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पंद्रह महीने में किसी भाजपा नेता पर शिकंजा नहीं कस पाई कांग्रेस सरकार, अब जांचों पर लगेगा ग्रहण

- ई-टेंडर घोटाला, पेंशन घोटाला, पौधारोपण घोटाला, सिंहस्थ घोटाला रह गया महज फाइलों में

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jitendra chourasiya@भोपाल। कांग्रेस सरकार को प्रदेश की सत्ता में पंद्रह महीने का वक्त मिला, लेकिन इस दौरान वह एक भी जांच में किसी भाजपा नेता पर शिकंजा नहीं कस सकी। पंद्रह साल तक कांग्रेस ने भाजपा के घोटालों का शोर तो खूब किया, लेकिन जब 15 महीने का वक्त मिला तो वह सच बाहर लाने में असफल साबित हुई। दस्तावेजों के अभाव में कांग्रेस सरकार महज आरोपों के बाण ही चलाती रही। किसी भी भाजपा नेता पर कांग्रेस सरकार ने कोई कानूनी केस तैयार नहीं किया। अब सरकार बदलने के बाद इन सभी घोटालों की जांच पर ग्रहण लग जाना है। जानिए, किस प्रकरण में क्या उठे कदम और अब क्या होगा आगे...
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सिंहस्थ घोटाला-
2016 के सिंहस्थ घोटाले को लेकर कांग्रेस खूब आक्रामक रही। सत्ता मिली, तो पहले विधानसभा में सिंहस्थ में कोई घोटाला न होने के जवाब को लेकर विवाद छाया। बाद में नगरीय प्रशासन मंत्री जयवद्र्धन सिंह ने ईओडब्ल्यू को केस दे दिया। ईओडब्ल्यू ने कुछ एफआईआर दर्ज की, लेकिन किसी बड़े चेहरे पर कोई शिकंजा नहीं कसा गया। सिंहस्थ के समय पूर्व मंत्री व भाजपा नेता भूपेंद्र सिंह प्रभारी थे, उन पर कांग्रेस आरोप लगाती रही लेकिन कागजों पर कहीं नाम नहीं दर्ज किया गया। अब सिंहस्थ की जांच ठंडे बस्ते में जाने के हालात बन गए हैं।
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ई-टेंडर घोटाला-
ई-टेंडर में जल संसाधन, लोक निर्माण और पीएचई सहित आधा दर्जन विभागों में घोटाला साबित हुआ। इसका केस भी ईओडब्ल्यू को दे दिया गया, लेकिन किसी भी नेता या बड़े चेहरे पर कोई केस नहीं बना। इस केस में अज्ञात मंत्री का नाम दर्ज है, लेकिन कांग्रेस पंद्रह महीने में अज्ञात मंत्री का नाम नहीं खोज पाई। महज पार्टी के स्तर पर कांग्रेस बार-बार पूर्व मंत्री व भाजपा नेता नरोत्तम मिश्रा पर आरोप लगाती रही। उनके पूर्व सहायकों को जरूर केस में नामजद किया गया। अब पूरा मामला वापस ठंडे बस्ते में जाना है।
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नर्मदा किनारे पौधारोपण-
नर्मदान किनारे साढ़े सात करोड़ पौधारोपण को लेकर कांग्रेस पूरे समय शोर करती रही। पूर्व वनमंत्री उमंग सिंगार ने पांच बार इस जांच के लिए पत्र लिखा। बार-बार जांच हुई, लेकिन छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई के अलावा किसी बड़े चेहरे तक यह जांच नहीं पहुच सकी। उस पर अफसरों और वन-मंत्री की खींचतान में अलग जांच उलझी रही। इस मामले में सीएम शिवराज सिंह चौहान पर ही बार-बार कांग्रेस आरोप लगाती रही थी, लेकिन जब उसे मौका मिला तो कोई ठोस कदम नहीं उठे। अब यह मामला ठंडे बस्ते में जाना है।
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संबल बिजली घोटाला-
संबल योजना में बिजली घोटाले पर भी कांग्रेस ने खूब हल्ला मचाया। लाखों अपात्र हितग्राही होने ी बात कही और गलत तरीके से बांटी गई सबसिडी को वापस रिकवर करने का ऐलान किया गया। लेकिन, इसकी कोई जांच ही नहीं बैठाई गई। महज सत्यापन करके अपात्रों के नाम काटे गए। इसमें न कोई जवाबदेही तय की गई और न किसी नेता या अफसर पर केस दर्ज किया गया। पूर्व मंत्री प्रियव्रत सिंह केवल पूर्व सरकार पर आरोप लगाते रहे। अब इस पर कोई जांच नहीं होना है, ैक्योंकि केवल सत्यापन प्रक्रिया ही चल रही है। यह सत्यापन आगे भी चलता रहेगा।
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पेंशन घोटाला-
भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय के समय का बहुचर्चित इंदौर का पेंशन घोटाला भी कांग्रेस सरकार के लिए महज आरोपों का तरकश ही बना रहा। कांग्रेस सरकार ने तरूण भनोत, कमलेश्वर पटेल और महेंद्र सिंह सिसौदिया की तीन मंत्रियों की कमेटी इसकी जांच के लिए बनाई, लेकिन यह कमेटी महज रस्मअदायगी करती रही। पांच बार इस कमेटी ने बैठक बुलाई, लेकिन केवल तीन बैठक की। उस पर भी पूर्व की रिपोर्ट का महज अध्ययन ही करती रही। इस कमेटी ने अपनी ओर से न तो केस ईओडब्ल्यू को जांच के लिए दिया और न अपनी कोई जांच रिपोर्ट पेश की। यहां तक कि पूरी दस्तावेजी प्रक्रिया में कैलाश विजयवर्गीय के नाम तक का जिक्र दस्तावेजों पर नहीं किया गया। अब यह कमेटी और इसकी जांच का अस्तित्व ही सरकार बदलने से खत्म हो जाएगा।
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