कारीगर उनके बताए डिजाइन को कर देते थे रिजेक्ट, कोर्स कर सीखी डिजाइनिंग
भोपाल। बिजनेसवुमन खुशबू जैन ने पुरुष वर्चस्व वाले कस्टमाइज फर्नीचर डिजाइनिंग और मैन्यूफैक्चरिंग बिजनेस में अपनी अलग पहचान बनाई है। उनका यह सफर इतना आसान भी नहीं था जब उन्होंने ये बिजनेस शुरू किया तो उनके पास इसका कोई खास अनुभव नहीं था। वे जयपुर से इंटीरियर डिजाइनिंग का कोर्स कर अपना काम कर रही थीं। 2015 में उनकी बहन की एक सड़क हादसे में मौत हो गई। बहन का सपना था कि वह कस्टमाइज फर्नीचर डिजाइनिंग का बिजनेस करे। उनकी मौत के बाद खुशबू जयपुर छोड़कर भोपाल सैटल हो गई और 2016 में बिजनेस स्टार्ट किया। आज उनके साथ 15 कारीगरों की टीम काम कर रही है।
खुशबू बताती हैं कि मैं जो डिजाइन कारीगरों का बताती थी वे कहते थे कि ये नहीं हो पाएगा। मैंने दिल्ली से वुड वर्किंग का कोर्स किया और इस फील्ड की बारीकियों को जाना। मैंने इसका नाम कासा नोना(प्यारा घर) रखा, क्यंूकि घर में बहन पंखुड़ी को नोना ही बुलाते थे। शुरुआत में अरेरा कॉलोनी में 650 स्केवयर फीट की शॉप और वर्कशॉप के साथ बिजनेस शुरू किया, तब महज 2 कारीगरों की ही टीम थी। मेरी सोच थी कि शहर में पिछले 25-30 साल से एक जैसे पैटर्न पर ही फर्नीचर बनाया जा रहा है। इसमें कुछ यूनिक करना चाहिए। हमने ग्लोबल लेवल के डिजाइन्स को कस्टमाइज करना शुरू किया।
मार्केटिंग की जिम्मेदारी भी खुद संभाली
खुशबू ने बताया कि शुरुआत में डिजाइन्स तैयार करने से लेकर मार्केटिंग तक की जिम्मेदारी मैं खुद ही संभालती थी। कारीगरों के साथ पुरुष ग्राहक और अन्य दुकानदारों को समझाना भी आसान नहीं था। वे सोचते थे कि महिला को फर्नीचर के बारे में क्या पता। मैं अपने डिजाइन्स से सभी को जवाब दिया। इंटीरियर डिजाइनिंग की पढ़ाई भी मैंने बेटी के 4 साल के होने के बाद की थी, वो भी मेरे बहुत काम आई। मैं वीडियोज की मदद से खुद भी सीखती थी और कारीगरों को भी सीखाती थी। अब हम इस बिजनेस से महिलाओं को जोडऩे के लिए उनसे कढ़ाई और कुशन वर्क करा रहे हैं।