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हाईवे पर चलने वाले लोगों की मौज, 4553 किमी में नजर आएंगे फल ही फल

हाईवे से निकलने वाले लोगों का सफर तो आनंद से भरपूर हो ही जाएगा, रास्ते में उन्हें विभिन्न प्रकार के फल-फ्रूट्स भी नजर आएंगे। जिसका लाभ निश्चित ही लोगों को मिलेगा, ऐसे में हाईवे पर चलने वाले लोगों की मौज ही मौज हो जाएगी। क्योंकि उन्हें ताजा और पेड़ों पर ही पके फल भी खाने को मिलेंगे।

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40 करोड़ से संवरेगा हाईवे
सड़क पर मिलेगा असली फल-फ्रूटस का आनंद

भोपाल. स्टेट और नेशनल हाईवे को संवारने के लिए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है, 40 करोड़ रुपए की लागत से सड़क के बीच डिवाइडर और साइड में ऐसे पौधे विकसित किए जाएंगे, जिससे प्रदूषण तो कम होगा ही साथ ही उन पेड़ पौधों में विभिन्न प्रकार के फल आएंगे, ऐसे में हाईवे से निकलने वाले लोगों का सफर तो आनंद से भरपूर हो ही जाएगा, लेकिन रास्ते में उन्हें विभिन्न प्रकार के फल-फ्रूट्स भी नजर आएंगे। जिसका लाभ निश्चित ही लोगों को मिलेगा, ऐसे में हाईवे पर चलने वाले लोगों की मौज ही मौज हो जाएगी। क्योंकि उन्हें ताजा और पेड़ों पर ही पके फल भी खाने को मिलेंगे।


दरअसल लोक निर्माण विभाग और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) की प्रदेश में 4553 किलोमीटर लंबी 80 सडक़ों को अब वन विभाग हरा-भरा करेगा। यहां दिखावटी हरियाली नहीं होगी, बल्कि फलदार और प्रदूषण कम करने वाले 4.17 लाख पौधे लगेंगे। ऐप से निगरानी होगी। डाटा बैंक भी बनेगा। वन विभाग 15 साल बाद सडक़ों के किनारे पौधरोपण की जिम्मेदारी संभालेगा। विभाग सात साल तक पौधों की देखभाल भी करेगा। पौधरोपण कर देखभाल में करीब 40 करोड़ रुपए की जरूरत होगी।

कहां कितने पेड़ लगेंगे

सडक़ लंबाई पौधे

ग्वालियर-इटावा (एनएच-92) 107.50 10000

रीवा से यूपी बॉर्डर तक (एनएच-7) 89.30 1000

देवास-भोपाल 104.71 5000

गुना-सागर (एसएच-20) 76.15 6000

लेबड़-जावरा 124.15 20000

७ साल तक होगी पौधों की देखभाल
पीसीसीएफ सुनील अग्रवाल के अनुसार जंगल के बजाय हाईवे किनारे पौधरोपण, देखभाल पर ज्यादा खर्च होता है। 7 साल तक एक पौधे की देखभाल में करीब एक हजार रुपए खर्च होंगे। जंगल में एक हैक्टेयर में 500 पौधे लगाने पर सात साल में करीब 1.15 लाख ही खर्च होते हैं।