
कीकू लियोरी और कासा गेंड्ररी जैसी जापानी प्रजातियों से खिल उठेगी गुलदाउदी प्रदर्शनी
भोपाल. मप्र रोज सोसायटी की ओर से 30 नवंबर से 1 दिसंबर तक शासकीय गुलाब उद्यान में गुलदाउदी प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा। इसमें गुलदाउदी की विभिन्न किस्मों के 1000 से ज्यादा पौधे प्रदर्शित किए जाएंगे। जबलपुर के गुलदाउदी प्रेमी विभिन्न प्रजातियों के फूल लेकर आएंगे। इस बार विजिटर्स को स्नो बॉल, सुनार बंगला, कीकू लियोरी, कासा गेंड्ररी, केनरुकीकांगूकी, चंद्रमा, बेट्रीकमै और थिचिंग क्विन जैसी वैरायटी देखने को मिलेगी। गुलदाउदी का फूल ठंड में ही खिलता है। जितनी ज्यादा ठंड होती है, ये फूल उतना ही ज्यादा खिलता है। इस बार लंबे समय तक बारिश होने के कारण कई वैरायटी के फूल समय से पहले ही झड़ गए। इस कारण खूबसूरत वैरायटी इस बार देखने को शायद ही मिलेगी। एग्जीबिशन में जबलपुर से आ रहे विजय कोस्टा के मुताबिक गुलदाउदी जापान की पारंपरिक तकनीक है। करीब पांच सौ सालों से वहां गुलदाउदी की किस्मों तैयार किया जा रहा है। कीकू लियोरी, कासा गेंड्ररी, केनरुकीकांगूकी, बेट्रीकमै और थिचिंग क्विन जापान की प्रमुख किस्में हैं। इस खासियत है कि इसका फूल 5 से 6 इंच डायमीटर तक का होता है, वहीं सुनार बंगला और चंद्रमा देश में विकसित की गई किस्म है। इस बार स्पाइडर श्रेणी में हम डायमंड जुगली की वैरायटी भी लेकर आएंगे।
ऐसे करें गुलदाउदी की देखभाल
रोज सोसायटी के अध्यक्ष एसएस गदरे के अनुसार गुलदाउदी को खास देखरेख चाहिए। इसके बड़े फूल अगस्त में और छोटे जून में आते हैं। इसके पौधे को डेढ़ इंच से ज्यादा मिट्टी में नहीं दबाना चाहिए। गमले में दिए पानी निकासी के छेद पर शेप का मिट्टी या अन्य टुकड़ा रखें। मिट्टी बनाने के लिए 30 प्रतिशत गोबर की खाद और 60 प्रतिशत काली मिट्टी और 10 प्रतिशत रेत का इस्तेमाल किया जाता है। हर सप्ताह गुड़ाई करें ताकी फूल बड़े आएं। 15 दिन में कराटे नामक कीटनाशक का स्प्रे जरूर करें।
कलम से तैयार किया जाता है नया पौधा
अध्यक्ष एसएस गदरे के अनुसार गुलदाउदी के अच्छे प्लांट के लिए उसकी कलम (ब्रांच) से नया पौधा तैयार करना चाहिए। यह कॉकपिट पर भी तैयार किया जा सकता है। इसके एक माह बाद चार से छह इंच के गमले और बड़ा होने पर आठ इंच तक के गमले में शिफ्ट कर देना चाहिए। गुलदाउदी को ज्यादा बड़े गमलों की जरूरत नहीं होती है। फ्लैट कल्चर में मिट्टी मिलाना कठिन होता है। ऐसे में हमने बिना मिट्टी के प्लांटेशन करने की टेक्नीक पर काम किया, जिसमें गुलाब और गुलदाउदी की वैरायटी तैयार की है। इस तरह पौधे लगाने के लिए सिंडर (जली इंटें या कोयले) और बॉयलर कोयले का उपयोग किया जाता है। इसमें मिट्टी की जरूरत नहीं होती है।
Published on:
29 Nov 2019 02:00 am
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