एमपी की राजधानी भोपाल में चरस की खुलेआम बिक्री हो रही है। पुराने शहर में इतवारा, शाहजहांनाबाद, गौतम नगर इलाकों में अपने एजेंट के माध्यम से स्कूल-कॉलेज में जाने वाले टीनएजर्स को चरस के अवैध कारोबारियों ने अपना टारगेट कस्टमर बनाया हुआ है। हाल ये है कि व्हाट्स एप कॉल से माल सप्लाई और पेमेंट किया जा रहा है। दो करोड़ की चरस के साथ पकड़ाए तस्करों से पूछताछ में ये खुलासा हुआ है।
एमपी की राजधानी भोपाल में चरस की खुलेआम बिक्री हो रही है। पुराने शहर में इतवारा, शाहजहांनाबाद, गौतम नगर इलाकों में अपने एजेंट के माध्यम से स्कूल-कॉलेज में जाने वाले टीनएजर्स को चरस के अवैध कारोबारियों ने अपना टारगेट कस्टमर बनाया हुआ है। हाल ये है कि व्हाट्स एप कॉल से माल सप्लाई और पेमेंट किया जा रहा है। दो करोड़ की चरस के साथ पकड़ाए तस्करों से पूछताछ में ये खुलासा हुआ है।
नेपाल और बिहार के रास्ते भोपाल चरस लाकर बेचने वाले आरोपियों ने क्राइम ब्रांच की प्रारंभिक पूछताछ में अहम जानकारी दी है। ये आरोपी और इनके एजेंट राजधानी में चरस 'नेपाल की बर्फीÓ के नाम से बेच रहे थे।
डीसीपी श्रुतकीर्ती सोमवंशी ने बताया कि एमपी नगर, चूनाभट्टी, लालघाटी, बैरागढ़, रातीबड़ के होटल एवं बड़े प्राइवेट रिसॉर्ट में आरोपी अपना संभावित ग्राहक तलाश करते थे। नेपाल से आने वाली चरस को नेपाल की बर्फी कोड वर्ड के जरिए युवक-युवतियों के बीच सप्लाई किया जा रहा है।
एडीशनल डीसीपी शैलेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने कबूल किया कि करीब छह माह से वह इसी तरह से चरस की खेप को ट्रेन से लाकर पहुंचा रहे थे। इस गिरोह का सरगना नेपाल का है, क्राइम ब्रांच उसकी तलाश कर रही है। इसके अलावा आरोपियों से नए भोपाल के अन्य ठिकानों के बारे में जानकारी निकाली जा रही है।
नेपाल जाकर होती थी चरस की बुकिंग
भोपाल के आरोपी नेपाल जाकर चरस बुक करते थे और उसके पहुंचाने की जिम्मेदारी चरस तस्कर के सरगना की रहती थी। आरोपी ने इस सौदे के लिए कोडवर्ड बना रखे थे, वह चरस को नेपाली बर्फी के नाम से बात करते थे।
ऑटोचालक बनकर चरस की बिक्री
एक आरोपी मोहम्मद ताहिर ऑटो चलाने की आड़ में चरस की तस्करी कर रहा था। अपने काम में साथ देने के लिए सोहन लाल मेसकर को अपने साथ मिला लिया था, वह आठवीं तक पढ़ा है और मजदूरी करता है। ताहिर ही स्कूल-कॉलेज के बाहर चरस लेने वाले ज्यादातर ग्राहक तलाश करता था।