
भोपाल. राजधानी में कुत्ते बड़ी समस्या बन गए हैं। सरकारी अस्पतालों में रोजाना 60 से अधिक मामले कुत्तों के काटने के पहुंच रहे हैं। शनिवार को ही दो मासूम डॉग बाइट के शिकार हो गए। गली-मोहल्लों में आवारा कुत्तों की भरमार है। नगर निगम इनकी आबादी पर नियंत्रण करने में नाकाम है। उधर, सरकारी अस्पतालों में न तो संतोषजनक इलाज की व्यवस्था है न ही पर्याप्त वैक्सीन उपलब्ध है। चिकित्सकों के अनुसार गर्दन, चेहरे या मुंह के करीब कुत्ता काटता है तो रैबीज के इंजेक्शन की सभी चार डोज लेने चाहिए।
लोगों में बढ़ रहा साइनोफोबिया
11 करोड़ रुपए कुत्तों की नसबंदी पर अब तक खर्च हो चुके हैं। लेकिन आबादी घटने के बजाय डेढ़ लाख तक पहुंच गई है। ऐसे में डॉग बाइट के मामले बढ़े हैं। कुत्तों के काटने से रोजाना दर्जन भर मरीज मनोवैज्ञानिकों के पास पहुंच रहे हैं। इनमें साइनोफोबिया के लक्षण देखे जा रहे हैं। साइनोफोबिया की शुरुआत कुत्ते के साथ नकारात्मक अनुभव के कारण होती है। ऐसे में कई लोगों ऐसे भी हैं जिन्हें किसी कुत्ते ने काटा नहीं है। लेकिन, उउनके अंदर अजीब सा डर है।
हमीदिया में इम्यूनोग्लोबुलीन इंजेक्शन की कमी
हमीदिया प्रबंधन का दावा है कि यहां एंटी रैबीज पर्याप्त मात्रा में हैं। कुत्ते के काटने पर रैबीज और टिटनेस का इंजेक्शन लगता है। जबकि काटने से दांत शरीर के अंदर गड़ जाए तो एंटी रैबीज वैक्सीन के साथ इम्यूनोग्लोबुलीन इंजेक्शन लगता है। लेकिन यह इंजेक्शन अमूमन नहीं मिलता।
हर साल बढ़ रहा कुत्तों का आतंक
हमीदिया अस्पताल में 2021 में 5,104 मामले डॉग बाइट के आए। 2022 में यह आंकड़ा 6 हजार पहुंच गया। इस साल अब तक ५००० मामले आ चुके हैं।
दो अधिकारियों के जिम्मे पूरा शहर
फिलहाल, नगर निगम ने आवारा कुत्तों को पकडऩे के लिए क्षेत्रवार दो अधिकारी तय किए हैं। कुत्तों को पकडऩे के लिए पूरे शहर में दो से तीन गाडिय़ां हैं।
सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत
नगर निगम के कंट्रोल रूम पर या सीएम हेल्पलाइन पर कुत्तों की धरपकड़ को लेकर शिकायत की जा सकती है। हालांकि शिकायत के 2 से 3 दिन बाद तक कोई कार्रवाई न होने की शिकायत है।
कुत्तों के आक्रामक होने की वजह
नसबंदी के लिए एक स्थान से पकड़ कर ले जाने के बाद दूसरे स्थान पर छोडऩे पर कुत्ते स्ट्रेस में होते हैं। ऐसे में वे ज्यादा आक्रामक हो जाते हंै।
डर व अन्य कारण से कुत्तों पर पत्थरबाजी करने वे आक्रामक हो जाते हैं।
आघात या किसी अन्य प्रकार का डर मनुष्यों पर हमला करने को मजबूर करता है।
सुबह-शाम को कुत्ते जब भूखे होते हैं, तब वे कई बार हमलावर हो जाते हैं।
जून से अगस्त के बीच कुत्तों के प्रजनन का भी समय होता है। ऐसे में उनमें हार्मोनल बदलाव होते हैं। इससे वे आक्रामक हो जाते हैं।
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ऊपरी हिस्से में काटना गंभीर
किसी व्यक्ति के ऊपरी हिस्से जैसे गर्दन, चेहरे या मुंह के करीब कुत्ता काटता है तो रैबीज का खतरा अधिक होता है। ऐसे में रैबीज के इंजेक्शन की सभी चार डोज लेनी चाहिए, नहीं तो रैबीज के कीटाणु मस्तिष्क में पहुंचकर जा ले सकते हैं।
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रैबीज, टिटनेस और इम्यूनोग्लोबुलीन का इंजेक्शन अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। यदि इलाज में किसी को परेशान हुई है तो जांच होगी। जिम्मेदार पर कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. आशीष गोहिया, अधीक्षक, हमीदिया अस्पताल
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हमीदिया में कब कितने मामले आए
माह - डॉग बाइट
अप्रेल - 513
मई - 515
जून - 477
जुलाई - 483
अगस्त - 512
Published on:
26 Sept 2023 01:27 am
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