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Body Shaming: मम्मी! मुझे स्कूल नहीं जाना, बच्चे मोटा कहकर चिढ़ाते हैं

कोरोना इफेक्ट: छोटे बच्चे भी body shaming का शिकार, घर पर रहने के कारण कुछ बच्चों में बढ़ा मोटापा, 6 से 12वीं कक्षा तक के बच्चे हो रहे हैं body shaming का शिकार,12 से 18 वर्ष के बीच है इनकी उम्र, इनमें लड़के और लड़कियां दोनों हैं।

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योंगेंद्र सेन@ भोपाल. Corona की लहर तो खत्म हो गई, लेकिन इसके नए-नए दुष्प्रभाव अब सामने आने लगे हैं। दो साल तक स्कूल बंद रहे। इस दौरान लगातार घर में रहने और खेलकूद से दूर रहने के कारण कई बच्चों का वजन बढ़ गया। अब स्कूल पूरी तरह खुल गए हैं। ऐसे में जब ये बच्चे स्कूल पहुंचे तो क्लास और स्कूल के साथियों के बीच body shaming का शिकार हो गए। बढ़े वजन के कारण साथी बच्चे उन्हें मोटा कहकर चिढ़ाने लगे। इनमें से कुछ बच्चों ने तो माता-पिता को स्कूल जाने से ही मना कर दिया। अभिभावकों के लिए भी ये परेशानी बन गई है। ऐसे अभिभावक अपने बच्चों को लेकर डॉक्टर के पास पहुंच रहे हैं। गांधी मेडिकल कॉलेज के मनोचिकित्सा विभाग में ही हर सप्ताह ऐसे दो केस सामने आ रहे हैं।

केस-1 : बेटे ने स्कूल जाने से मना कर दिया
मेरा बेटा शहर के अच्छे स्कूल में क्लास 7 में पढ़ता है। शुरू में तो वह खुशी-खुशी स्कूल जाने लगा। कुछ दिन से अचानक वह स्कूल जाने से मना करने लगा। पता चला कि स्कूल में उसे बच्चे ओवरवेट होने के कारण चिढ़ाते हैं। समझ में नहीं आ रहा था कि उसे कैसे हैंडल करें। अब धीरे-धीरे सुधार हो रहा है।
- पीडि़त के पिता

केस-2 : बेटी स्कूल से आकर रोने लगती
मेरी बेटी 11वीं में पढ़ती है। उसका व्यवहार कुछ दिनों से बदला-बदला सा है। छोटी-छोटी बात पर गुस्सा होने लगी। स्कूल भी जाने से मना कर दिया। बेटी शुरू से पढ़ाई में अच्छी थी। उसने बताया कि बच्चे उसे वजन ज्यादा होने के कारण चिढ़ाते हैं। कई बार स्कूल से आने के बाद रोने लगती थी। तब हमने टीचर से बात की।
-पीडि़ता की मां

दो साल 'कैद' में रहे बच्चे, लिखना-पढ़ना भूल गए
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ये होता है प्रभाव
- बच्चों पर उनके शरीर के कारण टिप्पणी करने, उनका उपहास उड़ाने से उनके व्यवहार में बदलाव देखने को मिलता है।
- वे स्कूल जाने से मना करते हैं। साथियों के साथ खेलना-कूदना भी बंद कर देते हैं।
- स्वभाव चिड़चिड़ा भी होता जाता है। छोटी-छोटी बातों पर अनावश्यक प्रतिक्रिया देने लगते हैं।
- कई बच्चे बार-बार रोने लगते हैं।

अभिभावक और शिक्षक क्या करें
- माता-पिता और शिक्षकों को ऐसे बच्चों में उनका आत्मविश्वास विकसित करना चाहिए।
- सेल्फ लव यानी खुद से प्यार का महत्व समझाना चाहिए।

- सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से जितना संभव हो दूर रखें।
- ऐसे बच्चों का खाने-पीने का रूटीन सेट करें।
- ऐसे क्रियाकलापों में बच्चे को लगाएं जिनसे वजन कम हो, इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा।

ध्यान नहीं देने पर ये खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर माता-पिता बच्चों की इस परेशानी पर ध्यान नहीं देते हैं तो आगे चलकर ऐसे बच्चों में मानसिक विकार पैदा हो सकते हैं। वे डिप्रेशन, पर्सनेलिटी डिस्ऑर्डर के शिकार हो सकते हैं।

40% बच्चों में मोटापा
कोरोना का यह साइड इफेक्ट इतना खतरनाक हो चुका है कि 40% बच्चों में मोटापा घर कर गया है। हर दस में चार बच्चों में मोटापे की समस्या देखी जा रही है। आठ से दस साल के बच्चों का वजन 10 किलो तक बढ़ गया है।

सर्वे में खुलासा: 60 फीसदी बच्चों का वजन बढ़ा
दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में 1309 बच्चों के बीच एक सर्वेक्षण किया गया था। इसमें उन बच्चाें को शामिल किया, जिन्हें कोरोना संकट के कारण घर बैठने के लिए मजबूर होना पड़ा था। इस दौरान चौंकाने वाले तथ्य मिले। सर्वे में पाया कि 60 फीसदी यानी 785 बच्चों का लगभग 10 % वजन बढ़ गया था।

बच्चों का मनोबल बढ़ाएं, उन्हें खुद से प्यार करना सिखाएं
Corona महामारी के कारण बच्चों पर कई तरह का प्रभाव पड़ा है, लेकिन उनमें से कई दुष्परिणाम अब स्कूल खुलने के बाद सामने आ रहे हैं। कुछ बच्चों में body shaming के केस सामने आ रहे हैं। माता-पिता और शिक्षकों को चाहिए के वे ऐसे बच्चों का मनोबल बढ़ाएं। उन्हें खुद से प्यार करने की सीख दें। उनका डाइट चार्ट बनाए, वजन कम करने वाली एक्टिविटी में शामिल करें।
- रुचि सोनी, असी प्रोफेसर, मनोचिकित्सा विभाग, गांधी मेडिकल कॉलेज

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