
नई गाइडलाइन के बाद सौदे घटे, लेकिन प्रॉपर्टी बाजार गुलजार
भोपाल. एक अगस्त से लागू नई कलेक्टर गाइडलाइन से रजिस्ट्री में गिरावट हुई है। जागरुकता और धारणाधिकार (सरकारी या सीलिंग की जमीन पर काबिजों को हक देने का अधिकार) की जानकारी के बाद लोग कृषि भूमि पर प्लॉट खरीदने से बच रहे हैं। क्योंकि यहां ये अधिकार नहीं दिए जा रहे। ऐसे में भोपाल टू में आने वाले होशंगाबाद रोड, कोलार, कटारा, न्यू मार्केट, कोटरा, नेहरू नगर, नीलबड़, अरेरा कॉलोनी, भोपाल तीन के गोविंदपुरा, अयोध्या बायपास व आस-पास के क्षेत्रों में अच्छी रजिस्ट्री हो रही हैं।
पुराने शहर के लांबाखेड़ा में भी अच्छी रजिस्ट्री हुई है। ऐसे में ये कहना गलत नहीं होगा कि नए शहर में संचालित नए प्रोजेक्ट के अलावा 60 फीसदी हिस्से में प्रॉपर्टी की री-सेल तेज हुई है। दो हफ्तों में रीसेल की 1200 से ज्यादा रजिस्ट्री हुई है। नई कलेक्टर गाइडलाइन लागू हुए मंगलवार को 24 दिन पूरे हो गए हैं। 31 जुलाई तक जहां कई बड़े सौदे हुए, वहीं अब छोटे प्लॉट और बिल्डर्स द्वारा निर्माणाधीन मल्टी में रजिस्ट्री हो रही है। ज्यादातर लोग दुकान, मकान, फ्लैट खरीद रहे हैं। पंजीयन मुख्यालय की तरफ से भोपाल का राजस्व वसूली का लक्ष्य 731 करोड़ से बढ़ाकर 860 करोड़ रुपए कर दिया है। ऐसे में पंजीयन विभाग के अफसरों ने उन 203 नवीन लोकेशनों पर ही जमीनों के रेट बढ़ाए जहां से ज्यादा रजिस्ट्री और आय हो रहीं थीं। इसमें से 90 फीसदी लोकेशन भोपाल टू की हैं।
पिछले 15 दिन में हुई रजिस्ट्री की स्थिति
भोपाल 1 जोन में करीब 480 रजिस्ट्री हुई। इस जोन में पुराना शहर, श्यामला हिल्स, नई जेल के पास का कुछ हिस्सा, करोद का कुछ हिस्सा, चौक बाजार, कोहेफिजा, लालघाटी, बैरागढ़, एयरपोर्ट तक का पूरा एरिया है।
भोपाल 2 जोन में करीब 1100 रजिस्ट्री हुई। रातीबड़ से लेकर कटारा तक पूरा क्षेत्र सिर्फ शक्ति नगर और साकेत छोड़कर, होशंगाबाद रोड, कोलार रोड, कटारा, न्यू मार्केट, कोटरा, नेहरूनगर, नीलबड़, भदभदा, अरेरा कॉलोनी।
भोपाल 3 जोन में करीब 700 रजिस्ट्री हुई। साकेत नगर, शक्ति नगर, गोविंदपुरा से लेकर करोद तक, अयोध्या नगर, अवधपुरी, मीनाल, भेल गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र शामिल है।
नोट- इसमें सिर्फ रजिस्ट्री संख्या है। मॉडगेज व अन्य दस्तावेज शामिल नहीं हैं।
विद्यानगर के रेट में कोई अंतर नहीं
होशंगाबाद रोड के विद्या नगर फेस टू के कमर्शियल प्रोजेक्ट के रेट आज भी 70 हजार रुपए प्रतिवर्ग मीटर ही हैं। जबकि इसके आस-पास की जमीनों के रेट अलग-अलग हैं। इस विसंगित के कारण इस प्रोजेक्ट में लोग कम रुची ले रहे हैं। क्योंकि ये इस रोड की अब तक की सबसे महंगी प्रॉपर्टी बन गई है।
Published on:
25 Aug 2021, 12:35 AM IST
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