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जयवर्धन बोले – मेट्रो, रियल एस्टेट पॉलिसी और लैंड पूलिंग पॉलिसी से खुली विकास की नई राह…

पहली बार नई रियल एस्टेट पॉलिसी घोषित की। इससे गिरते रियल एस्टेट सेक्टर को संभालकर बूस्टअप में मदद मिली।

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jaivardhan

भोपाल। शहरी आवास एवं विकास मंत्री जयवद्र्धन सिंह ने कहा कि सालभर में हमने वो काम किए, जो भाजपा पंद्रह साल में नहीं कर पाई थी। मेट्रो का काम पिछले 11 साल से अटका था, लेकिन इसे हमने तुरंत शुरू कर दिया। इंदौर-उज्जैन और भोपाल के लिए रैपिड रेल का सिस्टम लाने का फैसला किया है। पहली बार नई रियल एस्टेट पॉलिसी घोषित की। इससे गिरते रियल एस्टेट सेक्टर को संभालकर बूस्टअप में मदद मिली।

40 साल में कभी लैंड पूलिंग पॉलिसी नहीं आई, लेकिन हमने इसे सालभर में घोषित किया। ई-रिक्शा महिलाओं को उपलब्ध कराया। 400 ई-व्हीकल बस चलाना तय किया है। भोपाल के जीआईएस बेस्ड मास्टर प्लान को हम जल्द लाएंगे। विकास प्राधिकरणों के अटके प्रोजेक्ट की जमीन किसानों को लौटाने का ऐतिहासिक फैसला किया। करीब 250 शहरों के जीआईएस बेस्ड मास्टर प्लान अगले दो साल में लाए जाएंगे। इसके अलावा कलेक्टर गाइडलाइन में 20 फीसदी की कमी ऐतिहासिक फैसला रहा। पीएम आवास में आवासीय पट्टे देना शुरू किए हैं। शहरी विकास के लिए सालभर में अनेक फैसले लिए गए, जिससे जनता का विश्वास हमारी सरकार पर बढ़ा है।

अधूरा रहा वादा, अभी करना होगा लंबा इंतजार

कांग्रेस ने सत्ता में आने पर मप्र सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने का वादा किया था, लेकिन सालभर में यह सपना पूरा नहीं हो पाया। सरकार ने इसके लिए प्रयास खूब किए। सैटेलाइट टाउनशिप बनाने का ऐलान भी किया। इसके लिए पूरा प्रोजेक्ट प्लान भी बनाया गया। इसका मकसद भोपाल-इंदौर पर बढ़ते आबादी के दबाव को कम करना और समग्र विकास करना है। इसके लिए सरकार ने दिल्ली-नोएडा की तर्ज पर भोपाल व उसके आस-पास के जिलों और इंदौर और आस-पास के जिलों के इलाकों को मिलाकर सैटेलाइट टाउनशिप बनाना तय किया गया।

उज्जैन और देवास तक रेपिड रेल चलाने का प्रोजेक्ट भी बन रहा है, लेकिन अभी इस वादे को पूरा होने में समय लगेगा। पहले इन प्रोजेक्ट का फिजिबलिटी सर्वे होना है, किंतु सरकार अभी सर्वे नहीं कर पाई है। इतना जरूर है कि मिक्स लैंड यूज के लिए सरकार नई पॉलिसी लाई है, ताकि इन शहरों के आस-पास के इलाकों का विकास हो सके।

शहरों में यदि एफएआर का इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है, तो शहर के लगे हिस्सों में उसका इस्तेमाल हो सके। सरकार ने यह नीति भी तय कर दी है कि सैटेलाइट टाउन शिप के हिसाब से ही अब मास्टर प्लान घोषित होंगे। इस कारण जीआईएस बेस्ड मास्टर प्लान बनाना तय किया गया है, लेकिन अभी इसे धरातल पर उतरने में समय लगेगा।