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जानें…सर्दियों में ही क्यों होती है कार्डियक अरेस्ट की प्रॉब्लम? ऐसे बचें..

सर्दियों में दिन छोटा हो जाने से शरीर के हार्मोन्स के संतुलन पर असर पड़ता है और विटामिन डी की कमी हो जाती है जिससे दिल का दौरा पडऩे की संभावना बन जाती है। 

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Anwar Khan

Dec 10, 2016

cardiac arrest

cardiac arrest

भोपाल। यदि बात मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल की करें तो पिछले एक सप्ताह में तेज ठंड से ब्लड प्रेशर के अनियमित होने से आधा दर्जन लोगों की जान चली गई। यही नहीं सर्दी के कारण हर रोज भोपाल के सरकारी और निजी अस्पतालों में हार्ट अटैक के 6 से आठ मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें से आधे मरीज 50 साल से कम उम्र के हैं, जिन्हें ब्लड प्रेशर बढऩे के कारण हार्ट अटैक हुआ है। जबकि आमतौर पर अस्पतालों में रोजाना तीन से चार हार्ट अटैक के मामले आते हैं। ऐसे में बड़ा सवाल ये उठता है कि आखिर सर्दियों में ही कार्डियक अरेस्ट या फिर हार्ट अटैक के मामले क्यों बढ़ते हैं? भोपाल के कुछ जाने-माने कार्डियक स्पेशलिस्ट ने इसके लिए कुछ प्रमुख कारण बताए हैं। साथ ही ये भी बताया कि आप सर्दियों में कैसे बच सकते हैं...




heart disease

इसलिए सर्दियों में होता है हार्ट बीमार
- अक्षय हार्ट हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. दीपक चतुर्वेदी बताते हैं कि तेज सर्दी से एक्सपोजर होने पर ब्लड में काटीसजेल हार्मोन का लेवल बढ़ जाता है। इससे खून गाढ़ा होने लगता है। ठंड के कारण सिकुड़ी हुई नसों में गाढ़े खून का प्रेशर बढऩे पर वह फट जाती हैं। इससे कार्डियक अरेस्ट हो सकता है।
- हमीदिया अस्पताल के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. टीएन दुबे के मुताबिक इन दिनों दिमाग की रक्त वाहिकाओं में सिकुडऩ की वजह से लकवा के मरीजों की संख्या इन दिनों में दोगुनी हो जाती है।
- बीएमएचआरसी के मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. आदर्श चौरसिया के मुताबिक सर्दियों में दिन छोटा हो जाने से शरीर के हार्मोन्स के संतुलन पर असर पड़ता है और विटामिन डी की कमी हो जाती है जिससे दिल का दौरा पडऩे की संभावना बन जाती है। ज्यादा कसरत करने या लगातार खेलने से वजह से दिल की धमनियां सिकुड़ जाती है जिस वजह से रक्त और ऑक्सीजन का दिल की ओर बहाव कम हो जाता है। इससे रक्तचाप बढ़ जाता है।





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अनजान बीमारी भी मौत की वजह
खेलने के दौरान एक अनजान बीमारी भी मौत की वजह बनती है। हायपर ट्रोपिक काडिज़्यक मायपैथी (एचओसीएम) नाक की इस बीमारी के लक्षण नहीं होते, अचानक कभी भी अरेस्ट हो सकता है। इसमें दिल दीवारें मोटी हो जाती है। यह जन्मजात बीमारी है और 500 लोगों में से एक को होती है। एक मरीज की मौत होने के बाद घर के सभी सदस्यों की जांच होनी चाहिए।




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इन उपायों से बच सकते हैं आप
- ब्लड प्रेशर व मधुमेह की नियमित जांच कराते रहें।
- शराब नहीं पीएं। नियमित अंतराल पर दिनभर पानी पीते रहें।
- तेलीय व ज्यादा मीठा खाने से बचें। रात को तो यह बिल्कुल ना लें।
- ज्यादा ठंड में मॉर्निंग वॉक करने से भी बचें।
- कोहरे और शीतलहर से बचने के लिए गर्म कपड़ों का इस्तेमाल करें।
- दवाई का डोज लेने में कोताही ना बरतें। रक्त को पतला रखने वाली गोलियां हमेशा खाते रहें।
- हीटर का इस्तेमाल करें। बार-बार ठंड-गर्मी में जाने से बचना चाहिए।
- बाहर जाते समय गर्म कपड़ों का इस्तेमाल करें। चेहरे और कानों को अच्छे से ढंक लें।

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