20 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

MP Political Crisis: आरक्षित सीटों को ‘सुरक्षित’ रख पाएगी कांग्रेस?

प्रदेश में 24 सीटों पर उपचुनाव होना है।

2 min read
Google source verification
congress.jpg

भोपाल. 15 साल बाद मध्य प्रदेश में कमल मुरझाया था, 15 महीने बाद कमल की वापसी हो रही है और कमलनाथ चले गए। अब प्रदेश में 24 सीटों पर उपचुनाव होना है। संभवत: मई-जून में उपचुनाव हो सकता है। जानकार बताते हैं कि कांग्रेस के लिए सबसे अधिक परेशान करने वाली बात ये है कि दलित-पिछड़े वर्ग की नाराजगी।

दरअसल, जिन 24 सीटों पर उपचुनाव होना है, उसमें 9 सीटें आरक्षित हैं। इनमें से 8 सीटें अनुसूचित जाति और एक सीट अनुसूचित जनजाति के लिए। बताया जा रहा है कि कमलनाथ सरकार के जाने के पीछे इनकी अहम भूमिका है।

14 जिलों से जीतकर विधानसभा पहुंचे थे 22 विधायक

कांग्रसे से बागी बनकर इस्तीफा देने वाले 22 विधायक 14 जिलों से जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। इनमें से 15 सिंधिया के गढ़ ग्वालियर-चंबल से जीतकर आये थे। इन 22 बागियों में से 15 से अधिक आरक्षित वर्ग से आते हैं । हालांकि सियासत के जानकार भी मानते हैं कि इन सभी का कांग्रेस छोड़न जातिगत अपमान का मामला नहीं है लेकिन जब ये चुनावी मैदान में जाएंगे तो इसे मुद्दा जरूर बनाएंगे। क्योंकि इन्हें भी पता है कि खुद को 'सुरक्षित' करने के लिए इससे बड़ा मुद्दा कुछ हो ही नहीं सकता।


कांग्रेस से इस्तीफा देने वाले बागी

गोविंद सिंह राजपूत, प्रद्युमन सिंह तोमर, इमरती देवी, तुलसी सिलावट, प्रमुराम चौधरी, महेन्द्र सिंह सिसौदिया, हरदीप सिंह डंग, जसपाल सिंह जज्जी, राजवर्धन सिंह, ओपीएस भदौरिया, मुन्ना लाल गोयल, रघुराज सिंह कंसना, कमलेश जाटव, बृजेन्द्र सिंह यादव, सुरेश धाकड़, गिरराज दंडौतिया, संतराम सिरौनिया, रणवीर जाटव, जसवंत जाटव, मनोज चौधरी, बिसाहू लाल सिंह, ऐंदल सिंह कंसना।


कांग्रेस के सामने चुनौती

मध्य प्रदेश की 230 विधानसभा सीटों में से 82 आरक्षित हैं। साल 2013 में भाजपा ने इनमें से 59 सीटें जीती थीं, वहीं 2018 में 34। कांग्रेस 2013 में 19 सीटें लाई थी, जबकि 2018 में 47। ऐसे में ये देखना दिलचस्प होगा कि उपचुनाव में कांग्रेस इन आरक्षित सीटों को सुरक्षित रख पाती है या नहीं।