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एक किस्सा ऐसा भीः जब एक शख्स ने भरे मंच से बोल दी शिवराज को शूट करने की बात

MP के पूर्व राज्यपाल बलराम जाखड़ का 23 अगस्त को जन्म दिवस है। मध्यप्रदेश के राज्यपाल के रूप में बलराम जाखड़ ने जून 2004 से जून 2009 तक कार्य किया...

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भोपाल

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Manish Geete

Aug 23, 2017

balram jakhar

भोपाल। मध्यप्रदेश के पूर्व राज्यपाल बलराम जाखड़ अपने सख्त और बेबाक रवैये के लिए हमेशा चर्चाओं में बने रहते थे। जाखड़ की बेबाकी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भोपाल के एक कार्यक्रम के दौरान मंच से ही उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के लिए भावनात्मक होकर कह दिया था कि शिवराज काम करो नहीं तो मैं शूट कर दूंगा। उनकी इस बात से प्रदेश की राजनीति में हलचल मच गई थी। जाखड़ का ये बयान आज भी राजनेताओं की जुबां पर आ जाता है। यह किस्सा तब का है जब राज्य सरकार और राजभवन के बीच टकराव चल रहा था।

जाखड़ का ये बयान भी रहा चर्चाओं में
जाखड़ का दूसरा किस्सा इंदौर में हुआ, जब एक कार्यक्रम के दौरान मंच से ही उन्होंने इंदौर के बहुचर्चित पेंशन घोटाले को लेकर बड़ा बयान दे डाला था। उन्होंने कहा था कि जो गरीबों का पैसा खा गए उन्हें कीड़े पड़ेंगे। यह बात भी काफी समय तक सुर्खियों में बनी रही।

जब फूट-फूटकर रोए जाखड़
प्रदेश में कई कार्यक्रम के दौरान ऐसा वक्त भी आया जब वे भावुक होकर मंच पर ही फूट फूटकर रोए थे।

उनकी Hight बन गई थी परेशानी
जाखड़ की लंबाई साढ़े छह फीट थी। वे अपनी लंबाई के कारण भी हमेशा चर्चाओं में बने रहते थे। एक बार उनका दौरा था और उन्हें किसी गेस्ट हाउस में ठहरना था। सामान्यतः छह फीट की लंबाई से ज्यादा का पलंग कहीं नहीं होता है। लेकिन, जाखड़ की लंबाई को देखते हुए उनके लिए विशेष लंबाई वाला पलंग बनवाया गया। यह खबर भी अखबार की सुर्खियां बन गई थीं।

लंबाई के कारण बदलनी पड़ी कार
जब बलराम जाखड़ राज्यपाल बने थे तो सरकार की तरफ से मर्सिडीज कार दी गई थी। जाखड़ की हाईट के कारण उन्हें उठने-बैठने में काफी दिक्कत होती थी। उनके घुटने आगे वाली सीट से टकराते थे। इस वजह से के लिए दूसरी कार खरीदी गई, जिसे मोडीफाई करवाया गया। वे जब तक राज्यपाल रहे, उसी कार में आरामदायक सफर करते रहे।

पांच साल में देखें तीन-तीन मुख्यमंत्री
पूर्व राज्यपाल जाखड़ ने पांच साल का कार्यकाल पूरा किया था। इस दौरान मध्यप्रदेश की राजनीति में उथल-पुथल के कारण तीन मुख्यमंत्री बदलने पड़े। जून 2004 में खुद राज्यपाल बनने के बाद दो माह बाद ही उमा भारती ने इस्तीफा दे दिया था, तो बाबूलाल गौर को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई गई। इसके बाद जाखड़ ने शिवराज सिंह चौहान को भी शपथ दिलाई थी।

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