
बच्चों को भी हो रही है डायबिटीज, ये लक्षण नजर आए तो तुरंत हो जाएं अलर्ट, जानिये क्या है कारण
आजकल बच्चे पौष्टिक नाश्ता और भोजन करने की अपेक्षा फास्ट फूड, मीठा और चिप्स वेफर्स जैसी चीजें खाकर अपना पेट भरते हैं, इनसे बच्चों को प्रोटीन, विटामिन भी नहीं मिलता है ऊपर से कई बीमारियां उन्हें घेरने लगती है, बच्चे चिढ़चिढ़े होने लगते हैं उन्हें थोड़ा भी चलने फिरने में थकान महसूस होने लगती है, उनका पढऩे में दिल नहीं लगता है, अगर ऐसा है तो आप भी कुछ सावधानियां बरतें, ताकि आपका बच्चा भी हेल्दी रहे।
ये हैं डायबिटीज के लक्षण
-बच्चों को बार-बार पेशाब आना।
-प्यास अधिक लगना और पानी को जल्दी-जल्दी पीना।
-बार-बार पेशाब के कारण बिस्तर गीला करना।
-कमजोरी और थकान महसूस होना।
-थोड़ा भी चलने फिरने में थक जाना।
-आंखों की रोशनी कम होना।
-पढऩे में मन नहीं लगना।
-बच्चों में टेंशन, गुस्सा या चिढ़चिढ़ा होना।
-बच्चों के गर्दन और बगल में गहरे धब्बे होना रंजकता नजर आना।
-बच्चों का वजन कम होना।
अगर आपको इस प्रकार के लक्षण बच्चों में नजर आए तो एक बार अच्छे डॉक्टर को दिखाएं, इसी के साथ बच्चे के खानपान में भी बदलाव कर दें, ताकि बच्चे के शुगर लेवल को कम किया जा सके और बच्चे की सेहत में भी सुधार आएं।
ये करें उपाय
-साबुत अनाज से बच्चों को व्यंजन बनाकर खिलाएं।
-मीठा खाने की इच्छा होने पर बच्चों को ग्लूटिन फ्री मफिन, डार्क चॉकलेट दें।
-घर पर चीज, दही, फलों से कई प्रकार के व्यंजन बनाए जा सकते हैं।
-बच्चों को फास्ट फूड या मिठी चीजें अधिक नहीं खाने दें।
-घर में बना नाश्ता या भोजन दें, जो पौष्टिक हो।
-बच्चों को भरपूर डाइट दें, जिसमें रोटी, सब्जी, चावल, दाल के साथ थोड़ा सलाद खाने की आदत भी डालें।
-दिनभर मोबाइल या टीवी देखने से रोकें और फिजिकल एक्टिविटी बढ़ाएं।
-ऐसे खेलकूद कराएं जिससे शारीरिक एक्सरसाइज हो, जैसे फुटबाल, बॉस्केटबॉल, टेबल टेनिस, बेडमिंटन आदि।
-अगर इस प्रकार के कोई खेल नहीं खेल रहा है तो कम से कम कुछ देर रोज टहलने भेजें।
-इसी के साथ डॉक्टर की सलाह भी लें। ताकि आपके बच्चे की सेहत में किसी प्रकार का विपरित असर नहीं पड़े।
बदलते खान-पान, जीवनशैली और फैमिली हिस्ट्री के कारण कम उम्र के बच्चों और किशोरों में डायबिटीज के मामले लगातार बढ़ रहे है। एनसीबीआई (नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इनफार्मेशन की एक स्टडी के अनुसार 14.7 प्रतिशत बच्चों में डायबिटीज है। स्टडी में 1 से 18 साल के बच्चों को लिया गया, जिसमें सबसे ज्यादा बच्चों में टाइप 1 डायबिटीज पायी गई। उधर, अकेले जयपुर के जेके लोन अस्पताल में बच्चों में डायबिटीज के रोजाना 2 से 3 मामले सामने आ रहे हैं। अन्य अस्पतालों के आंकड़े लें तो यह संख्या काफी बड़ी है। बच्चों का बढ़ाएं प्रोत्साहन: यदि बच्चों को कम उम्र में डायबिटीज हो जाए तो उनका आत्मविश्वास कम न होने दें ,उन्हें उन सफल व्यक्तियों का उदाहरण दें, जिन्होंने डायबिटीज होते हुए भी अपने क्षेत्रों में कामयाबी हासिल की है।
बदलाव का कर रहे सामनाडायबिटीज होने पर बच्चों के जीवन में कई प्रकार के बदलाव होते हैं। बच्चों पर कई प्रकार की रोक लगाई जाती है, जिससे उनके मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। छोटी उम्र में वे चिड़चिड़े होने लग जाते हैं, दूसरे बच्चों की तुलना में उन्हें जल्दी गुस्सा आ जाता है। तनाव, डिप्रेशन भी इन बच्चों में बढ़ रहा है। स्कूल में उन्हें इंसुलिन इंजेक्शन, दवाओं का परीक्षण करने के लिए स्कूल के शिक्षकों, कर्मचारियों के पास जाना पड़ सकता है, जिससे वे असामान्य महसूस करते हैं।
Published on:
16 Aug 2023 09:48 am
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