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राजधानी में 35 फीसदी बुजुर्ग बच्चों से प्रताडि़त, ‘सहारे की लाठी’ही दे रही‘जख्म’

राजधानी में 35 फीसदी बुजुर्ग बच्चों से प्रताडि़त, ‘सहारे की लाठी’ही दे रही‘जख्म’

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राजधानी में 35 फीसदी बुजुर्ग बच्चों से प्रताडि़त, ‘सहारे की लाठी’ही दे रही‘जख्म’

भोपाल@रिपोर्ट - नीलेंद्र पटेल,

राजधानी में 35 फीसदी बुजुर्गों पर अपने ही बच्चे सितम ढा रहे हैं। कइयों को बच्चों ने अपने हाल पर छोड़ दिया, तो कई घर के अंदर ही सिसकने को मजबूर हैं। कई बुजुर्ग प्रताडऩा की पीड़ा तो बयां कर रहे हैं, लेकिन किसी तरह की कानूनी कार्रवाई नहीं चाहते। इसके पीछे की वजह खानदान में बदनामी का डर है।

यह खुलासा भोपाल पुलिस की रिपोर्ट में हुआ है। पुलिस ने 9 मार्च को अवधपुरी इलाके की नर्मदा वैली हाउस नं-13 में रहने वाले एयरफोर्स से रिटायर्ड अधिकारी 74 वर्षीय जीके नायर व उनकी पत्नी गोमती नायर की हत्या के बाद थाना स्तर पर बुजुर्गों से बातचीत के बाद उनकी समस्याएं जानी, जिसमें बुजुर्गों ने अपना दर्द बयां किया।

बीमारी के चलते दवाइयों का खर्च बड़ा बोझ
पुलिस को कई बुजुर्गों ने बताया कि उनके बच्चे बढ़ती उम्र में बीमारी के चलते दवाइयों के खर्च की वजह से बोझ समझ रहे हैं। बच्चे सुबह-शाम यही सोचते हैं कि वे कब इनसे मुक्त होंगे। गौतम नगर इलाके में रहने वाले 82 वर्षीय रिटायर्ड शिक्षक रामनारायण पाण्डेय (परिवर्तित नाम) ने पुलिस को बताया कि जिस दिन पेंशन आती है, उसके दो तीन दिन तक पहले और बाद में दोनों बेटे-बहू बहुत सेवा करते हैं। इसके बाद पानी तक के लिए नहीं पूछते। वह अगले माह का इंतजार करते रहते हैं।

बेटे की शह पाकर बहू कर रहीं प्रताडि़त
बुजुर्गों का कहना था कि उनकी बहू शादी के कुछ साल तक ठीक थीं, लेकिन बेटे की शह पाते ही दुव्र्यव्हार करने लगीं। बेटे ही बहुओं को प्रताडि़त करने के लिए उकसाते हैं। अधिकतर बुजुर्ग यह सोचकर शिकायत नहीं करते कि उनकी अब जिंदगी ही कितने दिन की बची है।

बुजुर्गों को प्रताडि़त करने
वालों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है। अकेले रहने वाले बुजुर्गों का डाटा थाना स्तर पर तैयार किया गया है। पुलिस जनसंवाद के जरिए बुजुर्गों से समय-समय पर उनकी समस्याएं जानकर निराकरण की कोशिश करती है।
धर्मेन्द्र चौधरी, डीआइजी