
Chief Justice says
भोपाल. अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लिए बनाया गया कानून नियमानुसार बना है। हम भी उन्हीं नियमों से बंधे हैं इसलिए उसके बारे में मैं कुछ भी नहीं कह सकता। मप्र मानवाधिकार आयोग के स्थापना दिवस कार्यक्रम में राजधानी आए मप्र हाइकोर्ट के चीफ जस्टिस हेमंत गुप्ता ने यह बात कही। एक प्रश्न के जवाब में उन्होंने बताया कि अभी हाइकोर्ट में लगभग तीन लाख केस पेंडिंग हैं। केस की संख्या अधिक होने के कारणों के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा नए केस तेजी से हाइकोर्ट पहुंच रहे हैं, इस कारण संख्या बढ़ती जा रही है। आपको बता दें कि मप्र मानव अधिकार आयोग के 24 वें स्थापना दिवस पर कार्यक्रम की थीम अन्न का अधिकार- मानव अधिकार रखी गई थी। इस दौरान खाद्य विभाग, महिला बाल विकास विभाग के अधिकारी आदि मौजूद रहे।
कोई भूखा न रहे यह सरकार की ही नहीं हम सबकी जिम्मेदारी
समारोह के मुख्य अतिथि चीफ जस्टिस हेमंत गुप्ता ने कार्यक्रम की थीम के बारे में कहा कि अन्न का अधिकार मानव के जीवन से जुड़ा अधिकार है। अन्न के अभाव में किसी को भी भूखा न रहना पड़े, यह केवल सरकार की ही नहीं, हम सबकी जिम्मेदारी है। अन्न, जल और भूमि की महत्ता के बारे में उन्होंने कहा कि हमने गरीबी नहीं देखी है, इसीलिए इसकी भयावहता से हम वाकिफ नहीं हैं। अन्न पैदा करने के लिए भूमि चाहिए और भूमि तो सीमित है, इसलिए हमें अन्न और जल बचाना सीखना होगा, ताकि यह किसी गरीब और जरूरतमंद के काम आ सके। हमें अन्न पैदा करने वाले और इसकी सुरक्षा करने वाले के श्रम और समर्पण का सम्मान करना चाहिए।
400 में से 300 अनुशंसाओं पर सरकार ने की कार्रवाई
मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस नरेंद्र कुमार जैन ने कहा कि मानव अधिकार आयोग ने मानवाधिकारों की सुरक्षा की दिशा में बेहद कारगर कदम उठाए हैं। अब तक आयोग द्वारा राज्य सरकार को 400 अनुशंसाएं भेजी जा चुकी हैं, जिनमें से 300 अनुशंसाओं पर सरकार ने कार्रवाई भी की है। बीते वित्त वर्ष में आयोग ने 130 अनुशंसाएं राज्य सरकार को भेजी हैं और इस वित्त वर्ष में केवल जून-जुलाई माह में ही आयोग ने राज्य सरकार को 14 अनुशंसाएं भेजी हैं।
Published on:
14 Sept 2018 03:30 am
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