
kamalnath and shivraj
भोपाल. शिवराज सरकार के दावों का कमलनाथ सरकार ऑडिट कराने जा रही है। पिछली भाजपा सरकार में विधानसभा चुनाव के ऐन पहले कई कार्यों के लक्ष्य पूरे घोषित कर दिए गए थे। तब, चुनावी लाभ के लिए इन लक्ष्यों को मार्च से घटाकर अक्टूबर 2018 भी कर दिया गया और ओडीएफ, पीएम आवास, बिजली, गरीबी मुक्त पंचायत सहित अन्य सेक्टरों में कागजों पर ही काम बता दिए गए। दावा किया कि प्रदेश खुले में शौच मुक्त हो चुका है। हर गांव में बिजली पहुंच चुकी है पर हकीकत इससे जुदा नजर आ रही है।
अब कमलनाथ सरकार के सामने इन सेक्टर्स की खामियां सामने आ रही हैं। लिहाजा सरकार ने इनकी जांच कराना तय किया है। ताकि यह सामने आ सके कि पिछली सरकार के समय सरकारी रिपोर्टों में जो दावे किए गए हैं, वे जमीनी स्तर पर कितने सच्चे हैं। इसके तहत काम शुरू हो गया है। संबंधित विभागों में इन मुद्दों पर सर्वे कराने से लेकर मैदानी निरीक्षण तक की कार्ययोजना तैयार की जा रही है।
पानी पर बेहाल प्रदेश
सू बे में पानी को लेकर हाहाकार मचा है। ऐसे में पिछली सरकार के समय पानी पर खर्च हुए बजट को लेकर ऑडिट की तैयारी है। दरअसल, यह पाया गया है कि पूर्व में पानी के परिवहन पर जिस तरह राशि खर्च की गई वह गलत थी। इस बार भीषण संकट होने के बावजूद उस अनुपात में राशि खर्च नहीं हो रही है। ऐसे में सरकार ने शहरी और ग्रामीण स्तर पर पानी का ऑडिट कराने का निर्णय लिया है। इसमें देखा जाएगा कि पानी को लेकर प्रदेश की जरूरत क्या है और आपूर्ति कितनी हो रही है। मौजूदा संसाधनों की क्षमता कितनी है और कितनी जरूरत है। इसमें भाजपा सरकार के समय किए गए खर्च की वास्तविकता भी देखी जाएगी, क्योंकि शिवराज सरकार ने बारिश पूर्व जलाभिषेक अभियान को जोर-शोर से चलाया था।
गरीबी मुक्त पंचायत
पिछली सरकार में गरीबी मुक्त पंचायत को लेकर लक्ष्य पूरे होने बता दिए गए। करीब 1900 पंचायतों को पिछले वित्तीय वर्ष में पूरा करना था, लेकिन उससे पहले लक्ष्यपूर्ति बता दी गई। सरकार इसकी भी जांच कराएगी। देखा जाएगा कि वास्तव में कितना काम हुआ है। पिछली भाजपा सरकार में दावा किया गया था कि गरीबी मुक्ति अभियान से 12त्न तक गरीबी घटी है पर कांग्रेस का मानना है कि बेरोजगारी व गरीबी बढ़ी है।
पीएम आवास
पी एम आवास को लेकर बड़े पैमाने पर गड़बड़झाला है। पिछली सरकार ने सितंबर 2018 में ही 3.50 लाख लोगों को पीएम आवास मंजूरी के सर्टिफिकेट बांट दिए थे, लेकिन इनमें से डेढ़ लाख ही पिछली सरकार तक पूरे हो पाए थे। उस पर एक लाख आवास विभिन्न स्तरों पर निर्माणाधीन हंै, जो पहले विधानसभा चुनाव और फिर लोकसभा चुनाव के कारण लक्ष्यों से पिछड़ गए। बजट की कमी के कारण इन निर्माणों को पूरा नहीं किया जा सका। अब पीएम आवास को लेकर प्रदेश सरकार पर दबाव बन रहा है। इसलिए सरकार ने पीएम आवास को लेकर भी पूरा डाटा एनालिसिस व मैदानी परीक्षण कराना तय किया है। इसमें पीएम आवास की गुणवत्ता से लेकर हितग्राही तक की स्थिति देखी जाएगी।
ओडीएफ का सच
शिवराज सरकार ने जिन शहरों -गांवों को ओडीएफ घोषित किया है, उनकी जांच की जाना है। कमलनाथ के निर्देश पर ग्रामीण विकास विभाग ने खाका तैयार करना शुरू कर दिया है। सर्वे में जहां-जहां अलग रिजल्ट आएंगे, वहां के लिए अलग कार्ययोजना बनाकर काम होगा। भाजपा सरकार ने नरसिंहपुर को सबसे पहले ओडीएफ जिला घोषित किया था। इसके बाद तय लक्ष्य से एक साल पहले अक्टूबर 2018 तक पूरे प्रदेश को ओडीएफ करार दे दिया गया। अब इस सच्चाई की जांच होगी, क्योंकि पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने हाल ही में ओडीएफ के आंकड़ों को फर्जी बताया था। केंद्र ने एक रिपोर्ट के आधार पर कहा था कि मध्यप्रदेश ओडीएफ है, लेकिन दिग्विजय सिंह ने कहा था कि अभी भी 44त्न आबादी खुले में शौच करती है।
बिजली की हकीकत
भाजपा सरकार ने 31 अक्टूबर 2018 की स्थिति में सभी गांवों तक बिजली पहुंचाने की बात कही थी। सौभाग्य योजना के तहत 43 लाख घरों तक बिजली पहुंचाने का लक्ष्य था। भाजपा सरकार ने इसे पूरा करने का दावा किया, लेकिन अभी भी 900 गांवों तक बिजली की पहुंच पर्याप्त नहीं है। कांग्रेस सरकार ने इसके तथ्य जांचना तय किया है। इसमें मैदानी निरीक्षण के जरिए सच्चाई जानी जाएगी।
ये मुद्दे भी दायरे में
इस दावों के अलावा पूर्व में भी कांग्रेस सरकार पिछली भाजपा सरकार के चुनिंदा दावों की जांच का ऐलान कर चुकी है। इसमें सिंहस्थ घोटाला, नर्मदा किनारे पौधारोपण और व्यापमं सहित अन्य मुद्दे शामिल हैं।
गांवों में खुले में शौच को लेकर ओडीएफ दर्जे की क्या स्थिति है, यह देखा जाएगा। सीएम कमलनाथ ने इसके निर्देश दिए हैं। पिछली सरकार में कागजों पर काम हुआ है। अब इसकी सच्चाई की पड़ताल की जाएगी।
- कमलेश्वर पटेल, मंत्री, ग्रामीण विकास विभाग
कांग्रेस सरकार पिछली सरकार के कामकाज का ऑडिट करे न करे, यह उसकी इच्छा है, लेकिन अभी तक कांग्रेस सरकार ने क्या किया, इसका पहला ऑडिट जनता ने लोकसभा चुनाव में कर दिया है। यही हाल रहा तो अगला ऑडिट भी जनता जल्द कर देगी।
- डॉ. नरोत्तम मिश्रा, पूर्व मंत्री
Published on:
11 Jun 2019 08:08 am
