
प्रदेश की जेलों में बंद कैदियों की समस्याओं के निराकरण के लिए जेल विभाग की ओर से नई पहल शुरू की गई है। प्रदेश में 131 से ज्यादा जेल हैं। जिसमें 6 खुली जेल और 125 रेगुलर जेल है। लिहाजा हर जेल का निरीक्षण कर पाना और प्रत्येक कैदी से बातचीत कर पाना संभव नहीं है। इसलिए जेल मुख्यालय भोपाल की ओर नई कवायद शुरू की गई। जेल डीजी हर सप्ताह के बुधवार या गुरूवार को प्रदेश की 6से 7 जेलों में बंद कैदियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर बातचीत करते हैं। वीसी में जिले के जेलों में बंद कुछ कैदियों को लाइव जोड़ा जाता है। जिससे सीधा संवाद कर उनसे जुड़ी समस्या सुनी जाती है और निराकरण किया जाता है। वीसी के लिए भोपाल मुख्यालय में एक खास रूम तैयार किया गया है जहां से सीधे प्रदेशभर की जेलों में संवाद स्थापित होता है।
जेलर तय नहीं वीसी में जुड़ने वाले कैदियों के चुनाव
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में पारदर्शीता और जेल की मूल समस्या सामने आए इसको लेकर जेल मुख्यालय की ओर से तय किया गया है कि जेल डीजी से वीसी से संवाद कौन- कौन बंदी करेंगे इसका फैसला जेलर नहीं बल्कि जेल मुख्यालय से ही लिया जाता है। जेल मुख्यालय से कैदियों के नाम तय किए जाते हैं जिन्हें लाइव संवाद के दौरान जोड़ा जाता है।
परिजनों से मिली शिकायतों का ऑनलाइन निराकरण
जेल में बंद कैदियों के परिजन भी विभिन्न मामलों को लेकर लिखित में शिकायत करते हैं जिसका निराकरण भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ही किया जाता है। ऑफलाइन निराकरण में और प्रक्रिया में काफी वक्त लगता है। और दूसरा कैदी से संवाद भी नहीं हो पाता है। इसलिए वीसी के जरिए कैदी से सीधी बात कर शिकायत दूर की जाती है।
प्रदेशभर की जेलों में फिजीकली निरीक्षण कर पाना असंभव है। इसलिए हमने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हर सप्ताह सीधा संवाद शुरू किया है। प्रत्येक सप्ताह के बुधवार या गुरूवार को प्रदेश की करीब 6 से 7 जेलों से बंदियों की समस्याएं सुनी जाती है। वीसी में जुड़ने वाले बंदियों का चुनाव हम स्वंय करते हैं।
अरविंद कुमार, जेल डीजी
Published on:
23 Jul 2022 07:43 pm

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