भोपाल

वक्फ एक्ट पर आज सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रख रही सरकार, जानें कल क्यों नहीं हो सका निर्णय

Waqf Act Hearing in Supreme Court : सुप्रीम कोर्ट में आज एक बार फिर केंद्र सरकारी की ओर से लाए गए वक्फ एक्ट पर सुनवाई है। मध्य प्रदेश में भी इस मामले पर चर्चाओं का बाजार खासा गर्म है।

3 min read
वक्फ एक्ट पर आज सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रख रही सरकार

Waqf Act Hearing in Supreme Court : देश की सर्वोच्च न्यायालय यानी सुप्रीम कोर्ट में आज बुधवार 21 मई को एक बार फिर केंद्र सरकारी की ओर से लाए गए वक्फ एक्ट पर सुनवाई शुरु हो गई है। वक्फ संशोधन कानून 2025 की संवैधानिकता की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर आज एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है। आज की सुनवाई में केंद्र सरकार अपना पक्ष रख रही है। केंद्र की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट से कहा कि, ये ऐसा मामला नहीं, जहां मंत्रालय ने एक बिल बनाया और बिना सोचे समझे वोटिंग कर दी। हम एक बहुत पुरानी समस्या खत्म करने का काम कर रहे हैं, जिसकी शुरुआत 1923 में हुई थी।

जनरल मेहता ने कहा- कुछ याचिकाकर्ता पूरे मुस्लिम समुदाय की ओर से नहीं बोल सकते। आपके पास जो याचिकाएं आई, वे ऐसे लोगों ने दायर की हैं जो सीधे इस कानून से प्रभावित नहीं हैं। किसी ने ये नहीं कहा कि, संसद को ये कानून बनाने का अधिकार नहीं था। जेपीसी की 96 बैठकें हुईं और हमें 97 लाख लोगों से सुझाव मिले, जिस पर बहुत सोच-समझकर काम किया गया है।

कल की सुनवाई में क्या हुआ?

कल कोर्ट ने सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ताओं की तमाम दलीलें सुनी और याचिकाकर्ताओं के वकील से तमाम सवाल भी हुए, लेकिन कोर्ट इस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी कि, याचिकाकर्ताओं को कोई अंतरिम राहत दी जाए या नहीं। बता दें कि, वक्फ कानून की सुनवाई को लेकर देशभर के साथ-साथ मध्य प्रदेश में भी चर्चाओं का बाजार खासा गर्म है।

आपको बता दें कि, एक दिन पहले मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा था कि, हर कानून के पक्ष में संवैधानिकता की धारणा होती है, इसलिए राहत के लिए बहुत ठोस और स्पष्ट कारण पेश करने होते हैं। कोर्ट ने कहा कि, अदालत तबतक हस्तक्षेप नहीं करती, जबतक मामला स्पष्ट ना हो। जिसपर याचिकाकर्ता के वकील कपिल सिब्बल ने कानून को मुसलमानों की धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन और वक्फ संपत्तियों पर कब्जा करने वाला बताया। साथ ही कोर्ट से इसपर अंतरिम रोक लगाने की मांग की।

केंद्र सरकार ने कही ये बात

वहीं, दूसरी तरफ केंद्र सरकार की ओर से कहा गया कि, यह कानून एक धर्मनिरपेक्ष अवधारणा है और संवैधानिकता की धारणा को देखते हुए रोक नहीं लगाई जा सकती। सुप्रीम कोर्ट ने कानून का विरोध कर रहे याचिकाकर्ताओं से वक्फ के पंजीकृत करने की कानूनी अनिवार्यता और पंजीकृत न करवाने की कानूनी परिणाम के बारे में सवाल पूछे। कोर्ट ने पूछा- पहले से ही कानून में वक्फ को रजिस्टर्ड करने की बात है और जो वक्फ पहले से रजिस्टर है, उनपर असर नहीं पड़ेगा।

'नया कानून धार्मिक संपत्तियों के अधिकारों का उल्लंघन'

याचिकाकर्ताओं की ओर से कोर्ट को बताया गया कि, सरकार की ओर से लाया जा रहा नया कानून वक्फ संपत्तियों पर कब्जा करने के लिए लाया गया है। ये धार्मिक संपत्तियों के प्रबंधन के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। उन्होंने संशोधित कानून के वक्त बाय यूजर को खत्म करने के साथ केंद्रीय वक्फ परिषद में और राज्य वक्फ बोर्ड में गैर मुसलमानों को शामिल करने और वक्फ कराने वाले के 5 साल के प्रैक्टिस होने के प्रावधान को गलत ठहराया।

इन मुद्दों पर राहत की मांग

याचिकाकर्ता पक्ष जिन तीन मुद्दों पर राहत या रोक की मांग कर रहा है, उनमें पहला वक्फ बाई यूजर या वक्फ बाय डीड है। इसका मतलब वक्त घोषित संपत्तियों को गैर अधिसूचित करने से संबंधित है। वहीं, दूसरा मुद्दा राज्य सरकार वक्फ बोर्ड और केंद्रीय वक्फ परिषद संरचना से संबंधित है, जबकि याचिका में तीसरा मुद्दा वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिमों को शामिल करने के विरोध में है। आपको बता दें कि, मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और जस्टिस ए.जी मसीह की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है।

Published on:
21 May 2025 12:05 pm
Also Read
View All

अगली खबर