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देश का सोलर विलेज और प्रदेश की पहली नवग्रह वाटिका होने के बाद भी विकास की दौड़ में पिछड़ा घोड़ाडोंगरी

घोड़ाडोंगरी ब्लॉक में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव आज भी कई सुदूर गांवों में देखा जा सकता है।

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पुल का निर्माण अधूरा होने से नदी से आना जाना करते हैं ग्रामीण

Due to the incomplete construction of the bridge, the villagers go to and from the river

बैतूल/घोड़ाडोंगरी। सतपुड़ा की वादियों में बसा बैतूल जिले का आदिवासी बाहुल्य घोड़ाडोंगरी ब्लॉक कहने को तो क्षेत्रफल के हिसाब से सबसे बड़ा ब्लॉक हैं। यहां की कुल आबादी तीन लाख से ऊपर हैं। देश का पहला सोलर विलेज कहा जाने वाला बाचा गांव भी इसी ब्लॉक में आता है और प्रदेश की पहली नवग्रह वाटिका भी कान्हावाड़ी गांव में बनी है, लेकिन इन तमाम उपलब्धियोंं के बाद भी विकास की दौड़ में यह ब्लॉक आज भी काफी पीछे है। शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव आज भी कई सुदूर गांवों में देखा जा सकता है। इस ब्लॉक की सीमा नर्मदापुरम संभाग से भी लगी हुई है। घोड़ाडोंगरी ब्लॉक के अंतर्गत कुल 173 गांव आते हैं, लेकिन इनमें से अधिकांश गांवों में विकास आज तक नहीं हो सका है।

सीएम राइज स्कूल में अंग्रेजी की जगह हिंदी मीडियम
घोड़ाडोंगरी ब्लॉक में इस शैक्षणिक सत्र से कन्या हायर सेकंडरी स्कूल में सीएम राइज स्कूल की शुरूआत की गई हंै, लेकिन अंग्रेजी की जगह हिंदी माध्यम से ही स्कूल संचालित किया जा रहा हैं। इसमें भी शिक्षकों और स्टाफ के सभी पद अभी तक नहीं भरे जा सके हैं। ब्लॉक में सरकारी स्कूलों की हालत भी खस्ताहाल हैं। स्कूलों में शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं।उच्च शिक्षा की बात करें तो कॉलेज खोला गया हैं लेकिन प्रभारी प्राचार्य के भरोसे ही संचालित हो रहा हैं। उच्च शिक्षा के लिए छात्र बैतूल मुख्यालय या जिले के बाहर जाते हैं। इधर स्वास्थ्य सुविधाओं का हाल भी बेहाल है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों की कमी सालों से बनी हुई है। स्पोर्टिंग स्टॉफ भी नहीं है। इलाज के लिए मरीजों को जिला अस्पताल रैफर कर दिया जाता है।

पानी की टंकी बनी ना पुल का निर्माण हुआ
घोड़ाडोंगरी ब्लॉक में पेयजल को लेकर भी गर्मी के दिनों में संकट की स्थिति रहती है। ग्राम पांडरा में पिछले पांच साल में भी टंकी का निर्माण नहीं हो सका हैं जबकि 90 प्रतिशत राशि खर्च हो चुकी हैं। आज भी टंकी अधूरी पड़ी है। हंैडपंप के भरोसे लोगों को पीने के पानी पर निर्भर होना पड़ता हैं। वहीं सिवनपाट- डुलारा मार्ग पर तवा नदी में पुल का निर्माण पांच साल में भी पूरा नहीं हो सका है। सालों से पुल का निर्माण अधूरा पड़ा है। बारिश से गांवों का संपर्क टूट जाता है। आवागमन के लिए ग्रामीणों को पुल के नीचे से होकर जाना पड़ता है। इसी प्रकार भोगई खापा मार्ग पर भी पुल का निर्माण अधूरा पड़ा हुआ है। पूल के अभाव में बारिश के दौरान नदी पार करते वक्त कई लोग अपनी जान भी गंवा चुके हैं। बावजूद इसके आज तक पुल का निर्माण नहंीं हो सका है।

कृषि के क्षेत्र में भी उन्नति नहीं
घोड़ाडोंगरी ब्लॉक में अधिकांश लोग कृषि पर निर्भर हैं। कृषि के माध्यम से ही लोगों की आजीविक चलती हैं। सालों से लोग परंपरागत खेती करते आ रहे हैं। कहने को तो यहां कृषि विभाग हैं लेकिन कृषि अधिकारियों के अनुभव का लाभ किसानों को नहीं मिल पाता है। कृषि विभाग में महज 6 लोगों का स्टॉफ भर हैं। इनमें भी दो कर्मचारी जल्द सेवानिवृत्त होने वाले हैं। ऐसे में कृषि संबंधी तकनीकी जानकारी देने के लिए कोई नहीं हैं। घोड़ाड़ोंगरी में बिजली का संकट बरकरार हैं। शहर में रोजाना तीन से चार घंटे बिजली का असमय कटौती की जाती हैं। खेतों में सिंचाई के लिए भी किसानों को पर्याप्त बिजली नहंीं मिल पाती है।