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वित्त के फेर में अटका गेहूं का बोनस, साल बीता पर वचन अधूरा

- रबी का दूसरा सीजन आ गया, लेकिन बोनस नहीं बंटा

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चावल के शौकीनों की पहली पसंद बना सीएसए का यह खास गेहूं

राजस्थान के लोग हरियाणा से ले सकेंगे राशन का गेहूं,चावल के शौकीनों की पहली पसंद बना सीएसए का यह खास गेहूं

भोपाल। सत्ता में आने के ११ महीने बाद भी कांग्रेस सरकार अपना गेहूं का बोनस देने का वचन पूरा नहीं कर पाई है। वजह ये कि सरकार का यह वचन १४५३ करोड़ के बोझ के कारण वित्त विभाग के फेर में उलझा है। सरकार के पास अभी पैसा नहीं है, जिसके चलते वित्त विभाग ने इस फाइल को रोक रखा है। जबकि, परेशानी ये कि रबी का दूसरा सीजन भी अब शुरू हो चुका है। इस वित्तीय सत्र के बीतने के बाद सरकार को दूसरे रबी सीजन का भी बोनस देना होगा।


कांग्रेस ने सत्ता में आने के पहले गेहूं का समर्थन मूल्य देने का वचन अपने घोषणा-पत्र में रखा था। सत्ता आने के बाद फरवरी में १६० रुपए बोनस भी देने का एेलान किया, लेकिन इस पर फाइलें महज एक टेबल से दूसरी टेबल ही खिसकती रही। वर्तमान में वित्त विभाग के पास कृषि विभाग ने १४५३ करोड़ रुपए का बोनस बांटने का प्रस्ताव भेज रखा है, लेकिन वह अटका हुआ है। वह भी तब, जबकि अभी अनेक जिलों से पूरी डिमांड ही नहीं आ सकी है। इसलिए इस राशि के अलावा भी राशि लगना है। लेकिन, वित्त विभाग के मुताबिक अभी इस राशि को बांटने की स्थिति नहीं है। सरकारी खजाने की खस्ताहालत के कारण फिलहाल बोनस बांटने के लिए वित्त महकमा मंजूरी नहीं दे रहा है।

अभी सूचियां हैं अधूरी-

किसानों को बोनस बांटने को लेकर अभी सरकार की तैयारी भी अधूरी हैं। अधिकतर जिलों के किसानों की सूचियां अभी पूरी नहीं है। उस पर जिलों से डिमांड भी पूरी नहीं आ सकी है। अभी वित्त ने १४५० करोड़ बांटने का प्रस्ताव बनाया है, लेकिन इसमें महज 900 करोड़ रुपए बांटने के लिए सूचियां तैयार है। बाकी सूचिंया तैयार करने में भी काफी समय लगना है।

शिवराज सरकार भी नहीं कर सकी थी ऐलान-

पिछले विधानसभा चुनाव के ठीक पहले तत्कालीन शिवराज सरकार ने भी गेहंू का बोनस देने का एेलान करने का प्रस्ताव तैयार किया था, लेकिन खस्ताहाल होते खजाने के कारण सरकार अंतिम मौके पर इसका एेलान करने से रूक गई थी। तब, अगले वित्तीय सत्र के लिए गेहूं के बोनस का एेलान होना था। लेकिन, पिछले सरकार ने एेसा नहीं किया। जबकि, कांग्रेस ने इसे अपने वचन-पत्र में शामिल रखा था।

केंद्र के इंकार के बाद बदले थे हालात-

दो साल पहले केंद्र सरकार ने गेहंू पर बोनस देने से इंकार कर दिया था। उससे पहले केंद्र सरकार गेहूं के समर्थन मूल्य के लिए अपने हिस्से से राशि देती थी। केंद्र के इंकार के बाद पिछली शिवराज सरकार ने मध्यप्रदेश में बोनस राज्य मद से बांटा था। इस कारण राज्य पर इसका सीधा बोझ पडऩे लगा, जिसके चलते अब सरकार के लिए यह बड़ा आर्थिक बोझ है।

इनका कहना-

किसानों को गेहूं का बोनस दिया जाना है। इसका प्रस्ताव तैयार कर चुके हैं। प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजा गया है, वहां से मंजूरी के बाद ही इस पर अमल किया जाएगा।

- अजीत केसरी, प्रमुख सचिव, कृषि विभाग, मप्र