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‘न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर’ से पीड़ित थे इरफान खान, जानिये कैसे होती है ये खतरनाक बीमारी

जानिए क्या है ये बीमारी.....

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irrfan khan

भोपाल। बॉलीवुड स्टार इफान खान (irrfan khan) का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया है। वो लंबे समय से कैंसर से जंग लड़ रहे थे। इरफान ने बुधवार की सुबह 11 बजे के करीब मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में आखिरी सांस ली। मंगलवार को अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई थी जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उन्हें आईसीयू में रखा गया था।

आपको बता दें कि उन्हें कोलोन इन्फेक्शन के चलते अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। देर रात ये भी दावा किया गया था कि अब उनकी तबीयत में सुधार है और उनकी मौत की खबरें झूठी हैं, लेकिन आज सुबह उनकी मौत की जानकारी दी गई। इरफान खान को साल 2018 में पता चला था कि उन्हें न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर (Neuroendocrine Tumor) है। न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर के इलाज के लिए इरफान ने लंदन में साल भर तक इलाज कराया था।

क्या है न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर ?

न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर एक दुर्लभ प्रकार का ट्यूमर है, जो शरीर के किसी भी भाग में हो सकता है। न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर ज्यादातर मामलों में फेफड़े, अग्नाशय, छोटी आंत, अपेन्डिक्स और रेक्टम को प्रभावित करता है। इस बीमारी में अंत: स्रावी ग्रंथियां प्रभावित होती हैं। अंत स्रावी ग्रंथिया हार्मोन का स्राव करती हैं और इनका नियंत्रण तंत्रिका तंत्र से होता है।

इन ग्रंथियों में पाई जाने वाली विशेष प्रकार की अंत: स्रावी कोशिकाओं की अनियंत्रित बढ़ोतरी से कैंसर होता है। दुनिया में करीब साढ़े चार लाख लोग इस बीमारी का सामना कर रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक 2025 तक न्यूरो एंडोक्राइन ट्यूमर से प्रभावित होने वालों की संख्या करीब साढ़े पांच लाख हो जाएगी। अमेरिका में करीब 12 हजार लोग हर वर्ष इस बीमारी का शिकार होते हैं।

इन लक्षणों को न करें नजरंदाज

- चक्कर आना, कमजोरी, और दिल की धड़कन तेज होना, तनाव, घबराहट, अस्थिरता और बेहोशी।
- ब्लड प्रेशर का बढ़ना, बुखार और उल्टी, दस्त की शिकायत।
- लगातार पेशाब आने की शिकायत या भूख और प्यास का बढ़ जाना।
- खांसी, सांस में कमी, सांस लेते समय बेचैनी और छाती में दर्द होना

क्या है इलाज

डॉक्टर अलग-अलग उपचारों के साथ उन्हें निकाल या हटा सकते हैं। अन्य उपचार आपके लक्षणों को बेहतर बना सकते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक ये कई मायनों में आनुवांशिक हो सकती है। अगर मां और बाप से कोई एक भी इस बीमारी से पीड़ित है तो बच्चों के भी प्रभावित होने की आशंका हमेशा बनी रहती है। अगर किसी शख्स में प्रतिरक्षा तंत्र कमजोर होता है तो उसमें इस बीमारी के होने की आशंका बढ़ जाती है।