कैलाश विजयवर्गीय, प्रहलाद पटेल को क्यों नहीं मिले बड़े जिले, ट्वीट ने मचाई हलचल
Jitu Patwari Tweet एमपी बीजेपी के सबसे सीनियर नेताओं केबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और प्रहलाद पटेल को अपेक्षाकृत छोटे जिलों की कमान दी गई है जिसपर सियासी हलचल तेज हो गई।
Jitu Patwari Tweet Kailash Vijayvargiya Prahlad Patel मध्यप्रदेश में मंत्रियों को जिलों का प्रभार सौंप दिया गया है। सीएम डॉ. मोहन यादव द्वारा सत्ता संभालने के 7 माह बाद राज्य के मंत्रियों को विभिन्न जिलों का दायित्व दिया गया है। सोमवार देर रात मंत्रियों और उनके प्रभार के जिलों की सूची जारी हुई। एमपी बीजेपी के सबसे सीनियर नेताओं केबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और प्रहलाद पटेल को अपेक्षाकृत छोटे जिलों की कमान दी गई है जिसपर सियासी हलचल तेज हो गई। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस पर चुटकी भी ली है।
प्रदेश की व्यवसायिक राजधानी इंदौर का प्रभार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पास ही है। उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा को जबलपुर और देवास का तथा दूसरे डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल को सागर व शहडोल का प्रभार दिया गया है।
सीनियर केबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को सतना और धार जिलों का तथा प्रहलाद पटेल को भिंड और रीवा जिलों का प्रभार दिया गया है। इन दोनों नेताओं को अपेक्षाकृत छोटे जिलों का प्रभार देने पर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी ने ट्वीट किया। उन्होंने अपने एक्स हेंडल पर तंज कसते हुए लिखा—
कैलाश विजयवर्गीय और प्रहलाद पटेल जैसे सीनियर मंत्रियों को इंदौर, भोपाल, ग्वालियर जैसे जिलों के प्रभार नहीं देकर गुपचुप हो रही चर्चा को सरेआम कर दिया गया है! चर्चा सिर्फ यह है कि कुलीनों के कुनबे में कलह मची है!
जीतू पटवारी का ट्वीट
मुख्यमंत्री ने 7 महीने बाद मंत्रियों को जिले के प्रभार सौंप दिए हैं! दिल्ली के दखल और देर रात तक की मशक्कत में फिर यह साबित कर दिया है कि @BJP4MP में पॉवर पॉलिटिक्स को लेकर गहरी और गंभीर किस्म की खींचतान बची हुई है!
जिलों के प्रभार वितरण में भी मुख्यमंत्री ने बड़ा रिमोट अपने हाथ में ही रखा है! आर्थिक राजधानी इंदौर के@BJP4India नेता ही यह सवाल पूछ रहे हैं कि जो व्यक्ति अपने गृह नगर को नियंत्रित नहीं कर पा रहा है वह महानगर की जिम्मेदारी कैसे निभाएगा?
कैलाश विजयवर्गीय और प्रहलाद पटेल जैसे सीनियर मंत्रियों को इंदौर, भोपाल, ग्वालियर जैसे जिलों के प्रभार नहीं देकर गुपचुप हो रही चर्चा को सरेआम कर दिया गया है! चर्चा सिर्फ यह है कि कुलीनों के कुनबे में कलह मची है!
फिलहाल इतनी उम्मीद ही की जा सकती है कि @CMMadhyaPradesh मंत्रियों को स्वतंत्रता से काम करने का अवसर देगा! लूट की छूट और कमीशनबाजी की कहानियों पर अंकुश लगेगा! बेलगाम और बेपटरी हो चुकी कानून व्यवस्था कंट्रोल में आएगी!