
भोपाल| थिएटर ओलम्पिक्स के तीसरे दिन शुक्रवार को शाम भारत भवन में शाम 5:30 बजे हिंदी नाटक "प्रेम की भूतकथा" का मंचन हुआ| नाटक का निर्देशन सुविख्यात रंगकर्मी दिनेश खन्ना ने किया| विभूति नारायण राय के उपन्यास पर आधारित नाटक “प्रेम की भूतकथा” 1 घंटा 45 मिनट की अवधि में दर्शकों को एक अलग दुनिया ले जाता है|
मंच पर 1909 के दशक के मसूरी का सेट लगा हुआ है| उस वक़्त मसूरी में दो घटनाएँ होती है- एक बिजली की उत्पत्ति और किसी व्यक्ति की नृशंस हत्या| कहानी एक रहस्यमयी अंदाज़ में आगे बढ़ती है जहाँ नाटक का मुख्य पात्र, जो एक पत्रकार है जो भूतों के साथ अपने अनुभव की जाँच पड़ताल कर रहा है वो ऐसे सबूतों की तलाश में है जिनके जरिये भूतों के अस्तित्व को साबित किया जा सके|
इस प्रक्रिया में उसकी मुलाकात उन लोगों से होती है जिनके पास अपने रहस्य उलझे पड़े हैं| अपनी खोज यात्रा में वो नैनीताल जेल, मसूरी और देहरादून जाता है जहाँ उसके सामने एक प्राचीन अतिनैतिक और रहस्यमयी कहानियों का पर्दा खुलता है|
नाटक के निर्देशक दिनेश खन्ना राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से स्नातकोत्तर हैं| अज्ञेय के काव्य पर आधारित और नटरंग संस्थान के लिए प्रस्तुत उनकी रंग प्रस्तुति "बावरा अहेरी" का बड़े पैमाने पर स्वागत हो चुका है| वे अपने काम को आस्ट्रेलिया, रोमानिया, बुल्गारिया, श्रीलंका और चीन में प्रदर्शित कर चुके हैं|
पहचान सिने संवाद की स्थापना हाल ही में हुई, जिसमें वरिष्ठ और अनुभवी रंगकर्मियों के अलावा वे शौकिया रंग–उत्साही भी शामिल हैं जो रंगकर्म को रचनात्मक ढंग से करते हैं|
मंच पर- ,मंच परे-
टीकम जोशी, हैप्पी रंजीत साहू, सिमरत कौर, सुकुमार टूडू, शाहिदुर्रह्मान, मंच परिकल्पना– राजेश बहल, वेशभूषा– अंकुर कौशिक, ध्वनि– सैंडी, प्रकाश– गोविन्द सिंह यादव,दिव्यांशी त्यागी, रंजय कुमार, वेड दत्त आर्य, रितुप्मा शेखावत|
नाटक द लोनली रूम का हुआ मंचन
थिएटर ओलम्पिक्स के तीसरे दिन शुक्रवार को शाम 7:30 बजे रविन्द्र भवन में आंगिक अभिनय के साथ नाटक द लोनली रूम का मंचन हुआ| नाटक का निर्देशन फ़्रांस की फ्लेविया बेत्रम एवं एलोईस काल्स ने किया है |
"समय रुक गया है| वे इंतजार करते हैं| इंतजार..इंतज़ार....और इंतज़ार...वे इंतजार करते हैं, खालीपन शून्य और अपने अस्तित्व की तन्हाई से घिरे हुए| यदा-कदा उन्हें बदलाव की उम्मीद की झलक मिलती है और वे अपने डर के दायरे से आगे बढती हैं| लेकिन जितनी जल्दी वह आता है उतनी ही जल्दी चला जाता है"|
नाटक "द लोनली रूम" एलोईस कार्ल्स का लिखा एक कविताई कथानक है| यह नृत्य नाटिका अपने सपने और अपनी महत्वकांक्षाएं संजोती दो महिलाओं की कहानी है| कहानी जो हमारे मन की व्यथाओं, सपने और वयक्तित्व के बीच होने वाले टकराव को दिखाती है|
एलोईस कार्ल्स फ़्रांस की एक अभिनेत्री और चित्रकार हैं| उन्होंने इमेनुएल ओगर की कंपनी "ल जो से लेवे" के साथ 4 वर्ष तक काम किया| स्टीवन वास्सन और कोर्रिन सौम के द्वारा लंदन में निदेशित इंटरनेशनल स्कूल ऑफ़ कॉर्पोरल माइम में पढाई के लिए फ्रांस छोड़ा| बाद में ‘ल थियेटर दे ल’ एन्जेफो से जुड़ी|
नाटक की दूसरी निर्देशिका फ्लेविया बेत्रम होक्स की संस्थापक सदस्यों में से हैं| वे दैहिक रंगमंच अभिनेत्री हैं, जिन्होंने मूकाभिनय का प्रशिक्षण लिया है| उन्होंने थियेटर रे, नोह बजट थियेटर, प्रोएक्टिव डांस, ट्विस्टेड हिप्स, वन टेस्ट कैबरे और हैप्पी 3 इंटरनेशनल बैकेट फेस्टिवल एनिस्क्लेन द्वारा आयोजित वन थियेटर के बस्टर्स सिल्वर स्क्रीन डे ड्रीम्स के साथ कार्य किया|
मंच पर- मंच परे
नाटक में मंच पर फ्लेविया बेत्रम एवं एलोईस कार्ल्स ने अभिनय किया| मंच परे मिशेल नियो, आंद्रेस वेलास्क्वेज़, विनिसियस कारवाल्हो, अवनिंदर सिंह नानरे ने साथ दिया|
Published on:
17 Mar 2018 07:14 am

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