का ज्ञान करवा रही हैं। कक्षा एक की हिन्दी भाषा की प्रथम पुस्तक 'रिमझिम1' में ऐसी दर्जनों गलतियां हैं, जिन्हें देख-पढ़कर कोई भी अभिभावक दंग रह जाएगा। वह इन किताबों से अपने बच्चों को पढ़ाने के पक्ष में नहीं रह जाएगा। इसमें हिन्दी वर्णमाला के स्वर, व्यंजन और संयुक्त स्वर के क्रम से लेकर उन्हें पढ़ाए जाने के तरीके जिस ढंग से बदले गए हैं, वह बच्चों को गलत ज्ञान करवा रहे हैं। कुछ वर्ण दिए ही नहीं हैं। इन्हें सिखाए जाने के तरीकों की बात तो दूर की कौड़ी है। वहीं, पहली कक्षा के बच्चों को मात्राओं का ज्ञान करवाने वाली कोई सामग्री एनसीईआरटी की किताब में नहीं है। इतना ही नहीं पूर्व में आने वाली किताबों में दी गई कविताएं और पाठ बच्चों को नैतिक, सामाजिक, व्यवाहारिक और संस्कारपूर्ण शिक्षा प्रदान करते थे, लेकिन हम जिस मौजूदा किताब की बात कर रहे हैं वो हल्के, अव्यवहारिक और अशोभनीय शब्दों का ज्ञान करवा रही है। यकीन मानिए जिन कथित शिक्षाविदों ने इस किताब को तैयार किया या जिस रचियेता ने ये कविताएं लिखी वे खुद अपने घर में इन शब्दों से परहेज करते होंगे। फिर लाखों स्कूली बच्चों को ये शब्द क्यों पढ़ाए जा रहे हैं? कहीं ऐसा तो नहीं कि ये कथित शिक्षाविद् और रचियेता कुछ अलग करने के चक्कर में फूहड़ कर बैठे। एनसीईआरटी ने यह किताब 2012 में प्रकाशित की है।