
bhopal city (Demo photo)
MP News- केन्द्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा अर्बन चैलेंज फंड (यूसीएफ) की गाइडलाइन जारी होने के बाद अब प्रदेश के सभी नगरीय निकाय अपने यहां विकास कार्यों को गति देने करोड़ों की योजनाएं बना सकते हैं। प्रदेश के बड़े चारों नगर निगम जहां 2 हजार करोड़ तक की परियोजना बना सकते हैं, वहीं छोटी नगर परिषद 50 करोड़ की योजना बनाकर अपने यहां बदलाव ला सकती है। नगरीय विकास विभाग ने यूसीएफ में अपने हिस्से की राशि देने के लिए द्वारका योजना के 5 हजार करोड़ का फंड सुरक्षित रखा है। निकायों को केवल 10 से 15 प्रतिशत राशि देना पड़ेगी। 25 प्रतिशत केन्द्र, 50 प्रतिशत राशि बाजार से लेना जरूरी है और शेष 25 प्रतिशत में कुछ सहयोग राज्य सरकार करेगी और कुछ निकाय मिलाएंगे। भोपाल में शहरी सुधार कार्यशाला में यह जानकारी दी।
प्रदेश के नगरीय निकायों में इसके लिए जरूरत के अनुसार कार्ययोजना बनाने का काम गुरुवार को शुरू हुआ। इसके लिए नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने शहरी सुधार कार्यशाला का आयोजन किया है। राजधानी में आयोजित यह कार्यशाला दो दिन चलेगी।
"शहरी सुधार कार्यशाला" का प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने दीप प्रज्ज्वलित कर विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर सुंदरलाल पटवा राष्ट्रीय नगर प्रबंधन संस्थान में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने प्रदेश के नगरीय निकायों के अधिकारियों को दूरदर्शी नेतृत्व और कर्मठता के साथ नगरों के कायाकल्प करने का आह्वान किया। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि जीवन में सीखने की प्रक्रिया कभी समाप्त नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रशासन केवल नियमों से नहीं, बल्कि उचित व्यवहार से चलता है।
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने शहरी केंद्रों को 'विकास केंद्र' के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को अब केवल सुदृढ़ सड़क और स्वच्छ जल तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें शहर में रोजगार के नए अवसर उत्पन्न करने की दिशा में भी सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
शहरों के आर्थिक सुदृढ़ीकरण पर चर्चा करते हुए मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भूमि मुद्रीकरण और भूमि के कुशल प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि आने वाला समय शहरीकरण का है। यदि अधिकारी पारदर्शिता और जन-भागीदारी के साथ नए कार्य करेंगे और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं देंगे, तो जनता भी कर वृद्धि जैसे निर्णयों में सहर्ष साथ देगी।
अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने कार्यशाला के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आगामी वर्ष के लिए एक सुव्यवस्थित कार्ययोजना तैयार करना और नियोजित विकास के साथ नागरिक जागरूकता विकसित करना इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने अर्बल चेलेंज फंड और द्वारका योजना जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं के माध्यम से नगरीय निकायों के कायाकल्प की संभावनाओं पर भी बल दिया।
नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त संकेत भोंडवे ने अपने स्वागत उद्बोधन में कहा कि विभाग एक परिवार और सामूहिक भावना के साथ कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के सभी 16 नगर निगमों के आयुक्त, मुख्य नगरपालिका अधिकारी और वरिष्ठ अधिकारी इस कार्यशाला में सम्मिलित हैं। कार्यशाला का मुख्य केंद्र नागरिक संतुष्टि और मूलभूत सिद्धांतों पर कार्य करना है।
Updated on:
17 Apr 2026 09:37 am
Published on:
17 Apr 2026 09:18 am
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