
फोटो सोर्स: पत्रिका
MP News: हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी ने पुरानी बीमारी छिपाने का बहाना बनाकर पीड़ित परिवार को पैसा देने से इनकार कर दिया। मामला उपभोक्ता फोरम तक पहुंचा वहां सुनवाई के बाद फोरम ने मृतक के परिजन को 5 लाख 15 हजार रुपए 7 प्रतिशत ब्याज के साथ चुकाने के आदेश दिए। भोपाल शहर में कोलार निवासी देवदास सैनी ने 2020 में केयर हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी से स्वस्थ बीमा कराया था। सैनी सितंबर 2021 में अचानक बीमार हो गए और 19 जनवरी 2022 को उनकी मृत्यु हो गई।
इलाज के दौरान मृतक देवदास सैनी की पत्नी ने कंपनी से इलाज के लिए राशि की मांग की, लेकिन कंपनी ने यह बोलकर राशि देने से इनकार कर दिया कि मृतक देवदास को पूर्व से बीमारी थी। इससे व्यथित होकर देवदास की पत्नी नूरुन्निशा और बेटी सीमा सैनी ने उपभोक्ता फोरम के समक्ष परिवाद दायर किया। इसमें फ़ोरम द्वारा कंपनी को परिवादी के प्रति सेवा में कमी और अनुचित व्यापार प्रथा का परिचायक पाते हुए 5 लाख रुपए 7 प्रतिशत ब्याज सहित देने के आदेश दिए। यह पूरी राशि दो महीने में अदा नहीं करने पर 9 प्रतिशत वार्षिक व्याज के साथ चुकाने होंगे।
शुगर के मरीज ने ड्यूटी के दौरान पानी की जगह गलती से एचटूओटू पी लिया जिससे उनकी मौत हो गई। कर्मचारी की ग्रुप पर्सनल एक्सीडेंट पॉलिसी थी, बावजूद इसके बीमा राशि के लिए मृतक की पत्नी सीमा भदौरिया को भटकना पड़ा। जिला उपभोक्ता फोरम में मामला आने पर उन्हें राहत मिली।
फोरम ने सुनवाई करते हुए बीमाधारक की पत्नी के पक्ष में फैसला सुनाया। एसएस भदौरिया ग्वालियर सहकारी दुग्ध में टेक्नीशियन के पद पर कार्यरत थे। दुग्ध संघ ने कर्मचारियों की पॉलिसी करवाई थी जिसमें 5 लाख तक रिस्क कवर की गई थी। ये पॉलिसी यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी से ली गई थी।
Updated on:
19 Nov 2025, 5:46 PM IST
Published on:
19 Nov 2025, 5:46 PM IST
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