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हर छात्र बने विकास में भागीदार

मेरा नजरिया-मैं शिक्षक
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भोपाल

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Anil Chaudhary

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Updated: 27 Sep 2018, 7:16 PM IST

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हर छात्र बने विकास में भागीदार

भोपाल। मैं जिस स्कूल का मुखिया हूं, उसने भोपाल ही नहीं प्रदेश को कई नेता, उद्यमी और अफसर दिए हैं। पिछले कुछ दशकों में शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव आया है, पर उसमें गुणात्मक सुधार नहीं हुआ है। मैं शिक्षक हूं, किताब के हर पाठ से मेरा नाता है और वही मैं छात्रों को पढ़ाता हूं। मेरी कोशिश रहती है कि मेरे यहां से निकला हर छात्र देश-प्रदेश के विकास में भागीदार बने।

समझना चाहिए समाज की जिज्ञासा
मैं देखता हूं कि छात्रों की जिज्ञासा क्या है, उसी तरह से नीति बनाने वालों को भी समाज की जिज्ञासा को समझना चाहिए। मैं छात्रों के बीच रहता हूं तो मुझे अहसास है कि थ्योरी ऑफ चेंज के केंद्र बिंदु जैसे शासन, सरकार, नेता व नीति निर्धारक होते हैं। इनकों शिक्षकों के काम का मूल्यांकन भी करना चाहिए। कांट्रेक्ट शिक्षकों के बारे में सोचें कि उनके साथ क्या हो रहा है, वे कैसे अपने दायित्व को निभा सकते हैं।

इस तरह सुधर सकती है शिक्षा व्यवस्था

एक शिक्षक जिस तरह काव्य पाठ की गहराई को समझता है, उसी गहराई से नीति निर्धारकों को शिक्षा व्यवस्था को समझना होगा। हमारी शिक्षा काम चलाऊ नहीं हो, न ही परीक्षा पास करने का माध्यम हो। बल्कि वह जीने का पाठ पढ़ाने वाली शिक्षा हो। मुझे लगता है कि मेंटल, फिजिकल, वैल्यू एजुकेशन पर जोर देना चाहिए। प्रशासन को सोचना होगा कि एक शिक्षक, शिक्षा में क्या बदलाव लाना चाहता है? उसे आजादी मिलनी चाहिए। तब ही शिक्षा व्यवस्था सुधर पाएगी।


क्यों न मुझे बदलाव का हिस्सा बनाया जाए
शिक्षक के कंधे पर बच्चों के भविष्य का बोझ होता है। मेरी दी शिक्षा ही बेहतर नागरिक बनाती है। हर शिक्षक को दायित्व लेना होगा कि शिक्षा में हो रहे बदलाव से कदमताल करें। किताबों से आगे का पाठ पढ़ाया जाए, ताकि बच्चों को नई उड़ान मिल सके। शिक्षकों की भूमिका बेहतर शिक्षकों की चयन प्रक्रिया में भी होना चाहिए।
एसके रेनिवाल, प्राचार्य, शासकीय मॉडल स्कूल, भोपाल