
महादेव की कचहरी
ग्वालियर से करीब 15 किलोमीटर दूर गिरगांव में एक प्राचीन शिव मंदिर है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मंदिर करीब 1000 साल पुराना है। इस पर आसपास के लोगों की गहरी आस्था है। मान्यता है कि महादेव के इस मंदिर की चौखट पर पहुंचते ही बड़े से बड़ा विवाद सुलझ जाता है। इसलिए आसपास लोगों की सामाजिक समस्याएं सामने आती हैं तो उसके लिए यहीं पंचायत लगती है। इस पंचायत को महादेव की कचहरी कहते हैं। इसके अलावा दूसरी समस्याओं के समाधान की गुहार लगाने यहां बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं। हालांकि महाशिवरात्रि पर इस मंदिर में दर्शन करने वालों की भीड़ बढ़ जाती है। अब जब महाशिवरात्रि आने में कुछ दिन ही बचे हैं तो यहां इसकी तैयारियां शुरू हो गई हैं।
महादेव करते हैं न्याय, झूठी कसम खाई तो..
गुर्जर बहुल गिरगांव का यह मंदिर अपनी अदालत और न्याय के लिए प्रसिद्ध है। गिरगांव के लोगों का कहना है कि मंदिर में स्वयंभू शिवलिंग है। यहां हर सोमवार को भगवान की पूजा के बाद अदालत लगती है, जिसमें किसी भी समय कोई गुहार लगा सकता है। कहा जाता है कि इस मंदिर में अभी तक 1000 मामलों का फैसला हो चुका है। मान्यता है कि इस मंदिर में कोई झूठी कसम नहीं खाता और किसी ने ऐसी गलती की तो उसे सजा मिलेगी और नुकसान होगा। यहां महाशिवरात्रि पर बड़ी अदालत का आयोजन होना है।
ये है अदालत की परंपरा
गिरगांव के लोगों के अनुसार आसपास के ऐसे लोग जो थाने और कचहरी में अपने मुकदमे नहीं ले जाना चाहते वो महादेव मंदिर में अपने मामले ले आते हैं। इसके लिए महादेव मंदिर में पंचायत बैठती है, इसमें दोनों पक्षों के लोग होते हैं। इसके बाद वादी प्रतिवादी अपना मुकदमा सामने रखकर पंचो से निर्णय करने का आग्रह करते हैं। इस पर सहमति से विवाद का निराकरण किया जाता है। मान्यता है यह फैसला शिवजी का आदेश होता है। एक अन्य मान्यता के अनुसार मंदिर में महिलाओं से कसम नहीं खिलाई जाती है।
भैंस चोरी के मामलों से हुई शुरुआत
स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां सबसे पहले भैंस चोरी के मामले फैसले के लिए आते थे। क्योंकि पहले यह इलाका भैंस चोरी के लिए कुख्यात था। धीरे-धीरे धन जमीन और संपत्ति के मुद्दे भी लोग यहां लेकर आने लगे।
Updated on:
17 Feb 2024 05:56 pm
Published on:
17 Feb 2024 05:52 pm

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