
फाइबर ऑप्टिक्स के अविष्कारक डॉ. पीटर सी शुल्ट्ज
भोपाल। 1970 में जब ऑप्टिकल फाइबर केबल का अविष्कार हुआ तो हमने भी नहीं सोचा था कि ये कभी टेलीकॉम इंडस्ट्री में ऑप्टिकल फाइबर केबल कभी मैन स्ट्रीम में आ पाएगी।
हमने जब इनोवेशन किया तो सोचा कि ये कॉपर का वैकल्पिक माध्यम बनेगा। जब ये आइडिया टेलीकॉम इंडस्ट्री से शेयर किया तो टेलीकॉम इंडस्ट्री ने इस आइडिया को रिजेक्ट कर दिया। उस समय कॉपर केबल का यूज हो रहा था। कोई भी कंपनी ऑप्टिकल फाइबर केबल में इंवेस्ट करने को तैयार नहीं थी। हमें इसके लिए 1995 तक इंतजार करना पड़ा।
जब इंटरनेट आया तो कंपनियों को इसका महत्व समझ आया। आज पूरी दुनिया की टेलीकॉम कंपनियां इसका यूज कर रही है।
फाइबर केबल की 50 सालों की जर्नी रविवार को इसके आविष्कार डॉ. पीटर सी शुल्ट्ज ने मैनिट में आयोजित इंस्टिट्यूट ऑफ इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर्स(आइइइइ) के मैनिट ब्रांच के द्विवार्षिक कार्यक्रम 'सृजनÓ में शेयर की। उन्हें इसके लिए 2010 में नोबल प्राइज के लिए नोमिनेट किया जा चुका है। 'सृजन' में ई-व्हीकल वर्कशॉप का आयोजन किया गया। जिसमें एफ-1 रेसिंग के द्वारा इसे बनाना सीखाया गया।
इस दौरान स्टूडेंट्स के लिए व्यावहारिक और विश्लेषणात्मक ज्ञान परीक्षा का आयोजन भी किया गया। केस स्टडी प्रतियोगिता का उद्देश्य उन्हें रोजमर्रा की परेशानियों से निकलने के तरीके समझाना था। वहीं, इनोवेशन सेशन में वेस्ट मैनेजमेंट, क्रॉप प्रोडक्शन और पब्लिक हेल्थ मैनेजमेंट पर ऑनलाइन कॉन्टेस्ट हुआ। जिसमें 100 से ज्यादा टीम ने पंजीयन कराया।
दस सालों तक करते रहे बदलाव
डॉ. शुल्ट्ज ने बताया कि 1966 में चाल्र्स के काओ और जॉर्ज होक्कहम ने हरलो, इंग्लैंड के एसटीसी लेबोरेटरीज ऑप्टिकल फाइबर को प्रस्तावित किया। जब उन्होंने दिखाया कि 1000 डीबी/किमी मौजूदा ग्लास में (5-10 डीबी/किमी कॉक्सियल केबल की तुलना में) नुकसान की वजह थी, जिसे हटाया जा सकता था।
ये विचार डॉ. शुल्ट्ज और उनके दो साथियों को काफी पसंद आया। उन्होंने इस पर रिचर्स शुरू की। 1970 में पहली बार यह बात दुनिया के सामने आई कि ऑप्टिक फाइबर के माध्यम से प्रकाश की लंबी दूरी का प्रसारण किया जा सकता है। इनोवेशन इतना आसान नहीं था, उन्हें बार-बार फेल होना पड़ रहा था।
सबसे बड़ी समस्या थी सिग्नल लॉस को कम करते हुए डाटा रेट को बढ़ाना। उन्हें इसके लिए दस सालों तक काम करना पड़ा। उन्होंने स्टूडेंट्स को बताया कि वायरलेस मोड भी इसकी जगह नहीं ले सकता।
नोबल प्राइज से दूर रहना थोड़ा बुरा तो लगता है
उन्होंने बताया कि 2010 में उन्हें व उनके दो साथियों को नोबल प्राइज के लिए नोमिनेट किया गया। साथ ही मूल विचार के लिए चाल्र्स के काओ भी नोमिनेट हुए। नोबल प्राइज सिर्फ तीन साइंटिस्ट की टीम को ही मिल सकता था। कमेटी ने इसे काओ को देना का फैसला लिया। उन्होंने बताया कि मेहनत से मिली सफलता से उन्हें काफी खुशी तो दी, लेकिन नोबल प्राइज न मिलना थोड़ा दु:खद जरूर था।
चांद पर भी जीवन संभव है
सेशन में अमेरिका ऐस्ट्रोबायोलॉजिस्ट व नासा के सलाहाकार डॉ. डेविड एच ग्रीनस्पून ने बताया कि मैं मार्स मिशन में रहा हूं। आज विश्व के कई देश चांद पर रिसर्च कर रहे हैं। चांद पर जीवन संभव है। हालांकि इस पर अभी रिसर्च चल रही है।
वहीं, गीक्स फॉर गीक्स के संस्थापक व सीइओ संदीप जैन कहा कि 100 में 94 इंजीनियर्स बेरोजगारी का शिकार होते हैं। मैं भी उनमें से एक था। गीक्स-फॉर-गीक्स स्टार्ट-अप का आइडिया आया तो इस पर फोकस किया। किसी सफल स्टार्ट-अप के लिए हमेशा सीखना जरूरी होता।
स्मार्ट गॉगल करेगा नेत्रहीनों को गाइड
सृजन-2019 में आयोजित कॉम्पीटिशन में छत्तीसगढ़ विश्वविद्यालय के इंजीनियरिंग के फस्र्ट ईयर स्टूडेंट अनांग टडार को उनके इनोवेशन के लिए फस्र्ट प्राइज दिया गया। उन्होंने बताया कि अरूणाचल प्रदेश में मैंने देखा कि नेत्रहीन लोगों को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
रिसर्च में मैंने देखा कि चमगादड़ वेव्स के जरिए रास्ते में आने वाली बाधाओं को दूर करता है। इसी सिंद्धात पर मैंने स्मार्ट गॉगल फॉर ब्लाइंड पीपुल तैयार किया। गॉगल पर अल्ट्रासाउंड सोनार लगा हुआ है। सोनार से निकली वेव्स रिफ्लेक्ट होकर आती है। इसमें लगा डिवाइस इन वेव्स को कनवर्ट करता है।
वायस सिग्नल के जरिए नेत्रहीन को डायरेक्शन मिलता है। इसे तैयार करने में मुझे डेढ़ साल का समय लगा। पहले इसके वेट करीब 120 ग्राम था। अब इसे पचास ग्राम तक किया है।
ऐप से स्टार्ट होगी बाइक
दुर्ग बीआइटी के स्टूडेंट राकेश चौधरी, प्रशांत साहू और सौरभ इक्का ने ऑटोमैटिक व्हीकल मोटरिंग सिस्टम बनाया है। ये सिस्टम ऐप से कंट्रोल होता है। इसकी मदद से बाइक को ऑन-ऑफ किया जा सकता है। यदि राइडर हेलमेट नहीं लगाता है तो इसमें लगे सेंसर बाइक को स्टार्ट नहीं होने देते। वहीं, हेलमेट में एल्कोहल डिडेक्टर भी लगा है। शराब का पता चलते ही गाड़ी स्टार्ट नहीं होती।
Published on:
25 Feb 2019 07:13 am

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