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MP News: ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण दिखने या दर्द होने का इंतजार करना जानलेवा साबित हो सकता है। इस बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका डॉक्टर की सलाह से नियमित जांच कराना है। एम्स के ताजा अध्ययन में चेताया गया है कि प्रारंभिक अवस्था में पहचान होने पर जीवन बचने की संभावना 93 प्रतिशत तक होती है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में महिलाएं देर से अस्पताल पहुंच रही हैं। चिकित्सा सुविधाओं में प्रगति के बावजूद ब्रेस्ट कैंसर की देर से पहचान अब भी एक गंभीर चुनौती बनी हुई है, जिससे उपचार अधिक जटिल, लंबा और महंगा हो जाता है। एम्स भोपाल में चल रहे शोध के प्रारंभिक निष्कर्ष इस स्थिति की पुष्टि करते हैं।
शोधकर्ताओं ने सलाह दी है कि 40 वर्ष से अधिक आयु की महिलाएं, भले ही कोई लक्षण न हों, नियमित स्क्रीनिंग जरूर कराएं। जिन महिलाओं के परिवार में स्तन कैंसर का इतिहास रहा है, उन्हें आनुवंशिक परामर्श और जोखिम मूल्यांकन के लिए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
1- स्तन या बगल में बिना दर्द की गांठ
2- स्तन के आकार या बनावट में बदलाव
3- निप्पल से स्राव
4- त्वचा में लालिमा या गड्ढे पड़ना
एम्स भोपाल के ऑन्कोलॉजिस्ट ने कहा इन लक्षणों को नजरअंदाज करना हो सकता है खतरनाक।
एम्स भोपाल के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग ने छह माह में 167 ब्रेस्ट कैंसर रोगियों की जांच की। इनमें करीब 60 प्रतिशत महिलाओं में बीमारी की पहचान तीसरे और चौथे स्टेज में हुई। केवल 32 प्रतिशत मामलों में ही दूसरे स्टेज में निदान संभव हो सका। प्रारंभिक अवस्था में पहचान का प्रतिशत अब भी बेहद कम है।
अधिकांश महिलाएं एडवांस स्टेज में ही अस्पताल पहुंचती हैं। प्रारंभिक पहचान होने पर उपचार अत्यंत प्रभावी होता है, लेकिन जागरुकता की कमी, सामाजिक संकोच और भय बड़ी बाधा हैं। प्रभारी कार्यकारी निदेशक प्रो. डॉ. माधवानंद कर ने कहा कि ब्रेस्ट कैंसर एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती है और समय पर जांच और इलाज से अनेक जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।
-डॉ. विनय कुमार, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभागाध्यक्ष,
Updated on:
04 Feb 2026 12:37 pm
Published on:
04 Feb 2026 12:37 pm
