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अव्यवस्था : भवन अनुज्ञा के लिए नगर निगम में अटक रहे हैं प्रकरण

अनुमति के लिए काट रहे चक्कर, एनओसी पर स्टाफ कमी का असर

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भोपाल। नगर निगम की बिल्डिंग परमीशन शाखा में अधिकारियों की कमी के चलते कामकाज प्रभावित हो रहा है। तमाम कोशिशों के बाद हाल ही में इस शाखा को सात सब इंजीनियर्स दिए गए, लेकिन अभी भी यह संख्या जरूरत से आधी ही है। असिस्टेंट इंजीनियर्स का भी टोटा है। नगर निगम में 19 जोन हैं। इनमें कम से कम आठ असिस्टेंट इंजीनियर्स और 22 सब इंजीनियर्स होने चाहिए। नगर निगम की भवन अनुज्ञा शाखा में अभी तक अर्जुन सिंह मेघवाल, मयंक शर्मा, पीयूष शर्मा व अंजलि शर्मा चार सब इंजीनियर्स थे, लेकिन हाल ही में सात सब इंजीनियर्स और मिल जाने से इनकी संख्या बढ़कर ग्यारह हो गई है।

चार असिस्टेंट इंजीनियर्स में प्रदीप जडिया, लालजी सिंह चौहान, महेश सिरोहिया, ओपी चौरसिया शामिल हैं। एक अन्य असिस्टेंट इंजीनियर मान सिंह सेंगर कॉलोनी सेल में हैं। आधिकारिक तौर पर बताया गया कि बिल्डिंग परमिशन शाखा में असिस्टेंट इंजीनियर्स या भवन अनुज्ञा अधिकारी के आठ और सब इंजीनियर्स के 22 पद स्वीकृत हैं। हाल में सात सब इंजीनियर्स दिए जाने के बाद भी असिस्टेंट इंजीनियर्स व सब इंजीनियर्स की संख्या आधी ही है।

समस्या बढ़ेगी तो फंसेंगे जिम्मेदार

सरकारी आंकड़ों में राजधानी की आबादी 24 लाख है। नगर निगम की भवन अनुज्ञा शाखा के अनुसार राजधानी की सभी 19 जोन में प्रतिवर्ष 1700 से 2000 के मध्य बिल्डिंग परमीशन चाही जाती हैं। भवन अनुज्ञा शाखा को बिल्डिंग परमिशन के साथ लोकसूचना, जनसुनवाई, जन शिकायत, सीएम हेल्पलाइन आदि की शिकायतें निस्तारण करने का काम रहता है। हालांकि, अपे्रल 2016 में 85 प्राइवेट आर्किटेक्ट्स को बिल्डिंग परमीशन के लिए अधिकृत किया गया।

ये प्राइवेट आर्किटेक्ट्स 300 वर्ग मीटर तक की बिल्डिंग परमीशन देने के लिए अधिकृत हैं। शहर में परमिशन देने का अधिकांश काम सीधा प्राइवेट आर्किटेक्ट्स करते हैं। इस शाखा के जिम्मेदार अधिकारी नाम न छापने की शर्त पर बताते हैं कि 4-5 वर्षों में समस्याएं सामने आएंगी। प्राइवेट आर्किटेक्ट को तो फीस लेने से मतलब है, जमीनी समस्याएं आने पर विभागीय अधिकारियों को जवाब देना पड़ता है।

इस तरह होती देरी

भवन अनुज्ञा शाखा के अधिकारिक सूत्रों के अनुसार यदि स्टाफ पूरा हो तो परमीशन और शिकायतों के निस्तारण में आधा ही समय लगे। इस समय एक परमीशन देने में एक महीने का समय लगता है। यदि कोई आपत्ति आ जाए और उस पर प्रॉपर रेस्पॉन्स न मिले तो अधिक समय लग जाता है। स्टाफ पूरा हो तो परमीशन की प्रक्रिया 15 दिनों में ही पूरी की जा सकती है।

भवन अनुज्ञा शाखा को सात सब इंजीनियर्स हाल ही में मिले हैं। प्राइवेट आर्किटेक्ट्स नॉर्मली ठीक काम कर रहे हैं। कुछ मामलों में उनसे जानकारी के अभाव में त्रुटियां हुईं तो कमिश्नर मैडम की अध्यक्षता में हुई बैठक में उन्हें समझा दिया गया। शिकायतें और परमीशन के लंबित मामलों की सूची नहीं है, ये तो आते और निपटाए जाते रहते हैं।
-शुभाशीष बैनर्जी, सिटी प्लानर, नगर निगम

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