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Election 2018: कमलनाथ का सवाल नंबर 2 व 3 सामने आते ही फिर गर्माई राजनीति?

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने दागे तीखे प्रश्न...

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डिप्टी रेंजर की हत्या के बाद कमलनाथ ने सीएम शिवराज से पूछा सवाल, भाजपा को चुनाव में पड़ेगा भारी

भोपाल। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ के 40 दिन 40 सवाल का आज तीसरा दिन है। आज कमलनाथ ने सवालों को तीसरे दिन महिला सुरक्षा को लेकर घेराव किया है। तीसरे दिन कमलनाथ ने शिवराज पर एक के बाद एक कई सवाल दागे है।

नाथ ने केंद्रीय ग्रह मंत्रालय (NCRB), ऑडिटर जनरल, NFHS - 4 को आधार बनाते हुए महिला सुरक्षा को लेकर प्रश्न किया है।

ये लिखा ट्वीटर पर:

- सवाल नंबर तीन -

मामा ,मुखौटा लगाकर वोट क्यों लिया ?

मां-बहन-बेटियों का जीवन अंधकार से क्यों भर दिया ?

मध्यप्रदेश को 'अंधेरगर्दी-चौपट राज ' में क्यों बदल दिया ?

मोदी सरकार से जानिए मामा के मुखौटे का राज;

ये था दूसरा सवाल:
वहीं इससे पहले रविवार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने 40 दिन-40 सवाल के तहत मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से दूसरा सवाल स्वास्थ्य सेवाओं पर पूछा।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की एनएचपी व एनएफएचएस रिपोर्ट्स का हवाला देकर स्वास्थ्य सेवाओं की दुर्दशा बताई है। उन्होंने पूछा है कि आखिर मध्यप्रदेश को बीमारियों का नर्क क्यों बना दिया गया?

कमलनाथ ने कहा कि प्रदेश के ग्रामीण अस्पताल में एक व्यक्ति के एक बार भर्ती होने पर औसत खर्च 25961 रुपए आता है, जो देश के बड़े राज्यों में सबसे अधिक है।

यही खर्च बिहार में 15237, तमिलनाडु में 16042 और उत्तरप्रदेश में 15393 रुपए है। बिहार और उत्तरप्रदेश के बाद मध्यप्रदेश में कुल प्रजनन दर सर्वाधिक 3.1 है। वहीं, 89.6 फीसदी महिलाओं की गर्भावस्था के दौरान पूरी जांच नहीं होती।

ऐसे बताई स्थिति
5 साल में गंभीर संक्रामक बीमारियों से 39118 पीडि़त।
2 सालों में टाइफॉइड से 229532 लोग पीडि़त।
48.8 फीसदी यानी 48 लाख बच्चे कुपोषित। देश में सबसे ज्यादा।
68.9 फीसदी खून की कमी के शिकार। 15-49 साल की 52.4 फीसदी महिलाएं शामिल।
47 फीसदी शिशु मृत्यु दर यानी 90 हजार बच्चे हर साल पहला जन्मदिन भी नहीं मना पाते।

वहीं तीसरे सवाल में ऐसे बताई स्थिति (असुरक्षित नारी और भय का साम्राज्य) : -

1) मामा राज के 13 वर्षों में 2,41,535 महिलाएं अपराधियों का शिकार हुईं। मामा के सत्ता में आने के बाद 2004 से 2016 में महिला अपराधों में 74.99% वृद्धि हुई।

2) महिलाओं के अपहरण की घटनाओं में 755% की वृद्धि हुई।2004 में 584 अपहरण होते थे,वे बढ़कर 2016 में 4994 प्रति वर्ष होने लगे 25,566 महिलाएं अपहरण का शिकार हुई है।

3) मामा राज में नाबालिग बच्चियों के साथ बलात्कार 249 % बढ़ गए। 2004 में - 710 बलात्कार से 2016 में 2479 बलात्कार प्रतिवर्ष। 17986 नाबालिग बच्चियाँ बलात्कार की शिकार। मामा राज ( 2004 - 2016) में 46317 बलात्कार।

4) मामा राज के 13 वर्षो में अराजक तत्वों , अवसाद और आर्थिक तंगी की वजह से 27 हज़ार 457 महिलाओं ने आत्महत्या कर ली।

5) मामा राज में 93 हज़ार 479 महिलाएं छेड़छाड़ का शिकार हुईं।

6) वर्ष 2004 में महिलाओं के प्रति हुए अपराधों के अदालत में लंबित मामले - 6 हज़ार 733।

2016में महिलाओं के प्रति हुए अपराधों के अदालत में लंबित मामले-85,383।मामा के राज में बहनों के साथ अन्याय में वृद्धि हुई-1168% ।

7)2016में 14007 महिला अपराधों में अदालतों में परीक्षण पूरा हुआ और मामा सरकार की कमज़ोर दलीलों की वजह से 10,119अपराधी छोड़ दिये गए। सज़ा दर मात्र 27.8 ।

8)मामा सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग ने 2004-05 से 16-17 तक 27,590 करोड़ का बजट आवंटित किया मगर इसमें से मामा ने बहनों-भांजियों के संवैधानिक हक़ के 5402करोड़ खर्च ही नहीं किये।

9)मामा के राज में मप्र में 32% नाबालिग बच्चियों की शादी होती है जिनका भविष्य अंधकारमय हो जाता है।
सोर्स :- केंद्रीय ग्रह मंत्रालय (NCRB), ऑडिटर जनरल, NFHS - 4