भोपाल/ब्यावरा। शिक्षा के क्षेत्र में आधुनिकता ने भले ही पांव पसार लिए हो, लेकिन निजी स्कूलों में अभी भी गुरुकुल से ज्यादा सख्त रवैया अपनाया जाता है। यह सख्ती कई बार ज्यादा ही हो जाती है। 11 वर्षीय छठी क्लास की छात्रा से होमवर्क नहीं करने के कारण 170 उठक-बैठक लगाने का मामला सामने आया है। उठक-बैठक लगाने के बाद जब छात्रा घर पहुंची तो उससे चलने की भी नहीं बन रही थी। घर पर अचानक वह गश खाकर गिरी तो परिजन उसे निजी नर्सिंग होम लेकर पहुंचे।
जानकारी के अनुसार ऋषिका पिता संतोष सौंधिया (11) निवासी नापानेरा सिलपटी के आर्य इंटरनेशन अकेडमी में पढ़ती है। उसे स्कूल की शिक्षिका ने एक दिन पहले कुछ होमवर्क दिया। अगले दिन जब वह स्कूल पहुंची तो होमवर्क पूरा नहीं होने की दशा में शिक्षिका ने उसे डेढ़ सौ से अधिक (करीब 170) उठक-बैठक लगाने की सजा दी। ऋषिका ने बताया मुझे मेम ने मुझे 170 उठक-बैठक लगाने को कहा। सजा पूरी होने के बाद छात्रा ठीक से चल भी नहीं पा रही थी। नापानेरा में रहने वाली छात्रा जब घर पहुंची तो गश खाकर गिर गई, परिजन उसे अस्पताल में लेकर पहुंचे, जहां उसका उपचार किया जा रहा है।
पंजाबी नर्सिंग होम प्रबंधन के अनुसार बच्ची के पांव में दर्द था, इसलिए भर्ती करवाया गया था। जैसे ही मीडिया तक बात पहुंची, स्कूल प्रबंधन परिजनों को कन्वेंस करने लगा। स्कूल वालों ने बार-बार ऋषिका के पिता और चाचा को फोन कर माफी मांगी और खबर रुकवाने को कहा। हालांकि गांव के सीधे-सादे लोग भले ही शिकायत करने से डर रहे हों, लेकिन अक्सर ऐसे मामले सामने आते हैं, अब देखना यह है कि इस मामले में प्रशासन ही स्वत: ही संज्ञान लेकर क्या कार्रवाई करता है?
सिलपटी रोड पर बने आर्य पब्लिक इंटरेशन का यदि मामला है तो हम दिखवाते हैं। हम बच्ची से मिलेंगे, स्कूल प्रबंधन से लिखित जवाब मांगा जाएगा। साथ ही नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
ओपी नामदेव, बीआरसी, ब्यावरा
मामला शनिवार का है, बच्ची स्कूल भी आई। सोमवार को हो सकता है उसे बुखार आया हो? ये मामले ठीक नहीं आप कोऑपरेट करिए, मुद्दा मत बनाइए? अब बच्चा घर जाकर बीमार हो जाए तो उसमें स्कूल प्रबंधन क्या करे?
अनिल भट्ट, प्रबंधक, आर्य इंटरनेशन स्कूल, सुठालिया रोड