
पानी पीने गई छात्रा को कर दिया था क्लास से बाहर, अब टीचर दिखे तो पैरों में गिर गई सांसद
भोपाल. एक छात्रा को प्यास लगी तो वह बिना पूछे ही पानी पीने चली गई थी, वह लौट कर आई तो टीचर ने उसे क्लास में घुसने नहीं दिया, वह छात्रा सांसद बन गई, सालों बाद जब उनके सामने वही टीचर आए तो छात्रा ने टीचर के पैर छुए, अचानक एक सांसद महिला द्वारा इस प्रकार टीचर के पैर छूते देख लोग हैरान रह गए, लेकिन फिर खुद सांसद ने ये किस्सा सभी को बताया।
दरअसल शहर के मोतीलाल विज्ञान महाविद्यालय में पूर्व विद्यार्थी संगठन (एमवीएम एलुमिनी) की ओर से पूर्व विद्यार्थियों का मिलन समारोह कॉलेज कैंपस में आयोजित हुआ, इसमें पूर्व छात्रों ने किस्से सुनाए वो वाकई कॉलेज के दिनों की सिर्फ यादें ताजा नहीं कर रहे थे, बल्कि उन्हें उत्साह से पूर्ण रही थी, सभी एक दूसरे से मिलकर काफी खुश हुए, इस दौरान जो किस्से सुनाए गए, वे काफी रोचक थे, आईये आप भी जाने क्या हैं उनके कॉलेज टाइम के किस्से। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष चरणदास महंत, उनकी पत्नी कोरबा सांसद ज्योत्सना महंत और विशिष्ट अतिथि स्वास्थ्य मंत्री डॉ. प्रभु राम चौधरी थे।
वर्षों बाद जब कॉलेज फ्रेंड्स मिले तो पुरानी यादों में खो गए। कोई उम्र को भूलाकर गाना गा रहा था तो कोई साथियों के साथ कॉलेज के दिनों के फेवरेट गानों पर डांस कर रहा था। इस दौरान वे यारी है ईमान मेरा, यार मेरी ङ्क्षजदगी..., यह दोस्ती हम नहीं छोड़ेंगे... जैसे फिल्मी तरानों पर जमकर झूमे।
पाजामा पर शर्ट पहनकर पूर्व छात्र बन आया हूं
चरणदास महंत ने कहा कि मैं 1972-75 तक यहां से पढ़ा हूं। एमवीएम में जीवनसंगिनी ज्योत्सना महंत भी मिली। मैं जब यहां आ रहा था तो साथी बोले, कुर्ता-पाजामा पहन नेता बनकर मत आइयेगा। अब आदत है तो पाजामा पर शर्ट पहन पूर्व छात्र के रूप में आया। अच्छे दोस्त सफेद रंग जैसे होते हैं, जिसमें कोई भी रंग नहीं मिलाया जा सकता। मैं गांव से यहां पढऩे आया था। सीनियर हमें गांव का केंचुआ कहते थे। मैं पढ़ाई में सामान्य था और पत्नी टॉपर थी। दोस्त के नोट््स चुराकर पढ़ाई करते थे। ये रिश्ते मेरी व्यक्तिगत पूंजी है।
श्यामला हिल्स से पैदल आता था कॉलेज
प्रभुराम चौधरी ने कहा कि मैं 1979 में एमवीएम का विद्यार्थी रहा। बेगमगंज से यहां आया था, साथ में मेडिकल की तैयारी भी कर रहा था। सेकंड ईयर में पहुंचा तो एडमिशन जीएमसी में हो गया। जब यहां पढ़ता था तो श्यामला हिल्स स्थित होस्टल से पैदल-पैदल कॉलेज आता था। कुछ साथी छात्र राजनीति करते थे, जब भी कॉलेज में कुछ होता था तो ग्रुप बनाकर थाने पहुंच जाते। एमवीएम ने मेरे जीवन को नई दिशा दी है।
क्लास बंक करने पर खूब डांट पड़ती थी
ज्योत्सना महंत ने कहा कि मैं कार्यक्रम में पूर्व छात्रा के रूप में शामिल होने आई हूं। एक बार जब बिना बिना पूछे पानी पीने कक्षा से बाहर चली गई थी, तो वापस लौटने पर जूलॉजी के प्रोफेसर विजय तिवारी सर ने उन्हें सजा के तौर पर कक्षा से बाहर कर दिया था। मैंने सोचा चलो अब क्लास में पढऩा नहीं पड़ेगा। जब क्लास से बंक मारती थी तो बाद में टीचर्स से खूब डांट पड़ती थी। जीवन के हर मोड़ पर शिक्षकों द्वारा दी गई शिक्षा ही काम आ रही है। हम कितने भी बड़े पदों पर पहुंच जाएं लेकिन शिक्षकों के सामने कुछ नहीं है। इसलिए मैंने अपने गुरुजनों के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया है।
लड़कियों को मिलने लगा स्टैटिस्टिक्स में प्रवेश
मप्र हथकरघा विकास निगम की आयुक्त अनुभा श्रीवास्तव ने बताया कि मैंने बीएससी और एमएससी यहीं से की है। कॉलेज कार्यक्रमों को लेकर हमेशा उत्सुकता रहती थी। मैं पढ़ाई में टॉपर थी तो विभिन्न दायित्वों को भी संभाला। हमारा पहला बैच था जिसमें छात्राओं को मास्टर्स में स्टैटिस्टिक्स की पढ़ाई का मौका मिला था। हमारे प्रयासों से ही लड़कियों को एडमिशन मिलने लगा।
Published on:
07 Nov 2022 08:37 am

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