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अंतरजातीय शादी पर मिलते हैं 2-2 लाख रुपए, फर्जी तरीके से लेने पर हुई एफआइआर

अंतरजातीय विवाह करने पर सरकार द्वारा 2-2 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाती है.

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भोपाल. अंतरजातीय विवाह करने पर सरकार द्वारा 2-2 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाती है, पिछले पांच सालों में सरकार की इस योजना के तहत करीब 106 लोगों को 2.12 करोड़ रुपए की राशि मिल चुकी है, हैरानी की बात तो यह है कि इस योजना के तहत कुछ ऐसे लोगों ने भी प्रोत्साहन राशि हड़प ली है, जिनके बच्चे बड़े हो चुके हैं, जबकि इस योजना का लाभ शादी के एक साल के अंदर लेना होता है, इस कारण करीब 10 जोड़ों पर एफआइआर भी दर्ज कराई गई है।

ऐसे मिलता है योजना का लाभ
अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन योजना के तहत सामान्य जाति के युवक-युवतियों द्वारा अनु.जाति वर्ग के युवक व युवती से अंतर्जातीय विवाह करने पर 2 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है। जिसके लिए आवेदक को हिन्दु विवाह अधिनियम 1955 के तहत अपना विवाह पंजीयन कलेक्टरेट में कराना अनिवार्य होता है। साथ ही अपना पूर्ण आवेदन समस्त आवश्यक पत्रों सहित विवाह तिथि के एक वर्ष के अन्दर प्रस्तुत करना अनिवार्य होता है, इस योजना के तहत पति या पत्नी दोनों में से एक सामान्य जाति का होना चाहिए व दूसरा अनुसूचित जाति का होना आवश्यक है, इस तरह अंतरजातीय विवाह होने के एक साल के अंदर आवेदन कलेक्टर या सहायक आयुक्त को करने पर योजना के तहत लाभ मिलता है, आवेदन के लिए संयुक्त हस्ताक्षर युक्त शपथ पत्र, नोटरी, उम्र,जाति, निवास आधार कार्ड सहित समस्त दस्तावेज की फोटो प्रति प्रस्तुत करनी पड़ती है।

ये होती है प्रक्रिया

प्रोत्साहन राशि के लिए प्रमाण पत्र के साथ कलेक्टर कार्यालय स्थित विवाह पंजीयन अधिकारी के यहां पंजीयन कराना होता है। न्यायालय में निर्धारित प्रारूप में आवेदन शपथ-पत्र एवं अन्य प्रमाण प्रस्तुत करने होते हैै। दोनों पक्षों द्वारा प्रस्तुत जाति प्रमाण-पत्र का सत्यापन संबंधित एसडीएम करता है। थाना प्रभारी से विवाह पंजीयन के संबंध में बिन्दुवार प्रतिवेदन लिया जाता है। फिर आवेदन की जांच मुख्य कार्यपालन अधिकारी करते हैं।

अंतरजातीय विवाह को प्रोत्साहन देने के लिए सरकार एक जोड़े को दो लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि देती है। वर्ष 2022 में इस राशि को लेने के लिए कुछ शादी-शुदा जोड़ों ने राशि हड़प ली। शादी के पांच और सात साल बाद, जब उनके बच्चे हो गए तब आवेदन किया। जबकि, शादी के बाद एक साल के अंदर आवेदन करना होता है। कुछ ने एडीएम के यहां हिंदू मैरिज एक्ट में रजिस्ट्रेशन के लिए फर्जी रजिस्ट्रेशन के साथ फर्जी प्रमाण पत्र भी लगाए। ऐसे दस जोड़ों पर विभाग ने एफआइआर कराई है। पिछले पांच साल में 106 जोड़ों को अंतरजातीय विवाह करने पर 2.12 करोड़ का भुगतान किया गया। 11 मामलों में अभी राशि नहीं मिली है। अंतरजातीय विवाह के लिए मिलने वाली राशि दंपत्ति के ज्वाइंट अकाउंट में जाती है। इसलिए एडीएम के यहां हिंदू मैरिज एक्ट में रजिस्ट्रेशन कराना होता है।

इन पर एफआइआर

जनपद पंचायत बैरसिया में फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करने पर भीकम सिंह अहिरवार उसकी पत्नी माया राजपूत, जितेन्द्र अहिरवार व आरती ठाकुर, विजय मेहतर व प्रीति बाई, हेमराज जाटव व सवित्री बाई, आजाद सिंह व संजू अहिरवार, लखन अहिरवार व सपना अहिरवार, पूरन सिंह व सावित्री बाई, प्रेमनारायण अहिरवार व बिंदो बाई, जितेन्द्र अहिवार व रजनी तथा सुनील अहिरवार एवं उसकी पत्नी सोनम पर कोहेफिजा थाने में एफआइआर दर्ज है। इनके विवाह वर्ष 2008 से वर्ष 2018 के बीच हुए। सभी बच्चे भी हो गए।

ये कहता है नियम

● विवाह के एक साल के अंदर आवेदन करें। विवाह संबंधी प्रमाण पत्र भी दें

● सजातीय प्रकरणों में राशि नहीं मिलती

● दंपत्ति में से एक अनुसूचित जाति का और दूसरा सवर्ण हो

यहां करें ऑनलाइन आवेदन

अंतरजातीय विवाह पर प्रोत्साहन राशि के लिए अनुसूचित जाति विकास पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

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पात्र लोगों के आवेदन को समिति अनुमोदित करती है। हिंदू मैरिज एक्ट में पंजीयन होता है। इसे एक साल के अंदर कराना जरूरी है। वरना आवेदन निरस्त हो जाता है।

-अवनीश चतुर्वेदी, असिस्टेंट कमिश्नर, ट्राइबल विभाग