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अब AI आपको बता देगा, शरीर में है कौन सी बीमारी…? जानें कैसे

Artificial Intelligence: यह विभिन्न अंगों पर बीमारियों के प्रभाव का सिमुलेशन कर डॉक्टरों को शुरुआती और निवारक (प्रिवेंटिव) जांच में सहायता करेगा....
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भोपाल

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Astha Awasthi

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Updated: 19 Jan 2026, 1:22 PM IST

Artificial Intelligence

Artificial Intelligence प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source- AI freepik)

Artificial Intelligence: अब एआइ संचालित मानव शरीर प्रतिकृति (ह्यूमन बॉडी रेप्लिका) इंसान के शरीर की बीमारियों का पता लगाएगा। यह प्रतिकृति वास्तविक इंसान जैसी दिखती है जो सांस ले सकती है और आंखें झपका सकती है। बुनियादी मानवीय क्रियाएं करने के साथ ही यह मानव शरीर में रोगों के पैटर्न की पहचान करने में सहायक है। यह विभिन्न अंगों पर बीमारियों के प्रभाव का सिमुलेशन कर डॉक्टरों को शुरुआती और निवारक (प्रिवेंटिव) जांच में सहायता करेगा।

भोपाल में लगी थी प्रदर्शनी

भोपाल में आयोजित मप्र क्षेत्रीय एआइ इम्पैक्ट कॉन्फ्रेंस 2026 में इस ह्यूमन बॉडी रेप्लिका को प्रदर्शित किया था। इसे आइआइटी इंदौर ने एम्स भोपाल, एम्स दिल्ली और एम्स रायपुर की मदद से तैयार किया है।
तीनों एम्स ने क्लीनिकल वेलिडेशन और अन्य तकनीकी उत्पादों के विकास में सहायता की है। आइआइटी इंदौर के दृष्टि सीपीएस के वैभव जैन ने बताया कि स्वास्थ्य क्षेत्र में हम मानव शरीर का एक डिजिटल ट्विन तैयार कर रहे हैं। इसका लक्ष्य बीमारियों का निवारक निदान प्रदान करना है।

ऐसे करता है काम

इसे मानव शरीर के डिजिटल ट्विन मॉडल के रूप में डिजाइन किया है। इसमें एआइ मॉडल है और विभिन्न मानवीय मापदंडों (पैरामीटर्स) पर प्रशिक्षित किया है, जो किसी न किसी बीमारी की ओर संकेत करते हैं। जब ये मापदंड तय सीमा (थ्रेशहोल्ड) तक पहुंचते हैं, तो विभिन्न तकनीकों की मदद से बीमारी का निदान किया जाता है।

बनेगा AI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) को शासन, स्वास्थ्य और कृषि जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में प्रभावी ढंग से लागू करने की दिशा में मध्यप्रदेश को बड़ी सौगात मिलने जा रही है। केंद्र सरकार द्वारा देशभर में प्रस्तावित 58 एआइ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (AI Centers of Excellence) में से दो सेंटर मप्र में स्थापित होंगे।

प्रत्येक सेंटर करीब 10 हजार वर्ग फीट क्षेत्र में विकसित होगा, जहां शासकीय कार्यों में एआइ के नवाचार और समाधान विकसित किए जाएंगे। साथ ही चैट-जीपीटी (ChatGPT) जैसा स्वदेशी एआइ प्लेटफॉर्म भी तैयार किया गया है, जिसे फरवरी में नेशनल एआइ समिट से पहले लॉन्च किया जाएगा।