
दस साल पहले बने तालाब फूटे, अब मरम्मत करेगी सरकार
भोपाल। दस से 15 साल पहले प्रदेश के गांवों में बने तालाबों में से अधिकांश फूटने लगे हैं या खराब हो गए हैं। कई पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा बनाए गए इन तालाबों में से कई ऐसे हैं जिनमें बहुत ज्यादा मिट्टी भर जाने के कारण भी इनकी जनआवर्धन क्षमता बहुत कम हो गई है। ऐसे में प्रदेश सरकार ने तालाबों की मरम्मत की योजना बनाई है। हालंाकि ये कार्य 15 मार्च से ही शुरू होना था, लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण अब इसे टाल दिया गया है। कोरोना संक्रमण समाप्त होने के बाद अब इनकी मरम्मत का काम किया जाएगा।
सरकार ने पंचायतों को पहले चरण में प्रत्येक गांव के एक-एक तालाब के गहरीकरण का टारगेट दिया है, जिससे उनमें बारिश के पानी को रोका जा सके। इस तरह से पंचायतों द्वारा प्रदेश के करीब 50 हजार तालाबों का गहरीकरण किया जाएंगा। वहीं जिन ग्राम पंचायतों में पहले से तालाब नहीं हैं और गांव में भूमि की उपलब्ध है वहां नए तालाबों का निर्माण किया जाएगा। दरअसल सरकार यह कवायद ग्रामीण जल स्तर को बढ़ाने और जल संकट को दूर करने के लिए कर रही है।
तालाब गहरीकरण के साथ ही उसके कैचमेंट एरिया को भी बढ़ाया जाएगा। तालाबों को नदी, नाले अथवा खेतों से बहने वाली नालियों से जोड़ा जाएगा, जिससे बारिश के दौरान तालाबों में फुल टैंक किया जा सके। तालाबों के पानी का उपयोग किसान फसल की सिंचाई और गर्मी में मवेशियों को पानी पिलाने कर सकेंगे। तालाबों से पीने के लिए पानी का आरक्षण प्रति वर्ष पंचायतें पानी की उपलब्धता के अनुसार कर सकेंगी। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने सभी ग्राम पंचायतों को तालाब के गहरीकरण और उनके जीर्णोद्धार और मरम्मत का प्रस्ताव तैयार करने के लिए कहा है, जिससे तालाबों के लिए पर्याप्त राशि जारी की जा सके।
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बड़े तालाबों की अलग से बनेगी डीपीआर
बीस एकड़ अथवा उससे अधिक क्षेत्रफल में फैले तालाबों का अलग से डीपीआर तैयार की जाएगी। उनके गहरीकरण और फुलटैंक पानी भराव तथा पानी रोकने के लिए विस्तार से कार्ययोजना तैयार की जाएगी। तालाबों की मैपिंग कर इसकी जानकारी ग्राम पंचायतों को जनपद पंचायतों में देनी होगी। पंचायतों को यह भी बताना होगा कि इन तालाबों को कितने गांवों को लाभ मिलेगा, इससे कितने एकड़ खोतों की सिंचाई की जा सकेगी, गहरीकरण से इनके जल भराव क्षमता
कितनी बढ़ जाएगी।
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बुंदेलखंड के तालाबों के लिए खास प्लान-
सरकार ने बुंदेलखंड में चंदेल काल में बने एतिहासिक तालाबों को संरक्षित करने के लिए अलग से प्लान बनाया है। इसमें टीगमगढ़, निवाड़ी, छतरपुर, पन्ना, दतिया एवं दमोह जिले को शामिल किया गया है। सरकार इन तालाबों का केचमेंट भी तय करेगी ताकि उसमें अतिक्रमण न हो और जल संरक्षण का कार्य हो सके।
Published on:
29 Mar 2020 06:03 am
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