
भोपाल. पूरी उम्र लोगों की सेवा का संकल्प लेने वाले 69 वर्षीय निर्मल जैन ने मृत्यु के बाद भी अपने संकल्प को पूरा किया। उन्होंने ना केवल अपनी देह समाज के नाम की, वहीं आंखों से दो लोगों के जीवन में नई रोशनी दी।
उन्होंने अपनी वसीयत में ही देह और अंगदान करने की बात कही थी। छोटे भाई सुनील जैन 501 ने बताया कि उनके बड़े भाई हमेशा से ही लोगों की मदद के लिए आगे रहते थे। वो हमेशा कहते थे कि जीवन का दूसरा अर्थ सेवा ही है। उन्होंने बताया कि भाई की इच्छा के अनुसार उनकी मृत्यु के बाद उनकी देह एम्स अस्पताल में दान की थी। वहीं आंखें सेवासदन अस्पताल को दान दी गईं हैं। निर्मल जैन को सप्ताह भर पहले ब्रेन हैमरेज हो गया था। उनकी मृत्यु बुधवार सुबह करीब ६.३० बजे हुई। इसके बाद उनकी दाह दान की गई।
ये अंग भी किए जा सकते हैं दान
किडनी, हार्ट, लीवर, लंग्स, पैंक्रियाज, कॉर्निया और स्मॉल बाउल (छोटी आंत) का प्रत्यारोपण किया जा सकता है। ऊतकों में हृदय के वॉल्व, हड्डियां और त्वचा को दान किया जा सकता है।
ऐसे करें देहदान
-मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल के एनोटॉमी विभागाध्यक्ष के नाम लिखित में आवेदन करना होगा।
-एनोटॉमी विभाग की ओर से दो पेज का फार्म निशुल्क दिया जाएगा।
-फार्म में देहदान करने वाले व्यक्ति का नाम, पता, उत्तराधिकारी का नाम के साथ दो गवाहों का उल्लेख होता है।फार्म जमा होने के बाद रजिस्ट्रेशन कार्ड दिया जाएगा, देहदान करने वाले की सारी जानकारी होती है।मृत्यु के बाद परिजनों द्वारा इसकी जानकारी संबंधित मेडिकल कॉलेज को दी जाती है।
पूर्व में भी अनेक समाजजनों द्वारा की जा चुकी है देहदान
पूर्व में भी समाज के वरिष्ठजनों द्वारा देहदान की जा चुकी है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कवि राजमल पवैया ने 26 जनवरी 2011 को एवं उनकी बहू निर्मला पवैया ने तीन जुलाई 2011 को देहदान की थी। इसी प्रकार डॉ. शिखरचंद लहरी ने एक फरवरी 2012, कोमलचंद लहरी 12 मार्च 2013, कमलचंद जैन गुड़ा ने 27 जून 2014 को देहदान की थी।
Published on:
04 Jan 2018 03:35 pm

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