
#CornFestChhindwara
भोपाल। मल्टीप्लेक्स में पॉपकॉर्न या ढाबे पर मक्के की रोटी और सरसों के साग का स्वाद तो लगभग सबको पता है लेकिन यह बात बहुत कम लोगों को पता है कि मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा मक्के का उत्पादन छिंदवाड़ा जिले में होता है। यही कारण है कि अब छिन्दवाड़ा को अब कॉर्न सिटी के रूप में पहचाना जाता है। छिंदवाड़ा के मक्के उत्पादक किसानों की मेहनत 'कॉर्न फेस्टिवल-2019' #CornFestChhindwara में दिखाई देगी। छिंदवाड़ा में 15-16 दिसंबर को आयोजित होने वाले कॉर्न फेस्टिवल में किसानों को मक्का प्र-संस्करण से संबंधित नई मशीनों, मक्के से खाद्य सामग्री बनाने वाली मशीनों और मक्का बाजार की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही उन्हें मक्का उत्पादन से जुड़े वैज्ञानिकों से बात करने और सुनने का मौका मिलेगा। शनिवार को इस कॉर्न फेस्टिवल में शामिल होने देश भर के ब्लॉगर्स छिंडवाड़ा पहुंचे।
महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रही न्यूट्री बेकरी यूनिट
छिंदवाड़ा जिले के तामिया विकासखंड में आदिवासी महिलाओं ने न्यूट्री बेकरी की स्थापना कर खुद को आर्थिक रूप से आत्म-निर्भर बनाने में सफलता हासिल की है। न्यूट्री बेकरी यानी पोषक तत्व से भरपूर खाद्य पदार्थ बनाने की बेकरी। इससे जहां एक ओर पोषण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर इससे जुड़ी आदिवासी महिलाएं आर्थिक रूप से आत्म-निर्भर भी बन रही हैं। तामिया में अब चार न्यूट्री बेकरी यूनिट चल रही है। एक-डेढ़ हजार रुपए महीना कमाने वाली महिलाएं अब 4 से 5 हजार रुपए महीना कमा रही हैं। मक्के का बना टोस्ट और बिस्किट इस क्षेत्र में काफी लोकप्रिय है, स्थानीय बाजार में महिलाएं अपने उत्पादों की मार्केटिंग खुद करती हैं।
कई संस्थाओं ने भी दिखाई न्यूट्री बेकरी में दिलचस्पी
न्यूट्री बेकरी की सफलता को देखकर कई सरकारी विभागों और स्वयंसेवी संस्थाओं ने इसमें दिलचस्पी जाहिर की है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, महिला-बाल विकास विभाग की तेजस्विनी, वन विभाग और चाय इंडिया (मध्यप्रदेश चेप्टर) ने न्यूट्री बेकरी की स्थापना में मदद के लिए संपर्क किया। तेजस्विनी ने मंडला जिले में दो बेकरी स्थापित कर ली है और दो की तैयारी चल रही है।
कम पानी, कम लागत में भी अच्छी होती है मक्के की फसल
विशेषज्ञों के मुताबिक मक्के का उपयोग चार तरह से होता है। इसका पशु आहार विशेषकर पोल्ट्री फीड बनता है। कॉर्न फ्लेक्स जैसी लोकप्रिय खाद्य सामग्री बनती है। कॉर्न फ्लेक्स अब सुबह के नाश्ते में शामिल हो गया है। अन्न के रूप में भी इसका सेवन किया जाता है और औद्योगिक उपयोग होता है। विशेषज्ञों के मुताबिक कम पानी और कम लागत में मक्के की फसल अ'छी हो जाती है। साथ ही यह जलवायु परिवर्तन के खतरों को सह लेती है। मक्का पोषक तत्वों से भरपूर होता है, इसमें 71 प्रतिशत स्टार्च, 9 से 10 प्रतिशत प्रोटीन, 4 से 45 प्रतिशत फैट, 9 से 10 प्रतिशत फाइबर, 2 से 3 प्रतिशत शुगर और 1.4 प्रतिशत मिनरल होता है।
प्रदेश में 46 लाख मीट्रिक टन होता है मक्का उत्पादन
अब मक्का एक व्यावसायिक फसल बन चुका है। पोषक तत्वों से भरपूर मक्का व्यंजन और इससे बनी खाद्य सामग्री का उद्योग लगाने की भरपूर संभावनाएं भी बढ़ी हैं। जानकारी के मुताबिक प्रदेश में मक्का उत्पादन 46 लाख मीट्रिक टन पहुंच गया है। अकेले छिंदवाड़ा जिले में मक्का का उत्पादन 6 लाख 23 हजार मीट्रिक टन से बढ़कर 12 लाख मीट्रिक टन हो गया है। मक्का का क्षेत्रफल 1 लाख 24 हजार हेक्टेयर से बढ़कर 2 लाख 95 हजार हेक्टेयर बढ़ गया है।
Published on:
14 Dec 2019 07:42 pm
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