
विदिशा। शहर में धनतेरस पर कुबेर( lord kuber) की पूजा के प्रमाण ईसा पूर्व दूसरी शताब्दी की कुबेर प्रतिमा के रूप में मौजूद हैं। यहां मप्र की सबसे प्राचीन बड़ी कुबेर प्रतिमा जो ईसा पूर्व दूसरी शताब्दी मतलब 2300 साल पुरानी है, मौजूद है। इसके अलावा यहां कुबेर महाराज की सातवीं की प्रतिमा भी मौजूद है। धनपति कुबेर को दस दिग्पालों में भी शामिल माना जाता है।
अथर्ववेद में कुबेर( blessings of lord kuber) को यक्षराज और रामायण में इन्हें ब्रह्मा का मानस पुत्र बताया गया है। इन्हें देवताओं के खजाने का रक्षक देव यानी देवताओं का खजांची भी माना गया है। बेतवा किनारे सदियों पहले वैभवशाली बैसनगर था। यहीं मौजूद ईसा पूर्व दूसरी शताब्दी की विशाल कुबेर प्रतिमा कालांतर में बैस नदी में जा समाई। अनजाने में वर्षों तक नदी में उल्टी पड़ी इस चट्टाननुमा प्रतिमा पर लोग नहाते और कपड़े धोते रहे। जब मिट्टी का कटाव बढ़ा और पानी कम हुआ तो इस चट्टान की पहचान कुबेर प्रतिमा के रूप में हुई। इसे जिला संग्रहालय लाया गया।
करीब 12 फीट की यह प्रतिमा ईसा पूर्व की संस्कृति, रहन-सहन और मूर्तिकला की भी परिचायक है। बेहद सादगीपूर्ण प्रतिमा में कुबेर के सिर पर पगड़ी, कंधे पर उत्तरीय वस्त्र, गले में भारी कंठा और कानों में कुण्डल हैं। कुबेर एक हाथ में धन की थैली लिए हूए हैं। जिला संग्रहालय में ही बड़ोह से प्राप्त 7-8 वीं शताब्दी की कुबेर महाराज की प्रतिमा मौजूद है।
ऐसे प्रसन्न होते हैं कुबेर( get blessings of lord kuber):
कुबेर का निवास वट-वृक्ष कहा गया है। `वाराह-पुराण´ के अनुसार कुबेर की पूजा कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा के दिन की जाती है। वर्त्तमान में दीपावली पर धनतेरस को इनकी पूजा की जाती है। मान्यता है कि कुबेर को प्रसन्न करने के लिए महा-मृत्युंजय मन्त्र का दस हजार जप आवश्यक है।
कुबेर मन्त्र -विनियोग - ॐ अस्य मन्त्रस्य विश्रवा ऋषि:, वृहती छन्द:, कुबेर: देवता, सर्वेष्ट-सिद्धये जपे विनियोग:।ऋष्यादि-न्यास - विश्रवा-ऋषये नम: शिरसि, वृहती-छन्दसे नम: मुखे, कुबेर-देवतायै नम: हृदि। सर्वेष्ट-सिद्धये जपे विनियोगाय नम: सर्वांगे।
षडग्-न्यास
कर-न्यास
अग्-न्यास
ॐ यक्षाय
अंगुष्ठाभ्यां नम:
हृदयाय नम:
ॐ कुबेराय
तर्जनीभ्यां स्वाहा
शिरसे स्वाहा
ॐ वैश्रवणाय
मध्यमाभ्यां वषट्
शिखायै वषट्
ॐ धन-धान्यधिपतये
अनामिकाभ्यां हुं
कवचाय हुं
ॐ धन-धान्य-समृद्धिं मे
कनिष्ठिकाभ्यां वौषट्
नेत्र-त्रयाय वौषट्
ॐ देही दापय स्वाहा
करतल करपृष्ठाभ्यां फट्
अस्त्राय फट्
ध्यान :
मनुज बाह्य विमान स्थितम्, गरूड़ रत्न निभं निधि नायकम्।
शिव सखं मुकुटादि विभूषितम्, वर गदे दधतं भजे तुन्दिलम्।।
मंत्र ( get blessings of lord kuber) :
``ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धन-धान्याधिपतये धन-धान्य-समृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा।´´
मान्यता है कि इस मंत्र का एक लाख जप करने पर सिद्धि होती है।
वहीं विदिशा में सिंहासन पर बैठी यह कुबेर प्रतिमा ईसा पूर्व के कुबेर( blessings of kuber) से बिल्कुल अलहदा है। इसमें कुबेर महाराज पूरी राजसी ठसक के साथ हैं। पुरातत्वविद डॉ. नारायण व्यास के मुताबिक विदिशा में मौजूद कुबेर की प्रतिमा ईसा पूर्व दूसरी शताब्दी की और शुंगकाल की है। यह मप्र की सबसे प्राचीन और सबसे बड़ी कुबेर प्रतिमा है।
यहां भी हैं प्रतिमा:
इसके अलावा मंदसौर शहर से सटे खिलचीपुरा स्थित 1200 वर्ष पुराने धौलागढ़ महादेव मंदिर मेें 7वीं शताब्दी की भगवान कुबेर की प्राचीन मूर्ति स्थापित है।
पुरातत्व विभाग के अधीन मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए शासन ने संरक्षण अधिसूचना में शामिल कर लिया है। अब पुरातत्व विभाग जीर्णोद्धार के लिए जल्द प्रस्ताव तैयार करेगा। मंदिर में धन तेरस पर 17 अक्टूबर को दिनभर धार्मिक अनुष्ठान होंगे।
विश्व प्रसिद्ध अष्टमुखी महादेव पशुपतिनाथ मंदिर से कुछ ही दूरी पर स्थित है खिलचीपुरा में श्री धौलागढ़ महादेव मंदिर। यहां मंदिर में भगवान गणेश व माता पार्वती की मूर्ति भी है। 1978 में इस मूर्ति की पहचान हुई। प्रतिमा में कुबेर बड़े पेट वाले, चतुर्भुजाधारी सीधे हाथ में धन की थैली और तो दूसरे में प्याला धारण किए हुए है। नर वाहन पर सवार इस मूर्ति की ऊंचाई लगभग तीन फीट है।
Published on:
17 Oct 2017 11:11 am

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