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अंग्रेजों ने की थी ‘सांची स्‍तूप की खोज, साथ ले जाना चाहते थे अस्थि

सांची स्तूप से जुड़ी हैं दर्जनों कहानियां, आध्यात्म के साथ कला के प्रतीककभी अंग्रेजों ने की थी यहां की खोज, ले जाना चाहते थे यहां से मिले अस्थि कलश

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Sanchi Stupa

भोपाल। शहर के आसपास कई धरोहरें हैं। इन धरोहरों में सांची के स्तूप एक हैं। इनकी जुड़ी हुई कई कहानियां तो आम हैं लेकिन कुछ ऐसे किस्से भी हैं जो काफी रोचक हैं। अंग्रेजों के शासन काल के दौरान इसकी खोज हुई थी। यहां कुछ अस्थिकलश मिले थे जिन्हें लंदन भेजने की योजना तो बनी लेकिन जहाज बीच सम्रुद में डूब गया।

बताया जाता है कि ब्रिटिश अधिकारी जनरल टेलर ने 1818 में सांची स्तूप की खोज की। उसके बाद कई ब्रिटिश अधिकारी यहां उत्खनन करते रहे। ऐसा कहा जाता है कि यहां एक कलश मिला था। इतिहासकार और पुरातत्वविदों के मुताबिक करीब 2300 साल पहले इसके पास एक नगर बसा था। उसी दौरान ये स्तूप बने थे। यह नगर बेतवा और बेस नदी के किनारे पर है जिस कारण हर साल यहां बाढ़ से लोग बेघर हो जाते थे। इसके प्रमाण के तौर पर मिट्टी के कई बड़े ढेर देखने को मिलते हैं जो बाढ़ के कारण बनते हैं।

कभी यह पूरा शहर था

पुरातत्वविद् डॉ. नारायण व्यास के मुताबिक यह कभी एक शहर था। काफी कारीगर यहां पर थे। काफी समृद्ध था लेकिन किसी कारण से यह मिट गया। इसके मिटने के पीछे भी कई कारण बताए हैं। पुरातत्वविदों के मुताबिक इस जगह तीसरी से लेकर ग्यारवहीं सदी तक बसाहट के प्रमाण मिले हैं।

कई और रहस्य छिपे हैं यहां

सांची के स्तूप विश्वविख्यात हैं। डॉ. व्यास के मुताबिक ये स्तूप उसी दौरान बनाए गए थे। विदिशा का हिस्सा सम्राट अशोक के क्षेत्र में आता था। उनकी पत्नी ने बौद्ध धर्म स्वीकार किया था। उन्हीं के कहने पर यहां पर स्तूप बनवाए गए थे। यहां नगर बाढ़ के कारण मिटता रहा लेकिन स्तूप पहाड़ी पर होने से बचे रहे।

जानिए क्या है सांची के स्तूप का इतिहास

- सांची का प्रमुख बौद्ध स्तूप 42 फुट ऊंचा है।
-यहां बुद्ध की शिक्षाओं से जुड़ी ऐतिहासिक सामग्री है।
-जिसे बौद्ध धर्म में बड़े आदर के साथ पढ़ा जाता है।
-सांची अशोक के पुत्र महेन्द्र का ननिहाल था।
-यहां के अधिकतर मठ और स्तूप अशोक की धर्मपत्नी देवी ने बनवाए थे।
-बौद्ध धर्म को ऊंचाईयों पर पहुंचाने के लिए सम्राट अशोक का विशेष योगदान माना जाता है।
-अशोक ने कई स्तूपों और स्मारकों का निर्माण करवाया।
-जिनसे बौद्ध धर्म की शिक्षाओं और नीतियों का प्रचार-प्रसार होता है।
-श्रीलंका जाने से पहले महेन्द्र एक महीने तक यहीं रहे थे।
-इसका निर्माण सम्राट अशोक ने कराया था।
-विश्व प्रसिद्ध सांची स्तूप के बारे में माना जाता है कि इस जगह का चुनाव सम्राट अशोक ने किया था।
-बौद्ध धर्म में ध्यान का बड़ा महत्व है।
-1989 में यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में शामिल किया गया।
-इसी दृष्टि से यह जगह शांत, सुंदर, था जहां आसानी से ध्यान किया जा सकता था।
-यहां पहले बौद्ध विहार भी थे।
-वर्तमान में सांची देश का प्रमुख पर्यटक स्थल बन चुका है।
-सांची मध्य-प्रदेश राज्य की राजधानी भोपाल से लगभग 50 किलोमीटर दूर है।

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