
govt and information commission lock horn again in mp
भोपाल। मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव कार्यालय में सूचना अधिकारी नियुक्ति को लेकर राज्य सरकार और सूचना आयोग आमने-सामने आ गए हैं। सूचना आयोग ने दोनों जगह लोक सूचना अधिकारी और सहायक लोक सूचना अधिकारी की नियुक्ति के आदेश दिए तो सरकार ने इसे मानने से इनकार कर दिया। अब सरकार इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जाने की तैयारी में है।
सूचना आयोग ने 9 नवम्बर को आरटीआई कार्यकर्ता अजय दुबे की याचिका पर निर्देश दिया था कि मंत्रालय के विभिन्न विभागों सहित सीएम और सीएस कार्यालय में लोक सूचना और सहायक लोक सूचना अधिकारी नियुक्त किए जाएं। इसकी रिपोर्ट 20 दिसम्बर तक मांगी गई। सरकार ने विभिन्न विभागों में नियुक्ति कर दी, लेकिन सीएम और सीएस कार्यालय में इनकी नियुक्ति से इनकार कर दिया।
आदेश मानने से सरकार का इनकार
सरकार की ओर से सूचना आयोग को भेजे गए पत्र में लिखा कि आयोग के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका लगाई जा रही है, इसलिए आदेश का पालन नहीं किया जा रहा है। सरकार ने आयोग से आग्रह किया है कि हाईकोर्ट का फैसला आने तक इस मामले की सुनवाई स्थगित रखी जाए। इस मामले में पूर्व महाधिवक्ता विवेक तनखा ने ट्वीट कर कहा है कि अजय दुबे ने कानून के तहत सही बात उठाई है। केवल संवैधानिक संस्थाओं को ही छूट है।
क्या है आरटीआई
सूचना का अधिकार कानून यानि आटीआई एक्ट भारत देश में 2005 में लागू हुआ। इस कानून ने सरकारी सूचनाओं तक आम आदमी की पहुंच सुनिश्चित की है। कई घोटालों का खुलासा आरटीआई से मिली जानकारियों से हुआ है। लेकिन अब सूत्रों के मुताबिक यह भी सूचना है कि केंद्र सरकार आरटीआई कानून में बदलाव करने की तैयारी कर रही है। इनमें आरटीआई की अर्जी देने वाले की मौत की स्थिति में मामला बंद करने और आरटीआई की प्रक्रिया खर्चीली करने जैसे प्रस्ताव हैं। सरकार ने 15 अप्रैल तक सभी से अपनी राय देने को कहा है। लेकिन आरटीआई एक्टिविस्टों के साथ विपक्षी राजनीतिक पार्टियों ने इस कोशिश को आरटीआई कानून कमजोर करने की कोशिश बताया है।
Published on:
25 Dec 2017 09:25 am

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