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टेक्सटाइल इंडस्ट्री फिर बनेगी प्रदेश की पहचान, निवेश से दूर होगी बेरोजगारी

- कपड़ा उद्योग में निवेश से दूर होगी बेरोजगारी- कपड़ा एवं वस्त्र उद्योग में निवेश से बदलेगा परिवेश  

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भोपाल

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Arun Tiwari

Oct 14, 2019

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भोपाल : कभी कपड़ा उद्योग के लिए पहचाने जाने वाला मध्यप्रदेश दोबारा टेक्सटाइल हब बनने की तरफ आगे बढ़ रहा है। प्रदेश में कपड़ा उद्योग में बेहतरी की बहुत संभावनाएं। टेक्सटाइल इंडस्ट्री में निवेश से बड़ी संख्या में रोजगार पैदा होगा जो प्रदेश के बेरोजगार युवाओं के हाथों को काम मुहैया कराएगा। प्रदेश में ये उद्योग वर्तमान में संकट से गुजर रहा है।

प्रदेश की अर्थव्यवस्था में कपड़ा उद्योग की हिस्सेदारी को देखते हुए मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इस क्षेत्र को दूर कर इसे बढ़ावा देने की कोशिश की है ताकि टेक्सटाइल के क्षेत्र में नया निवेश आए और रोजगार बढ़े। मुख्यमंत्री चार संभागों में टेक्सटाइल और गारमेंट पार्क स्थापित करने की घोषणा पहले ही कर चुके हैं जिस पर गंभीरता से काम शुरु हो गया है।

ये गारमेंट पार्क धार के मोहना औद्योगिक क्षेत्र, भोपाल के अचारपुरा, छिंदवाड़ा के लहगडुआ औद्योगिक क्षेत्र और रतलाम के जावरा में स्थापित किए जाएंगे। प्रदेश में कपड़ा एवं वस्त्र उद्योग के लिए सबसे बड़ी सुविधा यह है कि उसे कपास उत्पादन से लेकर वस्त्र तैयार करने तक किसी बाहरी उपक्रम की बाट नहीं जोहनी पड़ती।

कच्चे माल की उपलब्धता, बेहतरीन सुविधाओं, अहम बुनियादी ढांचे, कुशल श्रमिकों और सरकार की मदद से प्रदेश में कपड़ा एवं वस्त्र उद्योग के फिर से अपनी पहचान बनाने की तरफ आगे बढ़ रहा है।

- रोजग़ार के अवसर अपार

कपड़ा एवं वस्त्र उद्योग रोजग़ार की अपार संभावनाओं से भरा क्षेत्र है। उद्योग जगत के अनुमानों के अनुसार यह वाहन और इंजीनियरिंग क्षेत्र की तुलना में 10 गुना और रसायन एवं पेट्रोकेमिकल क्षेत्र की तुलना में 100 गुना तक अधिक रोजग़ार उपलब्ध कराता है। अकेले मध्यप्रदेश में ही 60 से अधिक बड़ी टैक्सटाइल मिलें, 4000 हजार से अधिक हथकरघे, 17,000 से अधिक पॉवरलूम इकाइयां और 2.50 लाख से अधिक स्पिंडलर हैं।

इन इकाइयों ने प्रदेश भर में करीब 70,000 लोगों को रोजग़ार प्रदान किया है। प्रदेश के भोपाल, इंदौर, बुरहानपुर और छिंदवाड़ा जिलों में तथा इनके आसपास बहुत बड़ी तादाद में कपड़ा एवं वस्त्र निर्माण इकाइयां मौजूद हैं। ये इकाइयां इन क्षेत्रों में रोजग़ार का एक बड़ा जरिया हैं।

प्रदेश में बहुत बड़े पैमाने पर यार्न का निर्यात किया जाता है जिसमें पिछले कुछ समय में गिरावट देखने को मिल रही है। बड़ी संख्या ऐसे कारीगरों की भी है जो पारंपरिक रूप से हैंडलूम, ब्लॉक प्रिंटिंग जैसे पेशे से जुड़े रहे लेकिन ये भी सरकारी मदद के अभाव में दूर हो रहे हैं।