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जमीन का मालिकाना हक पाने में कम लोगों की रुची, जिले में 50 हजार प्रॉपर्टी, आवेदन आए सिर्फ 1008

- इसमें से 30 ही हो सके अभी तक फाइनल, अधिकांश में फंस रहा लैंड यूज का रोड़ा - एडीएम माया अवस्थी को दी जिम्मेदारी, एसडीएम सर्किल, तहसीलों में कर रहीं बैठकें

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जमीन का मालिकाना हक पाने में कम लोगों की रुची, जिले में 50 हजार प्रॉपर्टी, आवेदन आए सिर्फ 1008

जमीन का मालिकाना हक पाने में कम लोगों की रुची, जिले में 50 हजार प्रॉपर्टी, आवेदन आए सिर्फ 1008

भोपाल. अर्बन सीलिंग की जमीनों पर वर्षों से काबिज लोगों को मालिकाना हक दिलाने के लिए शासन की तरफ से शुरू की गई धारणाधिकार की योजना गति नहीं पकड़ पा रही। जिले में करीब 50 हजार के लगभग ऐसी प्रॉपर्टी हैं जिनमें लोग अर्बन सीलिंग, पटेट की जमीनों पर रह रहे हैं। वर्षों से रह रहे इन लोगों के पास घर तो हैं, लेकिन मलिकाना हक के दस्तावेज नहीं हैं। सरकार ने इन लोगों को वर्तमान कलेक्टर गाइडलाइन से भू भाटक चुकाकर मालिकाना हक देने के संबंध में मौका दिया है। लेकिन वर्षों से ऐसे ही रह रहे लोग रुपए चुकाना ही नहीं चाहते। इस कारण कलेक्टोरेट पहुंचे आवेदनों की संख्या मात्र 1008 है। इसमें से 30 प्रकरण शासन के पास भेजे जा रहे हैं।

धारणाधिकार के प्रकरणों की कमी को देखते हुए कलेक्टर अविनाश लवानिया ने एडीएम माया अवस्थी को इस काम की जिम्मेदारी सौंपी है। एडीएम ने सबसे पहले बैरागढ़ सर्किल में धारणाधिकार के संबंध में बैठक की है। यहां ईदगाह हिल्स पर ही करीब 150 प्रकरणों में लोगों को मालिकाना हक संबंधी दस्तावेज चाहिए। पूर्व में सर्वे के बाद इतने प्रकरण प्रकाश में आ चुके हैं, लेकिन जब आवेदन करने की बारी आई तो महज 14 आवेदन ही यहां से पहुंचे। इसके बाद शाहपुरा और बरखेड़ापठानी का नंबर आता है। जिसमें काफी लोग सरकारी अर्बन सीलिंग की जमीनों पर रहे हैं। लेकिन वे मालिकाना हक लेने में कतरा रहे हैं। क्योंकि उन्हें वर्तमान कलेक्टर गाइडलाइन से भू भाटक चुकाना होगा, जो लाखों में बैठ रहा है।

एक ये समस्या भी आ रही

हुजूर और कोलार तहसील में जमीनों का लैंडयूज कृषि होने के कारण काफी आवेदन अभी तक तहसीलों में लिए नहीं जा रहे थे, लेकिन कलेक्टर ने इन आवेदनों को लेने के लिए अफसरों को कहा है। ताकि शासन को इस समस्या को लेकर अवगत कराया जा सके।

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